श्रीलंका के पूर्व तेज गेंदबाज ने नीरज चोपड़ा के मेडल को बताया पूरे उपमहाद्वीप का गोल्ड
नई दिल्लीः श्रीलंका के पूर्व तेज गेंदबाज धम्मिका प्रसाद भारत के नीरज चोपड़ा के ओलंपिक स्वर्ण पदक को पूरे उपमहाद्वीप की जीत के रूप में गिन रहे हैं।
एक ओलंपिक गोल्ड तुलनात्मक तौर पर पिछड़े हिस्सों के लिए आज भी एक सपना है। भारतीय उपमहाद्वीप में भारत के अलावा, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश आदि जैसे देश आते हैं। प्रसाद का मानना है ये इस पूरे हिस्से का मेडल है।
डेक्कन क्रॉनिकल के हवाले से श्रीलंका से बोलते हुए प्रसाद ने कहा"इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह (नीरज) कहां से हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं कहां का हूं। जैसे ही उन्होंने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता, हम दक्षिण एशियाई लोगों ने एक क्षेत्र के रूप में स्वर्ण पदक जीता।"
"हम इसके बारे में वास्तव में खुश हैं और हमें इसकी सराहना करनी चाहिए। मुझे अभी भी वह दिन याद है, श्रीमती सुशांतिका जयसिंह ने हमारे लिए रजत पदक जीता था, हमने एक राष्ट्र के रूप में कैसे मनाया। यह हमारा दूसरा ओलंपिक पदक था और पहला जीता था मिस्टर डंकन व्हाइट थोड़ी देर पहले। जिस दिन उन्होंने पदक जीता, हमें लगा जैसे हम जीत गए। हमने इसे ऐसे अपनाया। आशा है कि भारतीयों ने नीरज चोपड़ा के लिए भी ऐसा ही महसूस किया जैसा उन्होंने खुद गोल्ड जीता हो।"
उन्होंने आगे कहा, "ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतना किसी भी एथलीट के लिए एक सपने के सच होने जैसा होता है और उसने ऐसा किया। एक बहुत अच्छी तरह से योग्य जीत और वह किसी भी खेल के सम्मान और प्रशंसा के पात्र हैं।"
"मुझे याद है जब हम श्रीलंका में विश्व कप मैच कराने के लिए संघर्ष कर रहे थे। भारतीय और पाकिस्तान के खिलाड़ी हमारी मदद के लिए आए थे। मैं हमेशा उनके लिए आभारी रहूंगा।"
"अंत में, और एक बार फिर मैं नीरज चोपड़ा को ओलंपिक 2020 में उनके उत्कृष्ट ट्रैक और फील्ड प्रदर्शन के लिए बधाई देना चाहता हूं। ब्रावो!"
वैसे जब एक एथलीट के स्तर पर सोच-विचार की बात आती है तो वह बड़े नजरिए से सोचने लगता है। जब नीरज चोपड़ा के साथ फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान के अरशद नदीम थे तब मीडिया में भारत-पाकिस्तान प्रतिद्वंदता की बात कहकर खूब मसाला पेश किया गया। इसको क्रिकेट के मैदान की तरह भारत बनाम पाकिस्तान का मुकाबला बता दिया गया, जबकि नीरज के मुकाबले अरशद किसी रेस में भी नहीं थे। फाइनल में नीरज टॉप में रहे, अरशद ने 85 मीटर से ऊपर भी क्रास नहीं किया था।
लेकिन जब नीरज से इस बाबत पूछा गया कि उन्होंने दुख जताया कि अरशद कोई मेडल नहीं ले पाए क्योंकि उनको लगता है इससे एशिया का नाम एथलेटिक्स में और ऊंचा होता। तो एक एथलीट कई बार अपने गांव, शहर, राज्य और देश से भी ऊपर हटकर समूचे विश्व के बारे में भी सोचता है। धम्मिका के मुताबिक नीरज का मेडल एशियाई उपमहाद्वीप का है, नीरज के मुताबिक अरशद भी जीत जाते तो एशिया का नाम होता।
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