IND vs AUS Test Series: पृथ्वी शॉ के लिए अब आगे का रास्ता क्या है?
India vs Australia Prithvi Shaw News नई दिल्लीः इंटरनेशनल क्रिकेट कितना कट्टर हो सकता है इसको पृथ्वी शॉ से बेहतर कोई नहीं जानता। वेस्टइंडीज के खिलाफ शतक ठोककर बिगुल बजाने वाला ये बल्लेबाज कभी वीरेंद्र सहवाग तो कभी सचिन तेंदुलकर की झलक दिखाने के सपने दिखाता हुआ उस स्टारडम से विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुका है।
निश्चित तौर पर अभी उनके सामने काफी क्रिकेट बाकी है लेकिन इस समय पृथ्वी का इंटरनेशनल करियर उनके आत्मविश्वास की तरह डगमगा रहा है।

अब पृथ्वी शॉ के लिए आगे का क्या रास्ता है?
8 महीने प्रतिबंधित दवा लेने के चलते शॉ पर प्रतिबंध लगा और फिर उनकी वापसी फीकी रही है। आईपीएल 2020 में भी वे निरंतर नहीं रहे थे। फिर भी भारतीय टीम ने विंडीज के खिलाफ उनके टेस्ट फॉर्म को याद रखते हुए ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जगह दी।
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जगह तो मिली लेकिन वे ऑस्ट्रेलियाई दौरे के टूर मैच में भी कुछ नहीं कर पाए। एडिलेड में फिर भी उनको लिया गया जहां उन्होंने 2 पारियों में 4 रन बनाकर उन फैंस को सही साबित कर दिया जिन्होंने शॉ का नाम टीम में देखकर अपना माथा फोड़ लिया था। सवाल यह है अब पृथ्वी शॉ के लिए आगे का क्या रास्ता है?

कोहली भी गुजर चुके इस दौरे से-
सबसे बड़ी खामी उनकी तकनीक में बताई जा रही है जहां बॉल और बैट के बीच गैप है और वह बोल्ड या एज लगाने में कहीं अधिक नाजुक हो चुके हैं। लेकिन यह चीज तो तब भी थी जब वह अगले सचिन तेंदुलकर कहे जाते थे, तो अब क्या बदलाव हुआ?
दरअसल दूसरी टीमों ने शॉ को लेकर बेहतर तैयारियां कर ली हैं। डाटा और एनालिस के डिजिटल युग में शॉ की तकनीकी खामियों पर फोकस हुआ है और कंगारू गेंदबाजों ने उनको वहां गेंद फेंकी है जहां वे सबसे अधिक नाजुक नजर आए। ऐसा ही एक माजरा कोहली के साथ हो चुका है जब वे 2014 के इंग्लैंड दौरे पर गए थे। तब उनका औसत 13.50 का था।

तकनीक के साथ मानसिक पहलू पर काम करना होगा-
पृथ्वी शॉ एक ऐसे ही चौराहे पर है और यह पूरी तरह उनके ऊपर है कि वह कौन सा रास्ता अपनाते है। शॉ को अपनी तकनीक को सही ढंग से पूरा करने में अथक परिश्रम करना चाहिए। हालांकि, उसके साथ ही अपने नेचुरल गेम को बनाए रखना उतना ही आवश्यक है।
दरअसल ठोस तकनीक एकमात्र कारक नहीं है क्योंकि क्रिकेट एक मनोवैज्ञानिक खेल भी है। शॉ को धीरे-धीरे अपनी बल्लेबाजी को नेचुरली बेबाक बनाना होगा जो कि उनके पास गॉड गिफ्टिड है। अब तक, वह डरपोक और नम्र प्रतीत होते हैं है जब भी वह क्रीज पर आते हैं

अभी हमने शॉ का अंतिम नहीं देखा है-
अब जब टीम इंडिया ने उनको दूसरे टेस्ट से बाहर कर दिया है तो शॉ के पास ये सब चीजें करने का दबावमुक्त मौका है। उनको मिशेल स्टॉर्क या अन्य युवा कंगारू खिलाड़ियों की राह पर चलते हुए फोकस के समय सोशल मीडिया से दूरी बनानी भी सीखनी होगी जहां पर आपको लेकर तुरंत राय बना दी जाती है।
जाहिर है क्रिकेट एक निर्दयी खेल है लेकिन जो इसके उतार-चढ़ाव से बच निकलता है उसको ही महान कहते हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि अभी हमने पृथ्वी शॉ का अंतिम नहीं देखा है। यह केवल शुरुआती झटका है।
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