'महिला क्रिकेट से होती है शरीर की नुमाइश', तालिबान ने अफगानिस्तान की टीम पर लगाया बैन
नई दिल्ली। अफगानिस्तान में पिछले महीने हुई सत्ता की फेर बदल के बाद आतंकी संगठन तालिबान ने सरकार पर कब्जा कर लिया है। तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान में कई सारे नियमों में बदलाव कर दिये गये हैं, खासतौर से महिलाओं से जुड़ी गतिविधियों पर इसका काफी प्रभाव देखने को मिला है। तालिबान के सरकार पर कब्जा करने के बाद अफगानिस्तान में खेल से जुड़ी महिलाओं का भविष्य अधर में नजर आ रहा था लेकिन अब तालिबान ने इस पर फैसला कर लिया है और महिलाओं के किसी भी तरह के खेल पर पाबंदी लगा दी है।
तालिबान ने महिलाओं के खेल प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेने पर साफ किया है कि उनके किसी भी तरह के खेल खेलने पर उनकी शरीर की नुमाइश होगी और इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता है, इस वजह से महिलाओं के क्रिकेट और बाकी सभी खेलों में हिस्सा लेने पर बैन लगाया जाता है।
उल्लेखनीय है अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पिछले साल नवंबर में 25 महिलाओं को सालाना कॉन्ट्रैक्ट जारी किया था और काबुल में 21 दिन का ट्रेनिंग कैंप भी चलाया था जिसमें 40 महिला खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन तालिबान के कब्जे के बाद इन महिला खिलाड़ियों का भविष्य अंधकार में चला गया है।
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तालिबान क्लचरल कमिशन के डिप्टी हेड अहमदुल्लाह वासिक ने एसबीएस न्यूज से बात करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि हम महिलाओं को कभी क्रिकेट खेलने की इजाजत देंगे क्योंकि उनका क्रिकेट खेलना जरूरी नहीं है। क्रिकेट ऐसा खेल है जिसमें महिलाओं को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है जिसमें उनका चेहरा और शरीर ढका नहीं रह सकता। इस्लाम में महिलाओं को इसकी इजाजत नहीं है। यह मीडिया का जमाना है और खिलाड़ियों की तस्वीर और वीडियो भी ली जाती है जिसे दुनिया भर के लोग देख सकते हैं। इस्लाम और इस्लामिक अमीरात महिलाओं को उस तरह के खेल खेलने की इजाजत नहीं देता जिससे उनका पर्दाफाश हो जाता है।'
अहमदुल्लाह वासिक ने आगे बात करते हुए कहा कि क्रिकेट और अन्य खेलों में महिलाओं को इस्लामिक ड्रेस कोड नहीं दिया जा सकता जिसका मतलब है कि वो ड्रेस कोड का पालन नहीं करेंगे और बेनकाब हो जायेंगे और इस्लाम में इसकी इजाजत नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि तालिबान कभी भी इस्लामिक नियमों के खिलाफ नहीं जा सकता।
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आपको बता दें कि तालिबान के इस फैसले ने कई युवा महिला खिलाड़ियों के सपने तोड़ दिये हैं। वहीं कई महिला क्रिकेटर्स ने तालिबान के डर से पहले ही देश को छोड़ दिया है। अफगानिस्तान को छोड़कर जाने वाली रोया समीम ने कहा था कि अफगानिस्तान छोड़ना मेरे लिये सबसे दुखद दिन रहा है। मैं बस रो रही थी, मुझे सबकुछ पसंद था जो भी मेरे पास था, मेरी नौकरी, मेरी क्रिकेट, मेरे साथी, मेरा होमटाउन, मेरे रिश्तेदार, मेरे पास जो कुछ भी था मुझे छोड़कर जाना पड़ा। आज भी जब वो दिन याद करती हूं तो रोना आ जाता है।
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