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महासंघ की जुबान बोल रही कुंजारानी: मल्लेश्वरी

नयी दिल्ली। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता कर्णम मल्लेश्वरी ने भारतीय भारोत्तोलन महासंघ का समर्थन करने वाली कुंजारानी देवी पर पलटवार करते हुए कहा है कि मौजूदा पदाधिकारियों के बारे में उसका बयान गैर जरूरी और प्रायोजित है। भारत की एकमात्र ओलंपिक पदक विजेता भारोत्तोलक मल्लेश्वरी ने आईडब्ल्यूएफ और कुंजारानी को भेजे प्रत्युत्तर में कहा कि कुंजारानी का इस मामले में बयान गैर जरूरी और प्रायोजित है क्योंकि आईडब्ल्यूएफ के संबंधित पदाधिकारी मूक हैं।

कानून चुप्पी को सहमति माना जाता है। उन्होंने कहा कि अभी तक कुंजारानी महासंघ की कार्यप्रणाली के खिलाफ थी। मैं हैरान हूं कि उसने यू टर्न कैसे ले लिया। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में वह चुपचाप रही और लगता है कि यह बयान उसके लिये तैयार किया गया है। उसने जिस तरह से आईडब्ल्यूएफ अध्यक्ष बी पी बैश्य और महासचिव सहदेव यादव की तारीफें की है, उससे साफ लगता है कि मेरे उठाये गए मुद्दे को खारिज करने के लिये यह किया गया है।

कुंजारानी ने महासंघ के प्रति पूरा समर्थन जताते हुए मल्लेश्वरी के बयान को बेबुनियाद कहा था। मल्लेश्वरी ने हाल ही में आईडब्ल्यूएफ के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था क्योंकि वह महासंघ की कार्यप्रणाली से नाखुश थी। उसने आरोप लगाया कि महासंघ ऐसे लोग चला रहे हैं जिन्हें खेल के बारे में कुछ नहीं पता। सिडनी ओलंपिक 2000 की कांस्य पदक विजेता भारोत्तोलक ने कहा कि उसके इस्तीफे का कारण मौजूदा पदाधिकारियों का मनमाना रवैया था।

उन्होंने कहा कि मेरे इस्तीफे के सात दिन बाद भी इन पदाधिकारियों ने मेरे दावों का प्रत्यक्ष रूप से जवाब नहीं दिया है। अब उन्होंने मेरी साथी खिलाड़ी को मोहरा बनाया है। मल्लेश्वरी ने कहा कि मैने इस्तीफे में महासंघ के कामकाज में अनियमितताओं के उदाहरण भी दिये थे। इसके अलावा महासचिव और अध्यक्ष जैसे उच्च पदाधिकारियों के मनमानेपन का भी हवाला दिया था। मल्लेश्वरी ने कुंजारानी के इस दावे का भी खंडन किया कि मौजूदा महासंघ के कार्यकाल में भारोत्तोलकों का प्रदर्शन बेहतर हुआ है।

उसने कहा कि यदि ऐसा होता तो हमारे खिलाडि़यों का प्रदर्शन कहीं बेहतर होता। पिछले दो साल के प्रदर्शन को देखें तो हालात स्पष्ट हो जायेंगे। पहले हम ओलंपिक और अन्य स्पर्धाओं में पदक जीतते थे लेकिन अभी तो 2012 ओलंपिक के लिये क्वालीफाई भी नहीं किया है। मल्लेश्वरी ने इस बात को भी खारिज किया कि खेलों को डोपमुक्त बनाने के लिये मौजूदा पदाधिकारी कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उसने कहा कि पिछले डेढ साल में 25 से अधिक भारोत्तोलक भारत में ही डोपिंग के दोषी पाये गए हैं। इस महासंघ ने ऐसे कोचों को नियुक्त किया जो खुद डोपिंग के दोषी रहे हैं।

Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 13:00 [IST]
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