भारतीय 'सेमेन्या' की कसक
बीबीसी स्पोर्ट्स की इस रिपोर्ट के बाद की दक्षिण अफ़्रीका की एथलीट कैस्टर सेमेन्या से पदक नहीं छीना जाएगा, विवादों में रही भारतीय एथलीट शांति सौंदरराजन के लिए भी उम्मीद की किरण जगी है. पिछले दिनों जर्मनी के बर्लिन शहर में हुई विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में सेमेन्या ने महिलाओं की 800 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता था.
लेकिन इस जीत के बाद सेमेन्या के 'महिला' होने पर ही सवाल उठाया जाने लगा. बाद में अंतरराष्ट्रीय एमेच्योर एथलेटिक्स फ़ेडरेशन (आईएएएफ़) ने उनके 'लिंग परीक्षण' का आदेश दे दिया है. अभी जाँच की रिपोर्ट नहीं आई है, लेकिन बीबीसी स्पोर्ट्स को मिली जानकारी के मुताबिक़ जाँच का नतीजा जो भी हो, सेमेन्या से पदक नहीं छीना जाएगा.
उम्मीद
बीबीसी स्पोर्ट्स की इस रिपोर्ट के बाद भारतीय एथलीट शांति सौंदरराजन की उम्मीद भी बढ़ी है. वर्ष 2006 में दोहा एशियाई खेलों के दौरान शांति ने 800 मीटर की दौड़ में रजत पदक जीता था. लेकिन लिंग परीक्षण में उन्हें 'महिला वर्ग' में शामिल होने के लायक नहीं पाया गया. इसके बाद उनका पदक छीन लिया गया. अब सेमेन्या के बारे में आई रिपोर्ट से उत्साहित शांति का कहना है कि जब सेमेन्या को पदक वापस मिल सकता है, तो उन्हें क्यों नहीं.
मौक़ा
बीबीसी से बातचीत में शांति सौंदरराजन ने कहा, "मुझे इसलिए मौक़ा नहीं दिया गया क्योंकि मैं एक तमिल महिला हूँ. अगर मुझे मौक़ा दिया गया होता तो मैं ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीत सकती थी." शांति ने कहा कि उन्हें भी एक मौक़ा दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अपनी ख़राब आर्थिक स्थिति के कारण वे अकेली लड़ाई नहीं लड़ सकतीं.
शांति ने अपना ग़ुस्सा तमिलनाडु एथलेटिक्स एसोसिएशन पर भी निकाला और कहा कि एसोसिएशन ने न उनकी सहायता की और न ही उन्हें मान्यता दी. इस समय शांति सौंदरराजन अपनी ईनामी राशि से एक स्पोर्ट्स एकेडमी चलाती हैं. अपने गृह ज़िले पुडुक्कोटई में वे 40 खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करती हैं.
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