आज बड़ा नाम संन्यास ले तो भी टीम इंडिया को फर्क नहीं पड़ेगा, युवा तैयार हैं- मोहम्मद शमी
नई दिल्लीः यह तो सभी ने देख लिया है कि भारत की बेंच स्ट्रैंथ कितनी मजबूत है और अब इसी बारे में बात करते हुए भारत के अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी का कहना है कि अगर कोई सीनियर खिलाड़ी रिटायर भी हो जाता है तो भी टीम को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है क्योंकि युवा उसकी जगह लेने के लिए पूरी तरह तैयार है। आपको बता दें मोहम्मद शमी, इशांत शर्मा, जसप्रीत बुमराह और उमेश यादव उस टीम का हिस्सा नहीं थे जिसने आस्ट्रेलिया में अंतिम टेस्ट मैच जीता था।
उस टीम में शार्दुल ठाकुर, टी नटराजन, मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाज थे। इसके बावजूद भारत ने वह मैच जीता और ऑस्ट्रेलिया में सीरीज भी 2-1 से जीती थी। उसके बाद भारत के इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू सीजन में भी युवा खिलाड़ी छाए रहे और हमने टेस्ट में अक्षर पटेल के साथ-साथ T20 क्रिकेट में ईशान किशन और सूर्यकुमार यादव जैसे सितारों को उभरते हुए देखा।
मोहम्मद शमी ने पीटीआई से बात करते हुए बताया, "युवा खिलाड़ी हमारी जगह लेने के लिए तैयार हैं भले ही हम में से कोई भी रिटायर हो जाए। जितना ज्यादा वे खेलेंगे उतना ही बेहतर वे बनते जाएंगे। मुझे लगता है ट्रांजिशन बहुत आराम से होगा, जब भी हम लोग खेल को विदा कहेंगे।"
मोहम्मद शमी एडिलेड टेस्ट के बाद से ही भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं क्योंकि उनको कलाई में चोट लग गई थी। यह चोट उनको बैटिंग करते हुए लगी थी जब एक बाउंसर का सामना करने में विफल रहने के कारण वह गेंद को सीधा कलाइयों पर लगवा चुके थे।
शमी आगे कहते हैं, "यहां तक कि कोई बड़ा नाम संन्यास लेता है तो भी टीम को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। बेंच तैयार है। एक्सपीरियंस की हमेशा जरूरत होती है और युवाओं को समय के साथ यह हासिल हो जाएगा। बबल के वातावरण में नेट बॉल्स को अपने साथ लेकर चलना फायदेमंद साबित हुआ है क्योंकि इससे युवा खिलाड़ियों को माहौल समझने में मदद मिली है और इस एक्सपोजर ने उनको अधिक अनुभवी बनाया है।
जब शमी से पूछा गया कि भारतीय युवा गेंदबाजों में उनको क्या बात सबसे प्रभावित करती है तो उनका जवाब था-
"जो भी आ रहा है वह खुले दिमाग का है, फ्रैंकली बातें करता है और बहुत ही ज्यादा कॉन्फिडेंट है। वह बॉलिंग करने के लिए तैयार है, चाहे गेंद पुरानी हो या फिर नई। जिस तरह से उन्होंने आस्ट्रेलिया में परफॉर्म किया है यह उनके चरित्र को दिखाता है। ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में हराना बहुत बड़ी उपलब्धि है और हम ऐसा दो बार कर चुके हैं और वह भी तब हुआ है जब कोई सीनियर बॉलर आस-पास नहीं था। यह दिखाता है कि हम अपने युवाओं पर विश्वास कर सकते हैं।"
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