फ़ॉर्मूला वन भारत का नया आईपीएलः माल्या
विजय माल्या फ़ॉर्मूला वन रेसिंग टीम फ़ोर्स वन के अध्यक्ष हैं.
लंदन में यूके इंडिया बिज़नेस काउंसिल के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के युवाओं में इसे लेकर ख़ासा उत्साह है.
कुछ महीने पहले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने हरियाणा में गुड़गांव के पास सोहना और उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा की पहचान ऐसे स्थानों के तौर पर की थी जहां फ़ॉर्मूला वन रेस के लिए ट्रैक बन सकता है.
क्रिकेट के नए स्वरूप यानी ट्वेन्टी-20 और आईपीएल के बारे में माल्या ने कहा कि ये ब्लॉकबस्टर साबित हुआ है.
उनका मानना है कि आईपीएल ने क्रिकेट की पहुँच और दायरा बढ़ाने में मदद की है.
अपना एक किस्सा सुनाते हुए माल्या ने कहा, "आईपीएल के कुछ मैचों के दौरान मैं फ़ॉर्मूला वन के सिलसिले में अपने यॉच पर था और मैंने देखा कि फ़्रांस और स्पेन तक के लोग आकर आईपीएल में दिलचस्पी दिखा रहे थे."
क्रिकेट खिलाड़ियों पर होने वाली धनवर्षा पर उनका तर्क था कि अगर फ़ुटबॉल समेत दूसरे खेलों में विश्व में खिलाड़ियों को इतना पैसा मिलता है तो क्रिकेटरों को इससे क्यों वंचित रखा जाए.
'चीन से बेहतर भारत'
माल्या फ़ॉर्मूला वन रेसिंग टीम फ़ोर्स वन के अध्यक्ष हैं और भारत में इसे शूरू कराने में जुटे हैं
अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर विजय माल्या ने कहा कि भारत में प्रतिभा की भरमार है.
चीन और भारत की तुलना के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि चीन के मुक़ाबले भारत में व्यवसाय करने का बेहतर माहौल है.
ऐसे समय में जब तेल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं तो लंदन के लिए उड़ान शुरू करने के फ़ैसले पर माल्या बोले कि उन्हें हीथ्रो एयरपोर्ट पर स्लॉट मिला है जिसे वे गँवाना नहीं चाहते.
ब्रिटेन और भारत के बीच संबंधों पर माल्या ने हल्के-फ़ुल्के अंदाज़ में चुटकी ली, "ब्रिटेन ने हमें अंग्रेज़ी भाषा दी, लाल फ़ीताशाही दी और हमने लाल फ़ीताशाही की कला में सुधार किया. बदले में ब्रिटेन को करी दी, हज़ारों भारतीय रेस्तरां दिए."
सृजनशीलता, ऑउट ऑफ़ बॉक्स सोच यानी जो काम करने के बारे में दूसरे न सोच सकें और आत्म-विश्वास को उन्होंने सफलता की कुंजी बताया.
एक किस्सा सुनाते हुए माल्या ने कहा, "भारत में बिज़नेस स्कूलों के सबसे बेहतरीन छात्रों को टॉप कंपनियाँ ले जाती हैं. एक दिन मैने सोचा कि मैं आख़िरी दिन जाउँगा जब सब कंपनियाँ बेहतरीन छात्रों को छाँट कर ले जा चुकी हों. मैं पीछे छूटे सब बच्चों को ले गया और उन्हें सफल और सुपरस्टार बनाया. उस दिन मुझे सबसे ज़्यादा फ़क्र महसूस हुआ."
किंग ऑफ़ गुड टाइम्स कहे जाने वाले माल्या अपनी शानो-शौकत के लिए जाने जाते हैं.
कामयाबी हासिल करने का मूलमंत्र देते हुए माल्या ने कहा कि उन्हें कभी ब्रेक की ज़रूरत महसूस नहीं होती और वे अपने काम से बेहद प्यार करते हैं.
लंदन में यूके इंडिया बिज़नेस काउंसिल के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के युवाओं में इसे लेकर ख़ासा उत्साह है.
कुछ महीने पहले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने हरियाणा में गुड़गांव के पास सोहना और उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा की पहचान ऐसे स्थानों के तौर पर की थी जहां फ़ॉर्मूला वन रेस के लिए ट्रैक बन सकता है.
क्रिकेट के नए स्वरूप यानी ट्वेन्टी-20 और आईपीएल के बारे में माल्या ने कहा कि ये ब्लॉकबस्टर साबित हुआ है.
उनका मानना है कि आईपीएल ने क्रिकेट की पहुँच और दायरा बढ़ाने में मदद की है.
अपना एक किस्सा सुनाते हुए माल्या ने कहा, "आईपीएल के कुछ मैचों के दौरान मैं फ़ॉर्मूला वन के सिलसिले में अपने यॉच पर था और मैंने देखा कि फ़्रांस और स्पेन तक के लोग आकर आईपीएल में दिलचस्पी दिखा रहे थे."
क्रिकेट खिलाड़ियों पर होने वाली धनवर्षा पर उनका तर्क था कि अगर फ़ुटबॉल समेत दूसरे खेलों में विश्व में खिलाड़ियों को इतना पैसा मिलता है तो क्रिकेटरों को इससे क्यों वंचित रखा जाए.
'चीन से बेहतर भारत'
माल्या फ़ॉर्मूला वन रेसिंग टीम फ़ोर्स वन के अध्यक्ष हैं और भारत में इसे शूरू कराने में जुटे हैं
अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर विजय माल्या ने कहा कि भारत में प्रतिभा की भरमार है.
चीन और भारत की तुलना के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि चीन के मुक़ाबले भारत में व्यवसाय करने का बेहतर माहौल है.
ऐसे समय में जब तेल की क़ीमतें आसमान छू रही हैं तो लंदन के लिए उड़ान शुरू करने के फ़ैसले पर माल्या बोले कि उन्हें हीथ्रो एयरपोर्ट पर स्लॉट मिला है जिसे वे गँवाना नहीं चाहते.
ब्रिटेन और भारत के बीच संबंधों पर माल्या ने हल्के-फ़ुल्के अंदाज़ में चुटकी ली, "ब्रिटेन ने हमें अंग्रेज़ी भाषा दी, लाल फ़ीताशाही दी और हमने लाल फ़ीताशाही की कला में सुधार किया. बदले में ब्रिटेन को करी दी, हज़ारों भारतीय रेस्तरां दिए."
सृजनशीलता, ऑउट ऑफ़ बॉक्स सोच यानी जो काम करने के बारे में दूसरे न सोच सकें और आत्म-विश्वास को उन्होंने सफलता की कुंजी बताया.
एक किस्सा सुनाते हुए माल्या ने कहा, "भारत में बिज़नेस स्कूलों के सबसे बेहतरीन छात्रों को टॉप कंपनियाँ ले जाती हैं. एक दिन मैने सोचा कि मैं आख़िरी दिन जाउँगा जब सब कंपनियाँ बेहतरीन छात्रों को छाँट कर ले जा चुकी हों. मैं पीछे छूटे सब बच्चों को ले गया और उन्हें सफल और सुपरस्टार बनाया. उस दिन मुझे सबसे ज़्यादा फ़क्र महसूस हुआ."
किंग ऑफ़ गुड टाइम्स कहे जाने वाले माल्या अपनी शानो-शौकत के लिए जाने जाते हैं.
कामयाबी हासिल करने का मूलमंत्र देते हुए माल्या ने कहा कि उन्हें कभी ब्रेक की ज़रूरत महसूस नहीं होती और वे अपने काम से बेहद प्यार करते हैं.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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