इससे पहले मैरी कॉम ने फिलिपींस की एलिस केट एपारी को 8-1 से शिकस्त देकर फ़ाइनल में जगह बनाई थी. स्टेल्यूटा ने सेमीफ़ाइनल में कज़ाकिस्तान की नजगुल बोरानबेवा को 10-5 से हराया था. मैरी कॉम 48 किलोग्राम वज़न श्रेणी की मुक्केबाज़ हैं. वर्ष 2000 में मुक्केबाज़ी की दुनिया में कदम रखने वाली मैरी कॉम ने 2001 में मुक्केबाज़ी की एक चैंपियनशिप में दूसरा स्थान हासिल किया था.
भारत के मणिपुर राज्य की रहनेवाली मैरी कॉम शादीशुदा हैं और दो बच्चों की माँ हैं. घर-परिवार और बच्चों को संभालने के साथ मुक्केबाज़ी के अपने करियर को उन्होंने जिस तरह संभाला है वह काबिले तारीफ़ है. मैरी कॉम के इस प्रदर्शन को देखते हुए खेल प्रेमी काफ़ी खुश नज़र आ रहे हैं. आगामी राष्ट्रमंडल खेलों में उन्हें पदक के प्रबल दावेदार के रूप में भी देखा जा रहा है. मैरी कॉम को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से नवाज़ा जा चुका है.
अब तक मैरी कॉम का प्रदर्शन-
वर्ष 2001 - विश्व एमेचर मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप - रजत पदक
वर्ष 2002 - विश्व एमेचर मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप - स्वर्ण पदक
वर्ष 2005 - विश्व एमेचेर मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप - स्वर्ण पदक
वर्ष 2006 - विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप - स्वर्ण पदक
वर्ष 2008 - विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप - स्वर्ण पदक
वर्ष 2010 - विश्व मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप - स्वर्ण पदक