एथलीट गलत पते पर पहुंचा, अजनबी ने पैसे देकर की मदद, फिर ओलंपिक में जीत लिया गोल्ड

नई दिल्लीः ओलंपिक में आपको कई दिलचस्प कहानियां सुनने को मिल जाती है। ऐसी ही एक ही रोचक दास्तान है जमैका के स्प्रिंटर हंसले पार्चमेंट की जिन्होंने पुरुषों की 110 मीटर प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। टोक्यो ओलंपिक 2020 में हुई यह एक हर्डल प्रतियोगिता थी लेकिन इसके बारे में कम ही लोगों को पता है कि यहां तक पहुंचने के लिए हंसले पार्चमेंट को कितना संघर्ष करना पड़ा।

दरअसल यह संघर्ष उनकी नियमित मेहनत से जुड़ा हुआ नहीं है क्योंकि वह तो सभी एथलीट करते ही हैं, बल्कि दिलचस्प बात यह है कि वह गलत पते पर पहुंच गए थे और उनको सही जगह पहुंचाने के लिए ओलंपिक गेम्स के वॉलेंटियर ने योगदान दिया।

गोल्ड मेडल जीतने की रोचक कहानी-

गोल्ड मेडल जीतने की रोचक कहानी-

हंसले पार्चमेंट ने सोशल मीडिया पर अपनी स्टोरी शेयर की है और बताया है कि किस तरह से फाइनल इवेंट के दिन वह गलत जगह पर पहुंच गए। ऐसे में जहां पर इवेंट हो रहा था वहां पर उनके डिसक्वालीफाई होने का खतरा बढ़ गया। जब प्रतियोगिता में एक एथलीट उपस्थित नहीं होता है तो उसको डिसक्वालीफाई कर दिया जाता है लेकिन तभी वॉलिंटियर ने इस खिलाड़ी को सही पते पर पहुंचाया।

ओलंपिक गेम्स की वालंटियर ने हंसले पार्चमेंट को पैसे दिए ताकि वे एक टैक्सी कर सके और सही पते पर पहुंच सकें जहां पर वह बिल्कुल टाइम पर पहुंचे और फिर उन्होंने एक शानदार जीत दर्ज करते हुए ओलंपिक में सबसे बेहतरीन मेडल जीतकर दिखा दिया। वाकई में एक ओलंपिक कई किस्से अपने में समेटा हुआ होता है, कुछ हमें पता चल जाते हैं और कुछ के बारे में बिल्कुल भी पता नहीं लग पाता है।

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मेडल इवेंट के दिन ही गलत पते पर पहुंच गए-

मेडल इवेंट के दिन ही गलत पते पर पहुंच गए-

हंसले पार्चमेंट बताते हैं, "सेमी फाइनल्स में मैं भूलवश एक गलत बस में चढ़ गया और एक गलत पते पर पहुंच गया। मेरे कान में म्यूजिक था तो मैं वह सब नहीं सुन पा रहा था जो लोग बस में कह रहे थे। मैंने ज्यादा कुछ नहीं सोचा और बस में बैठा रहा और अपने कान में संगीत सुनता रहा। हालांकि बाद में मुझे एहसास होने लगा कि यह बस गलत दिशा में जा रही है और मैं आसपास दिख रही चीजों के बारे में नहीं जानता हूं। खैर जब मैं अंतिम जगह पर पहुंचा तो मैंने देखा कि रोइंग प्रतियोगिता चल रही है लेकिन फिर भी मुझे नहीं पता था मैं कहां हूं। उसके बाद लोगों ने मुझे कहा कि मुझे वापस ओलंपिक विलेज जाना चाहिए और एक ऐसी बस लेनी चाहिए जो एथलेटिक्स स्टेडियम में मुझे पहुंचा दे। और अगर मैं ऐसा करता भी तो भी समय पर नहीं पहुंच पाता।"

वॉलंटियर ने दिए पैसे, तब पहुंचे ट्रैक पर-

हंसले पार्चमेंट बताते हैं उन्होंने फिर एक टोक्यो 2020 कार करने की कोशिश की ताकि वह अपनी जगह पहुंच जाएं लेकिन वे लोग काफी सख्त थे। ऐसे में उनको एक वालंटियर दिखाई दी और उन्होंने पार्चमेंट को पैसे दिए जिससे कि वह एक टैक्सी कर सकें और सही पते पर पहुंच सकें। इसके बाद वे फार्मट्रेक के पास पहुंचने में कामयाब रहे और स्टेडियम में उनको कंपटीशन खेलने के लिए वार्म अप करने का भी पर्याप्त टाइम मिल गया।

हंसले पार्चमेंट सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए बताते हैं, "मैं उनको ढूंढ रहा हूं जिन्होंने मेरी मदद की और ताकि मैं अपना गोल्ड मेडल भी उन्हें दिखा सकूं क्योंकि उन्हीं की मदद की बदौलत मैं यह कर पाया हूं।"

ढूंढने पर मिल गई वह मददगार-

ढूंढने पर मिल गई वह मददगार-

मजेदार बात यह है कि 31 साल का यह एथलीट उस वेलेंटर को ढूंढने में सफल भी रहा और अपना गोल्ड मेडल भी दिखाने में सफल रहा। पार्चमेंट ने उस वालंटियर को उनके पैसे वापस भी किए और एक टी-शर्ट भी दी और उसके साथ एक सेल्फी भी ली। उन्होंने वॉलिंटियर से कहा, "आप मेरे फाइनल इवेंट के दिन बहुत ही मददगार थी। मैं ऐसा इसलिए कर पाया क्योंकि आपने उस दिन वाकई में मेरी मदद की।"

तो यह ओलंपिक की कुछ रोमांचक कहानियां है। यह इसलिए भी शानदार बन जाती है क्योंकि हंसले पार्चमेंट ने उस दिन टोक्यो ओलंपिक के एथलेटिक्स इवेंट में बड़ा ही जबरदस्त उलटफेर किया था। उन्होंने विश्व के चैंपियन ग्रांट हॉलोवे को पुरुषों की 110 मीटर हर्डल प्रतियोगिता फाइनल में हरा दिया था। यह 5 अगस्त की बात है, और ग्रांट को सिल्वर मेडल से ही संतोष करना पड़ा।

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Story first published: Thursday, August 12, 2021, 9:58 [IST]
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