इन 5 बातों में जानें असल ज़िंदगी के योद्धा माइकल शूमाकर को
फॉर्मूला वन का नाम सुनते ही तस्वीर उभरने लगती है रफ्तार की। वो रफ्तार जो किसी को भी दूर तक बहा ले जाने का जज़्बा रखती है। फॉर्मूला वन रेसर शब्द आते ही जो नाम ज़ेहन में आता है वो है शूमाकर।
अपने दौर के चैंपियन रहे मिषाएल शूमाखर को लुजान के यूनिवर्सिटी क्लीनिक से छुट्टी मिल गई है। उनकी मैनेजर ये जानकारी देते हुए कहा कि अभी 45 साल के खिलाड़ी को काफी आराम की जरूरत है।
उनकी ज़िंदगी के तमाम पहलू चर्चा में रहे तो कई हिस्से और किस्से अछूते से बने रहे। आज घुमाएं स्लाइडर और जानें रफ्तार के बाजीगर शूमाकर की जिंदगी के अच्छे और बुरे दिन-

शौक बड़ी चीज़
फॉर्मूला वन के ट्रैक पर जब से शूमाखर अपनी प्रतिभा दिखा रहे थे तभी से उनहें आउटिंग पर स्कींग करना पसंद है। जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्विट्जरलैंड की आल्प पहाड़ियों की तरफ जाना उनकी विशलिस्ट में शामिल रहा है।

रफ्तार से दूरी बर्दाश्त नहीं
कहा जाता है कि शूमाकर ने हवाई जहाज के साथ भी रेस लगाने का 'उत्साह' दिखाया था। पहले संन्यास के बाद शूाकर रफ्तार से जुदाई बर्दाश्त नहीं कर पाए तो उन्होंने नया रास्ता खोज निकाला। माइकल ने बाइक पर करतब दिखाने का फैसला किया व दुर्भाग्वश 2008 में जर्मनी के सुपर बाइक चैंपियनशिप में टेस्ट राइड के दौरान फिसल कर गिर गए।

यह पहला हादसा नहीं
ऐसा नहीं है कि यह उनका पहला हादसा था। फॉर्मूला वन रेसों के दौरान भी शूमाखर को कई बार हादसों से गुजरे हैं पर उनकी हिम्मत अक्सर काबिल-ए-तारीफ रही। मेलबर्न में 2006 के दौरान ऐसी ही एक घटना के बाद वे ज़ख्मी हुए थे। करियर के पहले दशक में शूमाखर को एक बार इंग्लिश रेस के दौरान बड़ी दुर्घटना का सामना करना पड़ा था। 1999 में सिल्वरस्टोन में हुए हादसे में उनका पांव टूट गया था पर वे ट्रैक से दूरी नहीं सह पाए।

परिवार ने दिया भरपूर साथ
शूमाकर परिवार के मामले में भाग्यशाली रहे। इस दुखद घड़ी में पत्नी कोरिना और दोनों बच्चे फ्रांस अस्पताल में रहे व अब वे छुट्टी पर घर लौट रहे हैं। गंभीर चोट के बाद पिछले हफ्तों और महीनों के दौरान उनकी हालत में काफी सुधार आया है।

9 दिसंबर 2013 करीब 11 बजे
उस वक्त शूमाखर स्कीइंग के लिए मेरिबेल के ट्रैक पर थे, स्कीइंग के दौरान उन्होंने एक चट्टान पर से छलांग लगाई व वह नियंत्रण खो बैठे और सिर के बल पथरीली सतह से टकरा गए। शूमाखर उस समय बोल रहे थे लेकिन कुछ समझ नहीं पा रहे थे। दरअसल उनका हेलमेट टूट चुका था व वे अचेत हो गए थे। गंभीर चोट के कारण उन्हें मेरिबेल से ग्रेनोबल ले जाया गया। दिमाग के बाएं हिस्से में जमा खून का थक्का निकाला गया. करीब दो घंटे ऑपरेशन चला व अब जाकर उन्हें आराम मिल पाया है।
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