ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे कॉमनवेल्थ खेलों की पदक तालिका में भारतीय टीम चौथे स्थान पर है.
भारत ने छह स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक जीते हैं.
इन छह में से पांच स्वर्ण भारत के भारोत्तोलकों ने जीते हैं और एक स्वर्ण निशानेबाज़ी की स्पर्धा में मिला है.
एक नज़र, भारत के पदकवीर खिलाड़ियों पर.
8 अगस्त 1994 को जन्मी और मणिपुर के एक छोटे से गाँव में पली बढ़ी मीराबाई बचपन से ही काफ़ी हुनरमंद थीं. बिना ख़ास सुविधाओं वाला उनका गांव राजधानी इंफ़ाल से कोई 200 किलोमीटर दूर था.
मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड मेडल जीत लिया है. लेकिन एक समय ऐसा भी आया था जब साल 2016 के ओलंपिक खेलों में उनके हाथ असफलता लगी थी और इसके बाद उन्होंने खेल से विदा लेने का मन बना लिया था.
2. संजीता चानू, स्वर्ण पदक, महिला वेटलिफ्टिंग, 53 किग्रा
भारतीय रेलवे की कर्मचारी संजीता स्वभाव से शर्मीली हैं, लेकिन जब वो मैदान पर उतरती हैं तो उनका दूसरा ही रूप देखने को मिलता है.
संजीता के लिए मेडल जीतने का सिलसिला बचपन से ही शुरू हो गया था.
महज़ 20 साल की उम्र में संजीता ने 48 किलोग्राम वर्ग में 173 किलोग्राम वज़न उठाकर ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड मेडल जीता था.
12 साल की उम्र में ट्रेनिंग शुरू करने वाले सतीश शिवलिंगम एक पूर्व सैनिक के बेटे हैं.
सतीश के पिता राष्ट्रीय स्तर पर वेटलिफ़्टिंग प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुके हैं.
सतीश शिवलिंगम इससे पहले साल 2014 में भी कॉमनवेल्थ खेलों में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं.
4. वेंकट राहुल रागला, स्वर्ण पदक, पुरुष वेटलिफ्टिंग, 85 किग्रा
आंध्र प्रदेश के स्टुअर्टपुरम से आने वाले वेंकट राहुल रागला को शुरुआत से ही स्वर्ण पदक का दावेदार माना जा रहा था.
साल 2014 के यूथ ओलंपिक्स में उन्होंने 77 किलोग्राम भार वर्ग में रजत पदक हासिल किया था. वो एशियन जूनियर चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.
वेंकट राहुल रागला को खेलों से लगाव विरासत में मिला है. उनके पिता मधु रागला कब्बडी के खिलाड़ी थे और वेटलिफ्टिंग भी करते थे.
उत्तर प्रदेश के चर्चित शहर बनारस की रहने वाली 22 साल की पूनम यादव ने 69 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीता है.
इससे पहले वह साल 2014 के ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में 63 किलोग्राम में कांस्य पदक जीत चुकी हैं.
12वीं क्लास में पढ़ने वाली मनु भाकर 12वीं में मेडिकल की तैयारी कर रही हैं. लेकिन इस बीच उन्होंने निशानेबाजी के खेल में अपना परचम लहरा दिया है.
अभी 10 महीने पहले ही मनु ने जूनियर वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया था और 49वे नंबर पर रही थीं. इस साल जब वो सीनियर वर्ल्ड कप में खेलीं तो सीधे स्वर्ण पदक पर निशाना लगाया- 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में.
ख़ास बात ये है कि मनू ने सिर्फ दो साल पहले इस खेल को खेलना शुरू किया है.
25 साल के गुरुराजा कर्नाटक के कुंदापुर कस्बे से आते हैं. एक ट्रक ड्राइवर के बेटे गुरुराजा आठ भाई-बहनों में पांचवें हैं.
दक्षिण कन्नड़ में 2010 में अपने ग्रैजुएशन के दौरान उन्होंने वेट लिफ़्टिंग की शुरुआत की थी.
इससे पहले 2016 में कॉमनवेल्थ सीनियर वेटलिफ़्टिंग चैम्पियनशिप में वह स्वर्ण पदक हासिल कर चुके हैं.
8. हिना सिद्धू, रजत पदक, महिला 10 मीटर एयर पिस्टल
साल 1989 में लुधियाना में पैदा हुई हिना सिद्धू के पास यूँ तो डेंटल सर्जरी की डिग्री है पर घर पर राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज़ पिता राजबीर सिद्धू के होते हुए शूटिंग का शौक स्वाभाविक था.
कॉलेज के दिनों से ही हिना ने मेडल जीतने का सिलसिला शुरू कर दिया था.
उन्होंने 19 साल की उम्र में उन्होंने हंगेरियन ओपन और 2009 में बीजिंग में हुए वर्ल्ड कप में रजत पदक जीता था.
साल 2013 की विश्व शूटिंग प्रतियोगिता में 10 मीटर एयर पिस्टल टूर्नामेंट में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर स्वर्ण पदक जीतने वाली हिना पहली भारतीय महिला बनीं.
10. रवि कुमार, कांस्य पदक, पुरुष 10 मीटर एयर रायफल
उत्तर प्रदेश के मेरठ में जन्मे 28 वर्षीय रवि कुमार पिछले कॉमनवेल्थ खेलों में चौथे स्थान पर रहे थे.
रवि कुमार भारतीय वायु सेना में कार्यरत हैं. उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है.
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर ज़िले के पटनौन में जन्मे विकास 24 साल के हैं.
स्नैच स्पर्धा में उन्होंने तीन प्रयासों में 152, 156 और 159 किलो का वज़न उठाया. 159 किलो का वज़न विकास का सर्वश्रेष्ठ निजी प्रदर्शन है.
LIVE: वेटलिफ्टिंग में विकास ठाकुर को कांसा
कॉमनवेल्थ गेम्सः पहले दिन भारत को दो पदक, चमकीं चानू
देखकर नहीं लगता कि इतनी ताक़त है मीराबाई चानू में
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)