मैच से मिनट पहले मुझे मेरी रिंग ड्रैस बदलने को क्यों कहा गया, मैरी कॉम ने मांगा जवाब
नई दिल्ली: मैरी कॉम की विदाई ओलंपिक से हो गई है। ये उनका आखिरी ओलंपिक था, वे कोलंबिया की इंग्रिट वालेंसिया के खिलाफ राउंड ऑफ 32 में हार गईं। यह मुकाबला टक्कर का था। हारने के एक दिन बाद, भारत की मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम इस बारे में स्पष्टीकरण मांग रही हैं कि उन्हें क्वार्टर फाइनल मुकाबले से एक मिनट पहले रिंग ड्रेस बदलने के लिए क्यों कहा गया।
बॉक्सिंग की महान हस्ती एमसी मैरी कॉम ने गुरुवार को कोलंबिया की इंग्रिट विक्टोरिया वालेंसिया से हारने के बाद अपनी नाखुशी जाहिर की है। यह दो दिग्गजों के बीच एक कड़ा मुकाबला था। और स्पिलिट फैसला (3:2) वालेंसिया के पक्ष में गया।

मैरी कॉम ने हार के बात पूछा ये सवाल-
मैरी ने ट्विटर पर लिखा, "आश्चर्यजनक..क्या कोई समझा सकता है कि रिंग की ड्रेस क्या होगी। मेरे प्री क्वार्टर बाउट के एक मिनट पहले मुझे अपनी रिंग ड्रेस बदलने के लिए कहा गया था। क्या कोई कारण समझा सकता है?"
मैरी कॉम ने अपनी इस पोस्ट पर पीएमओ इंडिया, खेल मंत्री अनुराग ठाकुर, पूर्व खेल मंत्री किरन रिजिजू, ओलंपिक्स और आईओसी मीडिया को टैग किया।
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मेरे मन में यही था कि जीत गई हूं- मैरी कॉम
जब मैच में जजों ने फैसले की घोषणा की तो मैरी ने हार का गम छुपा लिया था। मैरी को मुस्कुराते और हाथ उठाते देखा जा सकता है। छह बार की विश्व चैम्पियन 38 वर्षीया ने कहा कि उनको अपनी हार का अहसास तब हुआ जब पूर्व खेल मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट किया। यानी मैरी ने जो हार के बाद हाथ उठाया था वह दरअसल उनके लिए जीत का अंदेशा था। उनको गुमान नहीं था कि वह हार गईं हैं।
मैरी ने इंडिया टुडे को बताया, "मुझे लगा कि मैं लड़ाई जीत रही हूं। फिर मैंने अपनी हार के बारे में सोशल मीडिया पर किरण रिजिजू का ट्वीट देखा, मैं उसके बाद हैरान और परेशान थी। मुझे नहीं पता कि क्या कहना है, मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि ऐसा निर्णय लिया गया था।"

IOC ने 40 साल तय की है मुक्केबाजी की सीमा-
"जब मैंने लड़ाई के बाद अपना नमूना देने के लिए डोपिंग सेंटर में प्रवेश किया, तब भी मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैं हार गई हूं। मेरे कोच मुझे यह बताने की कोशिश कर रहे थे कि मैं जीत गई, लेकिन इसका क्या मतलब है कि मैं समझ नहीं पा रहा हूं।
"मैं विरोध भी नहीं कर सकती क्योंकि हमें बताया गया था कि इस ओलंपिक में इसकी अनुमति नहीं है। इस तरह की चीजें पहले भी मेरे साथ अन्य प्रतियोगिताओं में हुई हैं। अकेले इस ओलंपिक के साथ ऐसा नहीं है। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था। आखिरी मुक्केबाजी विश्व चैंपियनशिप भी ऐसी थी।"
अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ ने फिलहाल अपनी प्रतियोगिताओं में मुक्केबाजों की उम्र को 40 वर्ष तक सीमित किया हुआ है, लेकिन वर्षों की समस्याओं के बाद इस ओलंपिक चक्र के लिए इसे निलंबित कर दिया गया है।
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