ओलंपिक 2016 दुनिया के किस शहर में आयोजित होगा इसका फैसला शुक्रवार को होगा. अमरीका सहित सभी दावेदारों ने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रखा है.
अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा शिकागो की दावेदारी को बल देने के लिए डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन पहुँच रहे हैं. रियो डि जेनेरो, टोक्यो और मैड्रिड भी शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सामने अपना अपना दावा रखेगें. दावेदारों की इस दौड़ को ओलंपिक इतिहास कि अबतक का सबसे कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है.
हालांकि शिकागो के दावे में थोड़ा बढ़त देखी जा रही है लेकिन ऐसा माना जा है कि रियो डि जेनेरो ही शिकागो को सबसे कड़ी टक्कर दे रहा है. अगर रियो डि जेनेरो को सफलता मिलती है तो ये ओलंपिक का आयोजन करने वाला दक्षिण अमरीका का पहला शहर होगा.
लंदन ओलंपिक 2012 के अध्यक्ष सेबेस्टियन को का कहना है कि इनमें से हर शहर बहुत बढ़िया ओलंपिक आयोजित कर सकता है.
खेल के लिए प्रतिस्पर्धा
उन्होंने कहा, "यहाँ बहुत ही कड़ा मुकबला हो रहा है और ओलंपिक कराने का सम्मान किसे हासिल होता है, ये तो सभी शहरों द्वारा उनकी योजनाओं के अंतिम प्रस्तुतीकरण के बाद ही तय होगा."
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष ज्यां रोखा ने कहा है कि पिछले पांच-छह साल से बहुत कड़े मुकाबले देखने में आ रहे हैं. "सुरक्षा के अलावा और भी कई चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं, जैसे बहुत ही बढ़िया ओलंपिक गाँव, आधुनिकतम खेल के मैदान और अच्छा यातायात का जाल. इसके अलावा बढ़िया घरेलु टीम और गर्मजोशी से भरे लोग, बस फैसला हो जाएगा."
शिकागो के और शहरों से आगे होने का एक बड़ा कारण अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का खुद पहुंचना माना जा रहा है. उनकी पत्नी मिशेल बुधवार से ही शिकागो के समर्थन में सक्रिय हैं.
पर और देश भी वजनदार समर्थक जुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. रियो डि जेनेरो के समर्थन में ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा आ रहे हैं तो स्पेन के सम्राट ख्वान कार्लोस मेड्रिड के लिए. टोक्यो के लिए जापानी प्रधानमंत्री यूकियो हातोयामा कोपेनहेगन पहुंच रहे हैं.