'कोई बेमिसाल प्रतिभा ही उसको मात दे सकती है'- पोंटिंग ने लिया भारत के युवा खिलाड़ी का नाम
नई दिल्लीः अब यह कोई छुपा हुआ राज नहीं रह गया है भारतीय क्रिकेट की बेंच स्ट्रेंथ बहुत तगड़ी है। इसको दुनिया में सबसे ताकतवर कहा जाए तो भी कोई दिक्कत नहीं है। कुछ ही समय पहले की बात है जब भारत की दो अलग टीमें इंग्लैंड और श्रीलंका में मौजूद थी और दोनों ही अपने दौरों में सफल रही। इस समय भारत के पास करीब पचास ऐसे खिलाड़ी होंगे जो इंटनरेशनल मंच के लिए तुरंत तैयार हैं।
मौजूदा भारतीय टीम की बात की जाए यहां पर अनुभव, युवा और उभरते हुए खिलाड़ियों की फौज देखने को मिलेगी। यहां पर एक खिलाड़ी ऋषभ पंत भी हैं जिनकी चर्चा बंद ही नहीं होती है। पंत के तेजी से उभार ने दिल्ली कैपिटल्स के कोच रिकी पोंटिंग को हमेशा प्रभावित किया है। अब तो पंत इस फ्रेंचाइजी के सम्मानित कप्तान हैं।

पंत इतने कम समय में मैच्योर कैसे हो गए?
पंत को लेकर हमेशा जोश में रहने वाले रिकी को इस बात का ताज्जुब आज भी है कि पंत इतने कम समय में मैच्योर कैसे हो गए?
दिग्गज पोंटिंग के मुताबिक पंत ने पिछले कुछ सालों में खुद को बहुत मैच्योर किया है और यह देखना बहुत अच्छा है।
पोंटिंग ने कहा, "मुझे लगता है कि पिछले कुछ सीजन में उसकी परिपक्वता का स्तर बहुत ऊंचा चला गया है। जब मैं पहली बार यहां आया था, तो ऋषभ बस ने बस उभरना शुरू किया था। पिछले साल की गर्मियों में जब ऋषभ ने आखिरकार टेस्ट टीम में वापसी की तब मैंने वहां महसूस किया यह ऐसा खिलाड़ी है जो कुछ समय के लिए भारत के लिए एक स्टार टेस्ट-मैच खिलाड़ी हो सकता है, और पिछले 18 महीनों में, वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सनसनी से कम नहीं है।"
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भारत में पंत को पछाड़ने वाला कोई नहीं-
वैसे पोंटिंग पंत के मुरीद रहे हैं। खास बात है विदेशी दिग्गज पंत से लगाव रखते हैं। वैसे पंत कई बार अपेक्षा के हिसाब पर पूरी तरह फेल होते हैं। उन्होंने हाल में तब बेहद ही निराश किया जब अन्य भारतीय बल्लेबाज भी फेल हो रहे थे। यह हालिया सम्पन्न इंग्लिश टूर की बात है जहां पर कई पारियों ने गेंद को हवा में स्विंग करते देखा और स्कूली बच्चों की तरह से भारतीय बल्लेबाजों के विकेटों का पतझड़ हमने देखा। तब पंत एक बार भी ऐसी पारी नहीं खेल पाए जिससे कोई आगे आकर यह कह सके कि ये आज का सबसे उदीयमान चमकता सितारा है। सच यह है कि पंत का डिफेंस पूरी तरह धराशाई था और जहां वे शॉट लगाते वहां कैच देकर आउट हो रहे थे। पंत को ऐसी परिस्थितियों में भी पारियां बनाना सीखना होगा जो शायद उनके पूरे करियर में कभी ना हो पाए क्योंकि ये दिक्कत भारत की एक समूची बैटिंग जेनरेशन की है और भारतीय बल्लेबाज बाकी पिचों पर बेहद सफल हैं जिसमें ऑस्ट्रेलिया के मैदान भी शामिल हैं। केवल एक खास परिस्थितियों की असफलता को शायद इन हालातों में इतनी गंभीरता से नहीं लिया जाएगा।
हां, पंत सपाट पिचों पर भारत के सबसे आंतकित करने वाले बल्लेबाज हैं। वे आज टी20, वनडे और टेस्ट क्रिकेट में पहली च्वाइस के विकेटकीपर हैं। साहा, कार्तिक जैसे नाम पंत की आभा में धुंधले हो चुके हैं। केवल संजू सैमसन के अंदर ही पंत को पछाड़ने की प्रतिभा नजर आती है लेकिन अभी वे बेहद कम मैच्योर खिलाड़ी हैं और यहीं पर पंत उनसे कोसो आगे निकल जाते हैं। यही स्थिति ईशान किशन की है। जब तक ये विकेटकीपर बल्लेबाज बहुत कम समय में बहुत ज्यादा नहीं सीख लेते तब तक पंत का एकछत्र जलवा भारतीय क्रिकेट पर कायम रहेगा।

कोई गजब प्रतिभा ही पंत को टीम से बाहर कर सकती है- पोंटिंग
पोंटिंग भी कहते हैं, "मैं देख सकता हूं पंत का गेम कितना बदल गया है, वह कितना विकसित हो गया है और किस तरह से वह हर भारतीय टीम का हिस्सा होना चाहता है। मुझे अब लगता है कोई बेमिसाल प्रतिभा ही पंत को टीम से बाहर करने का कारण बन सकती है, फिर चाहे वह कोई भी फॉर्मेट हो।"
पोंटिग ने यह भी बताया कि पंत पहले सीजनों में उप-कप्तान के तौर पर बहुत अच्छा कर पाए हैं जिसके चलते अय्यर के बाहर होते ही वे कप्तानी की पहली पसंद थे।
पोंटिंग कहते हैं, "जब वह कप्तान नहीं थे, तो वह एक असाधारण उप-कप्तान थे। उन्होंने इस आईपीएल की बागडोर संभाली है और उन्होंने अब तक बहुत अच्छा काम किया है, और मैंने उनके साथ काम करने के हर पल का आनंद लिया है। हम सभी दिल्ली कैपिटल फ्रैंचाइजी के आसपास कुछ खास करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। हम पिछले साल करीब पहुंच गए, फाइनल में जगह बनाई। लेकिन इस साल हम एक कदम आगे जाना चाहते हैं। और जाहिर है ऋषभ इसका एक बड़ा हिस्सा बनने जा रहा है।"
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