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राष्ट्रमंडल खेलों से बढ़ाएँ भारत की साख- धोनी

वंदना, बीबीसी संवाददाता

भारतीय मीडिया में राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी को लेकर काफ़ी आलोचना हुई है. पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में क्या छवि है. आइए सरसरी नज़र डालें अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चल रहीं ख़बरों पर. ब्रिटेन का अख़बार द गार्डियन में छपी एक रिपोर्ट का शीर्षक है- 'डेल्ही बैटलिंग हूमन एंड फ़ाइनेंशियल कॉस्ट ऑफ़ होस्टिंग कॉमनवेल्थ गेम्स" यानी राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी की दिल्ली को मानवीय और वित्तीय स्तर पर कीमत चुकानी पड़ रही है.

इसी अख़बार की एक अन्य रिपोर्ट की हेडलाइन है- 'शाइनिंग इंडिया मेक्स इटस पुयर पे प्राइस ऑफ़ कॉमनवेल्थ गेम्स" यानी राष्ट्रमंडल खेलों की कीमत चमकते भारत के ग़रीबों को चुकानी पड़ रही है. ऑस्ट्रेलिया का सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड लिखता है- बारिश और डेंगू ने दिल्ली की मुसीबतें बढ़ाईं. जबकि 16 अगस्त को छपी इसी अख़बार की अन्य रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रमंडल खेल एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी पेरी क्रॉसवाइट भारत का बचाव करते हुए नज़र आ रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक क्रॉसवाहट को लगता है कि भारत में आपसी राजनीतिक खींचतान और स्थानीय मीडिया की रिपोर्टिंग ने इस मुद्दे को तूल दिया है. रिपोर्ट में क्रॉसवाइट के हवाले से लिखा है- उनका (भारत का) मीडिया अजीब ही है. वो सब एक दूसरे को सूली पर चढ़ाने में लगे हैं. हम कुछ नहीं कर सकते. कनाडा का मुख्य अख़बार द ग्लोब एंड मेल में एक ख़बर का शीर्षक है- मुश्किलों में घिरे कॉमनवेल्थ गेम्स.

राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियों की किस कदर किरकिरी हो रही है उसका अंदाज़ा तो आपको अंतरराष्ट्रीय ख़बरें पढ़ कर लग ही गया होगा. अब राष्टमंडल खेलों की सकारात्मक छवि की गुहार लगाई जा रही है. और ये गुहार किसी खिलाड़ी, अधिकारी या सरकार की ओर से नहीं बल्कि संगीतकार एआर रहमान ने की है. रहमान कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए धुन तैयार कर रहे हैं.

इसी सिलसिले में हुए कार्यक्रम में रहमान ने आप बीती सुनाते हुए कहा कि वे हाल ही में लंदन में थे और वहाँ उन्हें भारत में होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों को लेकर बहुत ही नकारात्मक बातें सुनने को मिलीं जिससे उन्हें काफ़ी दुख हुआ. रहमान ने पत्रकार वार्ता में अपील कर डाली कि बहुत सी अच्छी बातें भी हो रही हैं इसलिए कुछ तवज्जो ऐसी बातों पर दी जाए तो अच्छा होगा.

कॉमनवेल्थ खेलों को लेकर जहाँ पहले मानो हर कोई चुप्पी साधे हुए था वहीं अब अचानक हर कोई हरकत में आता नज़र आ रहा है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तो लाल किले से अपने भाषण में अपील की है कि राष्ट्रमंडल खेलों को किसी राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाएँ. पर्वों की बात करें तो अक्तूबर में राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान दो महत्वपूर्ण त्यौहार हैं- दुर्गा पूजा और दशहरे से पहले होने वाली राम लीला. इन दोनों की ही दिल्ली में सितंबर-अक्तूबर में काफ़ी धूम रहती है. जगह-जगह झाँकियाँ, पंडाल, रामलीला और मूर्ति विसर्जन के कारण काफ़ी रौनक और चहल-पहल होती है. लेकिन कई लोगों का कहना है कि 'राष्ट्रीय पर्व" तो ठीक हैं लेकिन उलझनों में फँसे इस आयोजन के चक्कर में उनके धार्मिक और पारंपरिक त्योहारों का रंग फ़ीका न पड़ जाए.

कॉमनवेल्थ खेलों की सूची में क्रिकेट शामिल नहीं है लेकिन भारतीय क्रिकेट के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने इसके सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ ज़रूर दी हैं. कॉमनवेल्थ खेलों के बाद भारत में ही क्रिकेट विश्व कप भी होना है. श्रीलंका में क्रिकेट सिरीज़ खेल रहे धोनी ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रमंडल खेल और क्रिकेट विश्व कप से भारत बेहतर साख और मित्रभाव हासिल कर पाएगा. कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारियों को देखकर तो ऐसा होता नहीं दिख रहा शायद क्रिकेट विश्व कप ये कमाल दिखा पाए.

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 13:05 [IST]
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