क्रिकेट के विकास में कमेंट्री का अहम रोल, PM मोदी ने दिया अन्य भारतीय खेलों में भी कमेंट्री-कल्चर पर जोर

नई दिल्लीः आज क्रिकेट भारत के घरों-घरों तक अपनी पैठ बनाने वाला खेल है। यह न केवल युवाओं में सबसे अधिक लोकप्रिय खेल है बल्कि आज कैरियर की तमाम संभावनाओं के बीच क्रिकेट भारतीय उपमहाद्वीप में एक बेहतरीन जीविका का अवसर भी प्रदान करता है। आईपीएल लीग के उत्थान के कारण कई युवा क्रिकेटर यह जानते हैं कि एक अच्छा आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट उनके भविष्य को बहुत ही निश्चिंतता दे सकता है। क्रिकेट को लेकर भारत में अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

आज तमाम तरह से क्रिकेट का विकास हो चुका है। मैचों के दौरान होने वाली कमेंट्री आज भी खेल का उतना ही विभिन्न हिस्सा है जितना कि तब हुआ करती थी जब टेलीविजन का जमाना नहीं था, और हम केवल रेडियो के जरिए यह जान पाते थे कि अमुक मैच में क्या चल रहा है। क्रिकेट में कमेंट्री ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करी है और 1983 का जो वर्ल्ड कप था वह भी कमेंट्री के माध्यम से ही कई लोगों ने 'फील' किया था। उस दौरान देशभर में कमेंट्री के जरिए ही क्रिकेट को जाना जाता था।

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ऐसे में हम यह जानते हैं कि कमेंट्री क्रिकेट के विकास में बहुत ही अहम भूमिका अदा करती आई है और आज हम कई भारतीय भाषाओं में क्रिकेट कमेंट्री को देखते हैं। देशभर के कई पूर्व क्रिकेटर हिंदी में धाराप्रवाह बोलते हुए कमेंट्री से हिंदी भाषी लोगों का मन मोह लेते हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि एक खेल को कई भाषाओं प्रसारित करें ताकि उसके प्रति जुड़ाव कहीं अधिक स्वभाविक तरह से हो सके। हालांकि देशभर के अन्य खेलों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में इसी बात को इंगित किया है।

प्रधानमंत्री कहते हैं कि कई खेल ऐसे हैं जो अच्छी कमेंट्री उपलब्ध ना होने के कारण लुप्त होने के कगार पर हैं। मन की बात कार्यक्रम पर पीएम ने कहा- "टीवी के आने से पहले क्रिकेट और हॉकी में कमेंट्री ही एक ऐसा साधन थी जिसने लोगों तक इन खेलों की लोकप्रियता को पहुंचाया है। टेनिस और फुटबॉल की कमेंट्री भी बहुत अच्छी तरह से पेश की जाती है।"

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प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने देखा है जिन खेलों में कमेंट्री काफी अच्छी रहती है उनका प्रचार-प्रसार भी फिर वैसा ही रहता है लेकिन भारत में अभी भी कई खेल ऐसे हैं जहां कमेंट्री का कल्चर अभी तक नहीं आया है। प्रधानमंत्री ऐसे खेलों की लुप्त होने की स्थिति पर चिंता जताते हैं और आगे कहते हैं कि ऐसे खेलों में अधिक से अधिक भारतीय भाषाओं में कमेंट्री की जानी चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोगों तक उनकी पहुंच बन सके और यह खेल भी समय के साथ तरक्की कर सकें।

जो खेलता है वह खिलता भी है-

प्रधानमंत्री ने कहा है कि वह खेल मंत्रालय और अन्य प्राइवेट संस्थाओं से इस बारे में साथ मिलकर काम करने का आग्रह करेंगे। प्रधानमंत्री ने देश के युवा बच्चों को यह मंत्र दिया है कि वह 'वारियर बने ना की वरीयर', उन्होंने कहा है कि अपनी परीक्षाएं हंसते खेलते हुए दीजिए, अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करिए लेकिन साथ ही खेलना भी नहीं छोड़ना चाहिए। प्रधानमंत्री कहते हैं जो खेलता है वह खिलता भी है।

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Story first published: Sunday, February 28, 2021, 14:12 [IST]
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