प्रवासी चीनियों की 'घर वापसी'
दुनिया के ज़्यादातर प्रमुख शहरों में बने 'चाइना टाउन' में रहने वाले चीनियों का इस्तेमाल उनके बहुभाषी होने कारण ओलंपिक में खूब हो रहा है.
देश के बाहर इन चाइना टाउन में रहने वाले चीनियों और अन्य चीनी प्रवासियों को मेंडरिन भाषा के अलावा अन्य भाषाओं में इनकी पकड़ के कारण चीन में स्वागत किया जा रहा है.
देश के बाहर रहने वालों के लिए भी अपने पूर्व देश से फिर से जुड़ने का यह एक अच्छा मौका है.
हाल के वर्षों में नियमों में ढील देने के बावजूद भी देश के बाहर रहने वालों के लिए वापस आना आसान नहीं है.
झंडा ऊंचा रहे हमारा
एथलीट विलेज ओलंपिक में भाग लेने वाले देशों के झंडों से सजा हुआ है.
लेकिन इन झंडों में कुछ देश के झंडे दूर से ही दिख जाते हैं. 12 मंजिल टावर से लटकता हुआ कनाडा का 'मैपल लिफ' सबसे बड़ा राष्ट्रीय झंडा है जो विलेज में नज़र आता है.
दक्षिण अफ़्रीका भी पीछे नहीं है. उनका टावर भी आसानी से दिखाई पड़ जाता है क्योंकि सभी बालकनी में एक राष्ट्रीय झंडा लगा है.
हां, ऐसा लगता है कि अन्य देशों ने महज खानापूर्ति के नाम पर अपना झंडा लगा रखा है.
पिछले ओलंपिक खेलों में जहाँ एथलीट विलेज में ओलंपिक में भाग लेने वाले सभी देशों का झंडारोहण समारोह मनाया जाता था, वहीं इस बार ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया.
ऐसा लगता है कि सुरक्षा कारणों से ऐसा नहीं किया गया.
खीज पैदा करते पोल
खेलों के मैदानों पर झंडों के लिए लगे पोल उन दर्शकों के लिए खीज पैदा करते हैं जिनके सीट के ठीक सामने ये लगे होते हैं.
बीजिंग ओलंपिक खेल के आयोजकों ने झंडे के लिए स्थाई पोल को पूरी तरह से हटा दिया है.
इसके बदले पदक वितरण समारोह से कुछ समय पहले दो मीटर लंबे झंडों के पोल को स्पेशल प्लेटफार्म पर ले आया जाता है और इलेक्ट्रिक मोटर के सहारे ज़रूरत से हिसाब से इसे ऊपर-नीचे किया जाता है.
जो देश स्वर्ण पदक जीतता है उनका झंडा सबसे ऊपर और कांस्य जीतने वाले देश का झंडा सबसे नीचे.
अब एम्बुलेंस भी
ओलंपिक खेलों के लिए बने जगहों के बाहर सुरक्षा के काफ़ी बंदोबस्त किए गए हैं
ओलंपिक खेलों के लिए बनी जगहों पर सुरक्षा हथियारों से लैस चीनी सेना मुस्तैद रहती ही थी अब उनके साथ एम्बुलेंस भी तैनात रहने लगी है.
इस बारे में पूछने पर पता चला कि किसी अप्रिय घटना की सूरत में मेडिकल सहायता उपलब्ध करवाने के ख़्याल से इसे सुरक्षा बंदोबस्त में जोड़ा गया है.
जैसा की पिछली डायरी में हमने लिखा था कि पिछले दिनों चीन की दीवार का फ़िल्मांकन करते समय अचानक बिजली गिरने से एक अमरीकी टेलीविज़न के सात सदस्य घायल हो गए थे, इसके बाद ही ऐसा किया गया.
अपने काम में लगे हुए
जबकि आयोजकों ने चेतावनी दे रखी है कि कोई भी ओलंपिक खेलों की टिकटों को ज़्यादा क़ीमत में नहीं बेचेगा, फिर भी कुछ दुस्साहसी लोग अपने काम में लगे रहते हैं.
सबसे ज़्यादा आश्चर्यजनक तो यह है कि खेल मैदानों के बाहर सुरक्षाकर्मियों की आँखों के सामने वे टिकट बेचते हैं फिर भी अधिकारी उन पर कोई कार्रवाई करते नहीं दिखते.
नेशनल ओलंपिक स्टेडियम, जिसे बर्ड्स नेस्ट स्टेडियम भी कहा जाता है, उसमें होने वाले खेलों के लिए जहाँ एक दिन का टिकट 30 यूआन में मिलता है वहीं इसे 800 यूआन तक की क़ीमत में बेचा जाता है.
ऐसा लगता है कि टिकटों की भारी माँग है.
ब्राजील और अर्जेंटीना के बीच होने वाले फुटबाल सेमी फ़ाइनल मैच के लिए 100 यूआन की कीमत वाली टिकटों को ढ़ाई हज़ार यूआन में बेचा जा रहा है.
देश के बाहर इन चाइना टाउन में रहने वाले चीनियों और अन्य चीनी प्रवासियों को मेंडरिन भाषा के अलावा अन्य भाषाओं में इनकी पकड़ के कारण चीन में स्वागत किया जा रहा है.
देश के बाहर रहने वालों के लिए भी अपने पूर्व देश से फिर से जुड़ने का यह एक अच्छा मौका है.
हाल के वर्षों में नियमों में ढील देने के बावजूद भी देश के बाहर रहने वालों के लिए वापस आना आसान नहीं है.
झंडा ऊंचा रहे हमारा
एथलीट विलेज ओलंपिक में भाग लेने वाले देशों के झंडों से सजा हुआ है.
लेकिन इन झंडों में कुछ देश के झंडे दूर से ही दिख जाते हैं. 12 मंजिल टावर से लटकता हुआ कनाडा का 'मैपल लिफ' सबसे बड़ा राष्ट्रीय झंडा है जो विलेज में नज़र आता है.
दक्षिण अफ़्रीका भी पीछे नहीं है. उनका टावर भी आसानी से दिखाई पड़ जाता है क्योंकि सभी बालकनी में एक राष्ट्रीय झंडा लगा है.
हां, ऐसा लगता है कि अन्य देशों ने महज खानापूर्ति के नाम पर अपना झंडा लगा रखा है.
पिछले ओलंपिक खेलों में जहाँ एथलीट विलेज में ओलंपिक में भाग लेने वाले सभी देशों का झंडारोहण समारोह मनाया जाता था, वहीं इस बार ऐसा कुछ नहीं दिखाई दिया.
ऐसा लगता है कि सुरक्षा कारणों से ऐसा नहीं किया गया.
खीज पैदा करते पोल
खेलों के मैदानों पर झंडों के लिए लगे पोल उन दर्शकों के लिए खीज पैदा करते हैं जिनके सीट के ठीक सामने ये लगे होते हैं.
बीजिंग ओलंपिक खेल के आयोजकों ने झंडे के लिए स्थाई पोल को पूरी तरह से हटा दिया है.
इसके बदले पदक वितरण समारोह से कुछ समय पहले दो मीटर लंबे झंडों के पोल को स्पेशल प्लेटफार्म पर ले आया जाता है और इलेक्ट्रिक मोटर के सहारे ज़रूरत से हिसाब से इसे ऊपर-नीचे किया जाता है.
जो देश स्वर्ण पदक जीतता है उनका झंडा सबसे ऊपर और कांस्य जीतने वाले देश का झंडा सबसे नीचे.
अब एम्बुलेंस भी
ओलंपिक खेलों के लिए बने जगहों के बाहर सुरक्षा के काफ़ी बंदोबस्त किए गए हैं
ओलंपिक खेलों के लिए बनी जगहों पर सुरक्षा हथियारों से लैस चीनी सेना मुस्तैद रहती ही थी अब उनके साथ एम्बुलेंस भी तैनात रहने लगी है.
इस बारे में पूछने पर पता चला कि किसी अप्रिय घटना की सूरत में मेडिकल सहायता उपलब्ध करवाने के ख़्याल से इसे सुरक्षा बंदोबस्त में जोड़ा गया है.
जैसा की पिछली डायरी में हमने लिखा था कि पिछले दिनों चीन की दीवार का फ़िल्मांकन करते समय अचानक बिजली गिरने से एक अमरीकी टेलीविज़न के सात सदस्य घायल हो गए थे, इसके बाद ही ऐसा किया गया.
अपने काम में लगे हुए
जबकि आयोजकों ने चेतावनी दे रखी है कि कोई भी ओलंपिक खेलों की टिकटों को ज़्यादा क़ीमत में नहीं बेचेगा, फिर भी कुछ दुस्साहसी लोग अपने काम में लगे रहते हैं.
सबसे ज़्यादा आश्चर्यजनक तो यह है कि खेल मैदानों के बाहर सुरक्षाकर्मियों की आँखों के सामने वे टिकट बेचते हैं फिर भी अधिकारी उन पर कोई कार्रवाई करते नहीं दिखते.
नेशनल ओलंपिक स्टेडियम, जिसे बर्ड्स नेस्ट स्टेडियम भी कहा जाता है, उसमें होने वाले खेलों के लिए जहाँ एक दिन का टिकट 30 यूआन में मिलता है वहीं इसे 800 यूआन तक की क़ीमत में बेचा जाता है.
ऐसा लगता है कि टिकटों की भारी माँग है.
ब्राजील और अर्जेंटीना के बीच होने वाले फुटबाल सेमी फ़ाइनल मैच के लिए 100 यूआन की कीमत वाली टिकटों को ढ़ाई हज़ार यूआन में बेचा जा रहा है.
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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