IPL के बाद अब बदलेगा टीम इंडिया का भी स्पॉन्सर, जानें कौन सी कंपनियां है रेस में
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच लगातार चल रहे तनाव को देखते हुए हाल ही में चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो ने भारत के सबसे बड़े घरेलू क्रिकेट लीग आईपीएल की टाइटल स्पॉन्सरशिप से खुद को अलग कर लिया है। इसके बाद से ही बीसीसीआई दुबई में होने वाले इस टूर्नामेंट के लिये नये स्पॉन्सर की तलाश में है। इस बीच बीसीसीआई ने जानकारी दी है कि वह सिर्फ आईपीएल के लिये ही नहीं बल्कि भारतीय टीम के किट के लिये भी नये स्पॉन्सर की तलाश में है।
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क्रिकेट भारत में सबसे लोकप्रिय खेल है और टीम इंडिया दुनिया की बेस्ट टीमों में से एक, जिसे देखते हुए कई कंपनियों ने भारतीय टीम की किट स्पॉन्सरशिप में दिलचस्पी दिखाई है।
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PUMA है सबसे आगे
उल्लेखनीय है कि टीम इंडिया की किट स्पॉन्सरशिप के राइटस खरीदने की दौड़ में सबसे पहला नाम जर्मन कंपनी प्यूमा का है जो कि खेल सामान और फुटवियर निर्माता है, वहीं उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी एडिडास (Addidas) के भी इस दौड़ में शामिल होने के पूरे चांसेज हैं।
बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ,‘मैं इसकी पुष्टि करता हूं कि प्यूमा ने आईटीटी (निविदा आमंत्रण) दस्तावेज खरीदे हैं जिनकी कीमत एक लाख रूपये है। इसे खरीदने का मतलब हालांकि यह नहीं है कि वह बोली लगाने ही जा रहे है। प्यूमा ने बोली लगाने में वाकई दिलचस्पी दिखाई है।'

Adidas भी स्पॉन्सरशिप की रेस में शामिल
रिपोर्ट के अनुसार टीम इंडिया की किट स्पॉन्सरशिप के लिये Adidas ने भी रूचि दिखाई है लेकिन यह साफ नहीं है कि वह इसके लिये बोली लगाने वाला है या नहीं। खबरों की मानें तो यह जर्मन कंपनी मर्चेंडाइस उत्पादों के लिये स्वतंत्र रूप से बोली लगा सकती है जिसके लिये अलग से टेंडर निकाले जायेंगे।
गौरतलब है कि उत्पादों की बिक्री इस पर भी निर्भर करती है कि कंपनी के कितने एक्सक्लूजिव स्टोर या बिक्री केंद्र हैं। जहां देश भर में PUMA के 350 से ज्यादा एक्सक्लूजिव स्टोर हैं तो वहीं Adidas के पास 450 से ज्यादा आउटलेट हैं।

BCCI ठुकरा चुका है NIKE का ऑफर
आपको बता दें कि NIKE ने एक बार पहले ही बीसीसीआई के कम बोली लगाने की पेशकश को ठुकरा दिया है, जिसके बाद यह साफ नहीं है कि वह दोबारा बोली लगायेगा या नहीं। NIKE ने 2016 से 2020 के लिये 370 करोड़ (प्लस 30 करोड़ रॉयल्टी) दिये थे।
एक विशेषज्ञ ने कहा ,‘अगर कोई नयी कंपनी पांच साल के लिये करीब 200 करोड़ रूपये की बोली लगाकर अधिकार खरीद लेती है तो कोई हैरानी नहीं होगी। यह NIKE की ओर से चुकाई गई पिछली रकम से काफी कम होगा। बोर्ड ने पहले NIKE को पेशकश की जो उसने ठुकरा दी। इसके मायने है कि या तो उसकी रूचि नहीं है या वह और कम दाम की बोली लगाना चाहता है।'
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