नई दिल्ली। कुंवारी बॉक्सरों के जबरन प्रेग्नेंसी टेस्ट ने केवल मीडिया जगत में ही नहीं बल्कि पूरे देश में खलबली मचा दी थी जिस पर कल तक चुप रहने वाले भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने शुक्रवार को अपना मुंह खोला है और कहा है कि हमने हमने नहीं कराया कुंवारी बॉक्सरों की प्रेग्नेंसी टेस्ट। साई के मुताबिक विश्व महिला मुक्केबाजी चैम्पियनशिप दल में 18 साल से कम उम्र की कोई मुक्केबाज शामिल ही नहीं है।
मालूम हो कि इंडियन स्पोर्ट्स मेडिसिन के प्रेसीडेंट डॉक्टर पीएसएम चंद्रन ने मीडिया को बताया था कि बॉक्सिंग इंडिया ने दक्षिण कोरिया के जेजु में होने वाले विश्व चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने वाले महिला मुक्केबाजों का मातृत्व परीक्षण कराया। इनमें कुछ नाबालिग लड़कियां भी शामिल थीं।
नाबालिग मुक्केबाजों के मातृत्व परीक्षण की खबर गलत
दूसरी ओर, साई के प्रमुख निदेशक जीजी थॉमसन ने कहा, "नियमों के अनुसार विश्व चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने के लिए प्रतियोगी की उम्र कम से कम 19 वर्ष होनी चाहिए। ऐसे में नाबालिग लड़कियों की बात कहां से आ गई।" साथ ही थॉमसन ने कहा कि चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने जा रहे दल की सबसे युवा सदस्य का जन्म 1994 में हुआ। इसलिए जो भी खबरें आयी हैं वो गलत और बेबुनियाद है।
विश्व मुक्केबाजी संस्था (एआईबीए) के नियमों के अनुसार विश्व चैम्पियनशिप में हिस्सा लेने वाली सभी खिलाड़ियों के लिए यह प्रमाणपत्र देना जरूरी है कि वे गर्भवती नहीं हैं। यह प्रमाणपत्र किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सक से सत्यापित होना चाहिए। थॉमसन ने कहा कि हम केवल एआईबीए के नियमों का पालन कर रहे थे। नाबालिग लड़कियों की जांच की बात बेबुनियाद है। साथ ही हम विश्व चैम्पियनशिप से पहले अनावश्यक विवाद पैदा करने की इस तरह की कोशिशों की भी निंदा करते हैं।