Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block

समरथ को नहीं दोष गोसाई

प्रदीप श्रीवास्तव

वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए विशेष

ये अराजक दुनिया है, जहाँ हर दिन हताश करने वाली ख़बर आती है. इस तरह की ख़बरों से पहले से ही कमज़ोर भारत के खेल ढाँचे के छिन्न-भिन्न होने का ख़तरा हैं.

अराजकता इस हद तक फैली हुई है कि किसी एक व्यक्ति या संस्था को चुनना काफ़ी कठिन है.

खेल प्रशासन हो या इससे बाहर की दुनिया, खेल को अपने निजी और राजनीतिक हित के लिए इस्तेमाल करने वाले लोग अब हमारी ऐसी-तैसी करने के लिए तैयार हैं.

इस साल भारत में हॉकी विश्व कप है और आगे चलकर राष्ट्रमंडल खेल भी. भव्य खेल स्टेडियम और अन्य निर्माण कार्यों पर करोड़ो ख़र्च हो रहे हैं.

लेकिन क़रीब-क़रीब हर खेल फ़ेडरेशन फ़ायदे के लिए सिर-फुटौव्वल कर रहा है.

सवाल

हॉकी इंडिया की अराजकता कोर्ट के पाले में है और कोई नहीं जानता कि हॉकी इंडिया किसके नियंत्रण में है.

इतिहास में पहली बार ओलंपिक हॉकी के लिए क्वालीफ़ाई न कर पाई भारतीय टीम के ख़राब प्रदर्शन के कारण फ़ेडरेशन से हटाए गए केपीएस गिल वापसी के लिए टकटकी लगाए हुए हैं.

जब कोई भी उनके कार्यकाल के दौरान के कुछ ऐसे तथ्यों से रुबरू कराने की कोशिश करता है, पूर्व पुलिस अधिकारी केपीएस गिल लाल-पीले हो जाते हैं और भद्दी भाषा का प्रयोग करने लगते हैं. जैसा उन्होंने मेरे साथ एक टीवी शो के दौरान किया था.

'शक्तिशाली हमेशा सही होता है'- इस दुनिया में इसे लोकतांत्रिक रूप से मान्यता मिली हुई है. मराठी अस्मिता के रक्षक भारत के सबसे चर्चित फ़िल्म स्टार को निशाना बनाए हुए हैं.

क्योंकि उन्होंने कई लोगों की तरह आईपीएल में पाकिस्तानी खिलाड़ियों का समर्थन किया. ऐसा लगता है कि क़ानून से बंधे शाहरुख़ भागे फिर रहे हैं और जो लोग उत्तेजक और विद्रोही आवाज़ में बोल रहे हैं वो उस क़ानून का मज़ाक उड़ा रहे हैं.

निशाना

पाकिस्तान के खिलाड़ियों को आईपीएल में जगह न दिलाने के मिशन में सफल होने के बाद उनके निशाने पर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी हो सकते हैं.

भारत में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की सुरक्षा पर ख़तरा वास्तविक है. भारतीयों छात्रों पर हमलों और उन पर यहाँ की प्रतिक्रिया को देखते हुए यह सही लगता है.

इन खिलाड़ियों को यहाँ क्या करना है और क्या नहीं करना है, इसकी लंबी सूची है. लेकिन इनमें से एक है सार्वजनिक स्थान पर ऐसा कुछ न पहनना, जिससे उनकी राष्ट्रीयता की पहचान हो.

राष्ट्रीय गर्व से जुड़ा कोई भी व्यक्ति इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकता है.

आइडिया

'पागल बाहरी' लोगों से किसी व्यक्ति को बचाने का ये कितना चतुर तरीक़ा है! इससे तो ऑस्ट्रेलिया की सरकारी एजेंसियों को सीख लेनी चाहिए ताकि वे भारतीयों की सुरक्षा कर सकें.

सुरक्षा के इस उन्माद में पत्रकारों को भी नहीं छोड़ा जा रहा है. विश्व कप हॉकी की कवरेज के लिए इच्छुक पत्रकारों से कई तरह के सवालों के जवाब मांगे जा रहे हैं.

इनमें क़ानून से बंधे नागरिक और समर्पित कर्मचारी के रूप में उनसे रिकॉर्ड तक मांगे जा रहे हैं. जेल जाने से संबंधित सवालों के अलावा ये भी सवाल पूछा जा रहा है कि क्या उन्हें कभी नौकरी से निकाला गया है या कभी उनके ख़िलाफ़ किसी तरह की अनुशासनात्क कार्रवाई हुई है?

मेरे दिमाग़ में ललित मोदी के लिए एक अच्छा आइडिया आया है. क्यों न नौकरी से निकाले गए या जेल गए पत्रकारों को आईपीएल के प्रेस बॉक्स में जगह दिलाने के लिए कोई रास्ता निकाला जाए.. कुछ अतिरिक्त डॉलर देकर उन्हें जगह दी जा सकती है.

व्हाट ऐन आइडिया सर जी...

(लेखक हिंदुस्तान टाइम्स के खेल सलाहकार हैं)

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:30 [IST]
Other articles published on Nov 14, 2017
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+