महिला कबड्डी टीम का दिल्ली में स्वागत, मुंबई में किसी ने नहीं पूछा
दिल्ली (ब्यूरो)। ईरान को हरा कर विश्व कप कबड्डी का खिताब दिलानेवाली महिला खिलाड़ी जब अपने घर पहुंची तो दिल्ली छोड़कर कहीं कोई स्वागत करनेवाला नहीं पहुंचा। दिल्ली में तो कृष्णा डबास के गांव स्वागत करने एयरपोर्ट पर पहुंच गए। लेकिन मुंबई पहुंची महाराष्ट्र की तीन खिलाड़ियों को स्वागत करने के लिए सिर्फ भाजपा के नेता विनोद तवाडे पहुंचे। राज्य सरकार के किसी मंत्री ने स्वागत करने की जरुरत महसूस नहीं की।
हालांकि इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल-एक पर महिला कबड्डी विश्व कप की विजेता भारतीय टीम की सदस्य दिल्ली की कृष्णा डबास का स्वागत करने सैकड़ों गांव के लोग पहुंचे थे। पटना में हुए पहले महिला कबड्डी विश्व कप की विजेता भारतीय टीम की सदस्य कृष्णा डबास इतिहास रचकर सोमवार को टर्मिनल-एक से बाहर निकलीं तो दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने उन्हें सिर-आंखों पर बैठा लिया। ढोल नगाड़ों की थाप के बीच उन्हें फूलमालाओं से लाद दिया गया। ग्रामीणों में उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने की होड़ लग गई। सबने उन्हें एक ही आशीर्वाद दिया, 'बेटी शाबाश। अब रुकना मत। इसी तरह देश का नाम रोशन करती रहना। हमें तेरे पर नाज है। ऐसे बेटी हर घर में जन्म ले।' इस मौके पर रेलवे में एक वर्ष से क्लर्क के तौर पर कार्यरत और दिल्ली के कंझावला गांव की निवासी कृष्णा डबास की आंखें छलछला आईं। उन्होंने भी अपने बुजुर्गों का दिल नहीं तोड़ा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में होने वाले एशियाड खेलों में वे देश को स्वर्ण पदक जिताने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी।
गौरतलब है कि वर्ष 1990 में एशियाड खेलों में शामिल हुई कबड्डी (पुरुष) प्रतियोगिता में भारत ने स्वर्ण पदक जीता था। इस टीम में दिल्ली के जोंती गांव के तीरथराज और कैर गांव के रणधीर हरावत थे। टीम के मैनेजर जसवीर डबास भी गांव सुल्तानपुर डबास निवासी थे। हर बार भारत को कबड्डी में स्वर्ण पदक दिलाने में दिल्ली के गांवों के युवकों की अहम भूमिका रही है। गत एशियाड खेलों में कबड्डी में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के कप्तान दिल्ली के निजामपुर गांव के राकेश कुमार थे।गांवों का प्रिय खेल है कबड्डी। दिल्ली के करीब एक दर्जन गांवों में लड़के-लड़कियों का रुझान कब्बडी की ओर अधिक है।वहीं मुंबई में जब तीन महिला खिलाड़ी एयर पोर्ट से उतरी तो देखा भाजपा नेता विनोद के अलावा कोई नहीं है। विश्व विजेता टीम की खिलाड़ी सुवर्ना ने कहा कि अगर भारत की क्रिकेट टीम हार कर पहुंची होती तो भी खेल मंत्री स्वागत करने के एयरपोर्ट पर होते।
हालांकि इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल-एक पर महिला कबड्डी विश्व कप की विजेता भारतीय टीम की सदस्य दिल्ली की कृष्णा डबास का स्वागत करने सैकड़ों गांव के लोग पहुंचे थे। पटना में हुए पहले महिला कबड्डी विश्व कप की विजेता भारतीय टीम की सदस्य कृष्णा डबास इतिहास रचकर सोमवार को टर्मिनल-एक से बाहर निकलीं तो दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने उन्हें सिर-आंखों पर बैठा लिया। ढोल नगाड़ों की थाप के बीच उन्हें फूलमालाओं से लाद दिया गया। ग्रामीणों में उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देने की होड़ लग गई। सबने उन्हें एक ही आशीर्वाद दिया, 'बेटी शाबाश। अब रुकना मत। इसी तरह देश का नाम रोशन करती रहना। हमें तेरे पर नाज है। ऐसे बेटी हर घर में जन्म ले।' इस मौके पर रेलवे में एक वर्ष से क्लर्क के तौर पर कार्यरत और दिल्ली के कंझावला गांव की निवासी कृष्णा डबास की आंखें छलछला आईं। उन्होंने भी अपने बुजुर्गों का दिल नहीं तोड़ा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में होने वाले एशियाड खेलों में वे देश को स्वर्ण पदक जिताने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी।
गौरतलब है कि वर्ष 1990 में एशियाड खेलों में शामिल हुई कबड्डी (पुरुष) प्रतियोगिता में भारत ने स्वर्ण पदक जीता था। इस टीम में दिल्ली के जोंती गांव के तीरथराज और कैर गांव के रणधीर हरावत थे। टीम के मैनेजर जसवीर डबास भी गांव सुल्तानपुर डबास निवासी थे। हर बार भारत को कबड्डी में स्वर्ण पदक दिलाने में दिल्ली के गांवों के युवकों की अहम भूमिका रही है। गत एशियाड खेलों में कबड्डी में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के कप्तान दिल्ली के निजामपुर गांव के राकेश कुमार थे।गांवों का प्रिय खेल है कबड्डी। दिल्ली के करीब एक दर्जन गांवों में लड़के-लड़कियों का रुझान कब्बडी की ओर अधिक है।वहीं मुंबई में जब तीन महिला खिलाड़ी एयर पोर्ट से उतरी तो देखा भाजपा नेता विनोद के अलावा कोई नहीं है। विश्व विजेता टीम की खिलाड़ी सुवर्ना ने कहा कि अगर भारत की क्रिकेट टीम हार कर पहुंची होती तो भी खेल मंत्री स्वागत करने के एयरपोर्ट पर होते।
Story first published: Wednesday, November 15, 2017, 11:45 [IST]
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