मलय नीरव,
बीबसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के अध्यक्ष माइक फ़ेनेल भारत आए और लौटते वक्त एक धमाका कर गए.
मेलबर्न और मैनचेस्टर में सम्पन्न पिछले राष्ट्रमंडल खेलों के स्तर का आयोजन करने की क्षमता पर फ़ेनेल ने सवाल खड़े करते हुए प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप की पेशकश की. उनका कहना था कि जिस रफ़्तार से खेलों के आयोजन का काम चल रहा है वो पर्याप्त नही है.
भारतीय ओलम्पिक संघ के अध्यक्ष और राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाडी ने फ़ेनेल की आशंकाओं को ग़लत बताते हुए कहा आयोजन की तैयारी समय पर पूरी कर ली जाएगी.
कितना दम है इन दावों में ,ये जानने के लिए मैं नेहरु स्टेडियम ,छत्रसाल स्टेडियम, त्यागराज स्टेडियम और कुछ अन्य आयोजन स्थलों पर पहुंचा.
निर्माण स्थलों पर पहुंचना इतना आसान नहीं था.धूल मिट्टी में सना, टूटी सड़कों और गड्ढों से बचता-बचाता, सुरक्षागार्डों को मनाता , उनसे विनती करता, जब एक के बाद एक निर्माणाधीन स्टेडियमों के आहातों में पहुंचा तो तस्वीर उतनी निराशाजनक नहीं दिखी, जितनी वहां जाने वाली सड़कों की थी.
पहले नेहरु स्टेडियम के पुराने द्वार को ढूढा़ फिर वहाँ के परियोजना प्रबंधक को ढूढ़ता हुआ सीढ़ियों से पाँचवी मंजिल पर पहुंचा.
राष्ट्रमंडल खेलों के उदघाटन और समापन समारोह की मेज़बानी के लिए तैयार होने में थोडी़ देर तो है पर जिस तेज़ी से काम चल रहा है,उसे देखने के बाद लगा कि परियोजना से जुड़े अधिकारियों और आयोजकों के दावे खोखले नही हैं.
भारत के इस बर्डस नेस्ट में 75 हजा़र लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी. अभी 25 फ़ीसदी काम बचा तो है लेकिन वहाँ काम कर रहे मज़दूरों ,अधिकारियों के आत्मविश्वास और उनकी लगन को देखकर विश्वास हो जाता है कि उनकी बातों मे दम है.
कुछ उपकरण और साजो़ सामान ऐसे हैं जिनका आयात अभी होना है उसे लेकर थोड़ी थोड़ी चिंता है पर उसे दूर करने की बात दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भी की है.
त्यागराज स्टेडियम , राष्ट्रीय स्टेडियम और तालकटोरा स्टेडियम में भी काम तेज़ी से चल रहा है. राष्ट्रीय स्टेडियम को राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी से पहले विश्व कप हाँकी के मुख्य आयोजन स्थल के रुप में तैयार किया जा रहा है.
छत्रसाल स्टेडियम को देखने के बाद लगा कि अभी बहुत काम होना बाकी है पर वहां काम करवाने वाले इंजीनियरों का दावा है कि निर्धारित समय सीमा से पहले ही काम पूरे हो जाएँगे.
इंदिरा गाँधी इंडोर स्टेडियम और यमुना वेलोड्रोम की सुरक्षा दीवार को बहुत कोशिशों के बाद भी मैं भेद नही पाया लेकिन वहाँ काम कर रहे मज़दूरों में से कुछ जब बाहर आए तब उन्होंने कहा कि रात दिन एक करने में जुटे हैं वहाँ के अधिकारी और काम करने वाले लोग.
कुल मिलाकर जो देखा उससे एक बात तो काफी हद तक साफ हो गई कि आयोजन से पहले सज जाएँगे मंच, पर इन मंचों तक पहुचने का रास्ता क्या होगा इस संबंध में कुछ कहना संभव नही. स्टेडियम पूरे हो भी गये तो मौलिक ढ़ाचों से जुड़े काम कब और कैसे पूरे होंगे. इन सवालों के जवाब ढूँढते ढूँढते थक गया.
अंतत: मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने ढाढस बँधाने वाले अंदाज़ में कहा सब ठीक हो जाएगा, हर काम पूरा हो जाएगा, थोड़ी घबराहट ज़रुर हैं पर विश्वास भी है कि हम कामयाब होंगे.