कमजोर उप-कप्तान चुनने के सिस्टम पर गौतम गंभीर ने उठाए सवाल, कुंबले को किया याद
नई दिल्लीः भारत के पूर्व क्रिकेटर गौतम गंभीर को लगता है कि क्रिकेट खेल के सिस्टम में कप्तान को जितनी तवज्जो दी जाती है उतना ध्यान उसके नायाब यानी उपकप्तान को नहीं दिया जाता। गंभीर मानते हैं कि कप्तान के साथ-साथ एक दूसरे नंबर का लीडर उभरना भी जरूरी होता है लेकिन कप्तानी को इतना बड़ा ओहदा दिया जाता है कि उस उस पद को सुरक्षित रखने के लिए एक ऐसे खिलाड़ी को उप कप्तान बनाया जाता है जिससे कप्तान को खास खतरा ना हो।
गौतम गंभीर बहुत अच्छे बल्लेबाज थे और अब वे क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं लेकिन उनके बेबाक बयान अभी भी जारी हैं जिसके चलते वे क्रिकेट की दुनिया में आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितने कि अपनी बैटिंग के दिनों में हुआ करते थे।
गौतम गंभीर ने कहा है कि कई आईपीएल की टीमें अपने नंबर दो लीडर को विकसित करने के अवसर को चूकती जा रही है। गौतम गंभीर ने टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखे अपने कॉलम में ये बात कही है जिसमें वे लिखते हैं कि, मुझे कोई दिक्कत नहीं है अगर कोई खिलाड़ी बहुत अच्छा लीडर है, लेकिन मुझे लगता है कि नंबर दो पर बात करनी ज्यादा महत्वपूर्ण है। मुझे नहीं पता कि हम अपने क्रिकेट में उप कप्तानी को तवज्जों क्यों नहीं देते हैं।
गंभीर आगे कहते हैं कि दुर्भाग्य से हमारे सिस्टम में उप कप्तान को ऐसे चुना जाता है कि वह कप्तान को खतरा ना दें। अगर वह कप्तान की पोजीशन के लिए खतरा पैदा करेगा तो उसको इस रोल के लिए नहीं चुना जाएगा।
गंभीर कहते हैं कि आईपीएल की कुछ मौजूदा टीमें अपने नंबर दो कप्तान को डिवेलप करने के मौके को चूक गई है। और यह आईपीएल ट्रॉफी ना जीत पाने में एक काफी बड़ी रुकावट है।
जब गौतम गंभीर इंटरनेशनल क्रिकेट खेला करते थे तो उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी के उप कप्तान के के डेप्युटी के तौर पर काफी टाइम बिताया है और उन्होंने छह एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत को लीड भी किया है जहां पर प्रत्येक मौके पर विजेता बनकर उभरे।
गौतम गंभीर याद करते हैं कि अनिल कुंबले किस तरीके से एक निस्वार्थ खिलाड़ी थे और वे वाइस-कैप्टन की भूमिका में कॉन्पिटिटिव भी थे।
गौतम गंभीर कहते हैं, "मैंने अपने समय में अनिल कुंबले को देखा जो कि एक शानदार वाईस कैप्टन थे। वे हमेशा बिना किसी स्वार्थ के थे, हमेशा त्याग करते थे। फिर भी बहुत ही कंपटीशन देने वाले खिलाड़ी थे। वे हमेशा टीम को आगे बढ़ाने की कल्चर पैदा करते थे। यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि अनिल कुंबले जैसे उपकप्तान भारतीय क्रिकेट की लंबे समय तक कप्तानी नहीं कर सके।"
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