.मिशन आेलंपिक. है 2008 की सबसे बडी चुनौती
नयी दिल्ली 31 दिसंबर.वार्ता. वर्ष 2007 भारतीय खेलों को नई ऊंचाइयां देकर गुजर गया है लेकिन नए वर्ष में चीन के पेइचिंग में होने वाले आेलंपिक खेल भारत के लिए सबसे बडी चुनौती होंगे
वर्ष 2008 में. मिशन आेलंपिक. भारतीय खेलों के लिए सबसे बडा लक्ष्य होगा क्योंकि भारतीय खेलों का ग्राफ 2007 से जिस तरह से ऊपर चढा है उसने निश्चित प से नए वर्ष के लिए उम्मीदों की किरण जगा दी है
आेलंपिक वर्ष आते ही सभी का ध्यान अन्य बातों को छोडकर सिर्फ इस तरफ मुड जाता है कि एक अरब से ज्यादा की आबादी वाले इस देश का आेलंपिक में प्रदर्शन कैसा रहेगा1 आेलंपिक का इतिहास गवाह है कि भारत एक आेलंपिक में कभी भी एक पदक से आगे नहीं बढ पाया है1 वर्ष 1996 के अटलांटा आेलंपिक में लिएंडर पेस ने टेनिस में कांस्य 2000 के सिडनी आेलंपिक में कर्णम मल्लेश्वरी ने भारोत्तोलन में कांस्य और 2004 के एथेंस आेलंपिक में राज्यवर्धन सिंह राठौड ने निशानेबाजी में रजत पदक जीता था
अगस्त में होने वाले पेइचिंग आेलंपिक के लिए अब सात महीने का समय रह गया है लेकिन खेलों के महाकुंभ में भारत की पदक उम्मीदों पर ध्यान देने के बजाय भारतीय आेलंपिक संघ.आईआेए.और खेल मंत्रालय 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के लिए धन आवंटन.खेल नीति और खेल संघों पर नियामक प्राधिकरण बैठाने को लेकर टकराव में उले हुए हैं1 ऐसे हालात में भारत के खिलाडियों की आेलंपिक तैयारियां कैसी चल रही होंगी इसकी सहज कल्पना की जा सकती है
राज.प्रकाश.ति्रपाठी1518जारी.वार्ता
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