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ईशांत 2 वर्षों तक हुए कक्षा से बाहर

नई दिल्ली 25 मार्च: स्कूल की लड़कियों द्वारा स्वागत गीत गाया जा चुका था, कुछ अधिक जोशीली नृत्यांगनाएं भी अपना नृत्य पेश कर चुकी थीं तथा स्कूल के शिक्षक भी अपने विद्यालय के सर्वाधिक प्रसिद्ध छात्र - भारतीय क्रिकेट की नवीनतम हस्ती, ईशांत शर्मा की प्रशंसा में नई उपमाएं गढ़ते हुए थक चुके थे.

स्वागत समारोह समाप्त हो चुका था परंतु गंगा इंटरनेशनल स्कूल में 11वीं तथा 12वीं कक्षा की एकाउंट्स शिक्षक बबिता मान जोकि ईशांत की क्लास टीचर थीं, समय के उस पल की विडंबना पर मुस्कुरा रही थीं.

उन्हें याद था कि किस तरह वे लगातार 2 वर्षों तक ईशांत को अपनी कक्षा से बाहर निकाल कर अपना सत्र समाप्त होने तक बाहर ही खड़े रहने को कहती रही थीं. लेकिन इस दिन, मैडम बबिता को ईशांत के साथ मात्र एक फोटो खिंचवाने के लिए अन्य शिक्षकों के साथ प्रधानाचार्य के कार्यालय के बाहर खड़े होकर 1 घंटे से भी अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा.

''मुझे विश्वास ही नहीं हो रहा है कि यह सच है. 1 घंटे से भी अधिक समय पहले से वह स्कूल में आ चुका है और मैं अभी तक उससे मिल भी नहीं पाई हूं.'' बबिता ने कहा.

प्रधानाचार्य कार्यालय के बाहर अपने 'बेहद खराब' छात्रों में से एक का इंतजार करते हुए उन्होंने ईशांत के छात्र जीवन की यादों को ताजा किया. ''मैं उसे कभी भी अपनी कक्षा में नहीं देखना चाहती थी. उसकी बेहद कम उपस्थिति से मुझे बहुत परेशानी होती थी. अगर वह आता भी था तो मैं उसे बाहर ही खड़े रहने को कहती थी, क्योंकि नियमित रूप से विद्यालय आने वाले छात्रों के साथ न्याय करने के लिए ऐसा आवश्यक था. मुझे याद है कि मैं उसे रोजाना डांटती थी तथा उसके पास यही बहाना होता था कि मैं बाहर क्रिकेट खेल रहा था.''

'' इसलिए मैंने शारीरिक शिक्षक से कहा कि वे मुझे प्रधानाचार्य से ईशांत को कक्षा में बैठने देने के लिए अनुमति पत्र लाकर दें. लेकिन वे प्रधानाचार्य के पास जाने के स्थान पर स्वयं ही समस्या सुलझाने का प्रयास करते थे. वे मुझे कहते थे, 'मैडम, आप भारत के भविष्य के क्रिकेटर को देख रही हैं. आप उसे कक्षा से बाहर कैसे कर सकती हैं?' लेकिन मैं इस उम्मीद में कि एक दिन वह भारतीय टीम का सदस्य बन जाएगा तथा मैं एक भविष्य के क्रिकेट सितारे के साथ बुरा सुलूक कर रही हूं, उसे कक्षा में आने की आज्ञा नहीं दे सकती थी.'' बबिता ने बताया.

उन्होंने कहा, ''शारीरिक शिक्षक जग्गी केवल मुझे ही नहीं बल्कि ईशांत के दोस्तों को भी यकीन दिलाया करते थे. वे उनसे कहते थे, 'ईशांत के साथ तस्वीर खिंचवा लो, वह भारतीय टीम का हिस्सा बनने जा रहा है.' लेकिन बहुत कम लोग ही उन्हें गंभीरता से लिया करते थे क्योंकि किसी ने नहीं सोचा था कि वह इतनी बड़ी कामयाबी हासिल करेगा, उसके उन दोस्तों ने भी नहीं जिन्हें क्रिकेट के बारे में कुछ मालूम था.''

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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