भारत में संन्यास लेने के बाद अमेरिका में चला इस बल्लेबाज का सिक्का, 69 गेंदों पर ठोके 132 रन
नई दिल्लीः उन्मुक्त चंद ने हाल ही में भारतीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। ये एक दिलचस्प बात है कि यह बात कई लोगों का ध्यान खींचने में कामयाब रही। उनकी तुलना एक समय विराट कोहली से हुई थी। उनकी कद काठी भी वैसी है। उन्मुक्त युवा बल्लेबाज हैं और अब अमेरिकी क्रिकेट में अपना नाम बना रहे हैं। दाएं हाथ के बल्लेबाज ने माइनर क्रिकेट लीग में सिलिकॉन वैली स्ट्राइकर्स के साथ सिर्फ 69 गेंदों में 132 रनों की जुझारू पारी खेलकर सुर्खियों बटोर ली। अपनी शानदार पारी से चंद ने अपनी टीम को छह विकेट से जीत दिलाई।

अमेरिकी क्रिकेट में बड़ा नाम बन सकते हैं उनमुक्त-
अगर चीजें उन्मुक्त की योजना की हिसाब से चलती हैं तो यह बल्लेबाज अमेरिकी क्रिकेट में बड़ा नाम बन सकता है। फिलहाल क्रिकेट में अमेरिका कुछ भी नहीं है और चंद जैसे प्रतिभाशाली बल्लेबाज वहां क्रिकेट को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकते हैं। चंद की टीम सिलिकॉन वैली स्ट्राइकर्स ऑस्टिन एथलेटिक्स के खिलाफ थी जिन्होंने अपने 20 ओवरों के अंत में 184 रन बनाए। टारगेट चुनौतीपूर्ण था लेकि चंद ने बैट के साथ एक प्रभावशाली प्रदर्शन करके पीछा करना आसान बना दिया। 132 रनों की अपनी पारी में बल्लेबाज ने 15 चौके और 7 छक्के लगाकर अपनी तेजतर्रार पारी खेली और अपनी टीम पर हावी हो गए।
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14 पारियों में 53.20 की औसत से 532 रन
उन्होंने छक्का मारकर शतक पूरा किया। माइनर क्रिकेट लीग के इस सीजन में बल्लेबाज का सफल प्रदर्शन रहा है। उन्होंने 14 पारियों में 53.20 की औसत से 532 रन बनाए हैं। उन्होंने इस मैच में लीग का अपना पहला शतक लगाया।
अमेरिका में बल्लेबाज की फॉर्म उसे क्रिकेट बिरादरी से बहुत ध्यान और प्रशंसा दिला रही है। क्रिकेट के दर्शक उन्हें पहले से ही यूएस का रोहित शर्मा बता रहे हैं और शायद यह अमेरिकी टीम के लिए उसका मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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यूएस में कुछ अच्छा क्रिकेट खेलना चाहते हैं-
चंद ने 2012 के अंडर-19 विश्व कप में भारतीय टीम को जीत दिलाई। वे कप्तान थे और उसके बाद से ही उनके और विराट कोहली के बीच समानताएं आ गईं। लेकिन गला काट प्रतियोगिता के कारण वह जगह नहीं बना सके और आखिरकार उन्होंने भारतीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करने का फैसला किया।
उनका कहना है कि ये उनके जैसे बल्लेबाज के लिए मुश्किल फैसला है क्योंकि उनका सपना देश के लिए खेलने का था। उन्होंने कहा था कि वह बता नहीं सकते कि भारतीय सीनियर क्रिकेट टीम की ओर से नहीं खेल पाना कितना दर्द देता है। इसी के चलते उन्होंने संन्यास लेने का फैसला कर दिया। उन्होंने कहा था कि अब वे यूएस में कुछ अच्छा क्रिकेट खेलना चाहते हैं।
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