अक्सर विवादों से घिरता है ओलंपिक
नई दिल्ली 15 अप्रैलः वैश्विक सद्भाव भले ही ओलंपिक आंदोलन की नींव रहा हो लेकिन इतिहास साक्षी है कि खेलों के इस महासमर का विवादों से हमेशा चोली दामन का साथ रहा है। ऐसे कई वाकयात हैं जब लोगों ने मानवाधिकार हनन के मामले उठाने या सियासी फायदे के लिये ओलंपिक को जरिया बनाया है।
लिहाजा बीजिंग ओलंपिक 2008 को लेकर दुनिया भर में हो रहे तिब्बत समर्थकों के प्रदर्शन कोई अपवाद नहीं है। तिब्बत में चीन के मानवाधिकार रिकार्ड का हवाला देते हुए यूनान लंदन और पेरिस में अब तक मशाल रिले का जबर्दस्त विरोध हो चुका है। 1936 के बर्लिन ओलंपिक के दौरान जर्मनी पर हिटलर की अगुआई में नाजियों का शासन था। कुछ यहूदी खिलाड़ियों ने इस ओलंपिक का बहिष्कार किया।
ओलंपिक इतिहास के पन्ने पलटें तो बहिष्कार की कई घटनायें इसमें दर्ज हैं। ब्रिटेन से आजादी नहीं मिलने के खिलाफ आयरलैंड ने लंदन ओलंपिक का बहिष्कार किया था। वहीं अमेरिकी टीम ने उद्घाटन समारोह में किंग एडवर्ड सप्तम को अपना ध्वज देने से इंकार कर दिया था। शीतयुद्ध के दौरान सोवियत खिलाड़ी 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में सिर्फ स्पर्धाओं के दौरान भागीदारी के लिये आये उन्होंने उदघाटन समारोह में भाग नहीं लिया।
यही नहीं हालैंड स्पेन और स्विटजरलैंड जैसे देशों ने हंगरी में सोवियत दमन के खिलाफ ओलंपिक का बहिष्कार कर दिया। स्वेज नहर विवाद को लेकर मिस इराक और लेबनान जैसे मध्य पूर्व के देशों ने 1956 के मेलबर्न ओलंपिक का बहिष्कार कर दिया। तोक्यो ओलंपिक 1964 में इंडोनेशिया और उत्तर कोरिया ने कुछ विवादों को लेकर खेलों का बहिष्कार किया तो दक्षिण अफ्रीका को नस्लपरक नीतियों के कारण प्रतिबंध झेलना पड़ा।
इसके चार साल बाद मेक्सिको में हुए खेलों के दौरान खूंरेजी का दर्दनाक मंजर देखने को मिला। छात्रों ने ओलंपिक के दस दिन पहले सरकार विरोधी प्रदर्शन किये और मेक्सिको की सेना ने उन पर गोलियां दाग दी। इसमें 200 से ज्यादा छात्र मारे गए। म्युनिख में 1972 ओलंपिक पर भी खून के छींटे पड़े। फलस्तीन समर्थक ब्लैक सेप्टेंबर्रं संगठन के कार्यकर्ता सीमा के भीतर पहुंच गए और 11 इसाइली खिलाड़ियों की हत्या कर दी।
ओलंपिक खेलों के इतिहास में बहिष्कार की सबसे बड़ी घटना 1980 के मास्को ओलंपिक में देखने को मिली जब अमेरिका की अगुआई में 62 देशों ने अफगानिस्तान में सोवियत आक्रमक के खिलाफ खेलों में भाग नहीं लिया। अमेरिका को उसी की तर्ज पर जवाब देते हुए रूस के नेतृत्व में पूर्वी ब्लाक ने 1984 के लास एंजीलिस खेलों का बहिष्कार किया।
ओलंपिक मशाल रिले की बात करें तो आधुनिक ओलंपिक की पहली मशाल रिले 1936 के बर्लिन ओलंपिक में शुरू हुई जिसमें 3300 से ज्यादा धावकों ने 3190 किलोमीटर का फासला तय किया। चार बरस पहले एथेंस ओलंपिक 2004 में पहली वैश्विक मशाल रिले हुई जिसमें मशाल 27 देशों के 34 शहरों में घूमी।
मशाल को लेकर हाल फिलहाल पहला विवाद 2000 के सिडनी ओलंपिक में मशाल प्रज्ज्वलन समारोह के दौरान खड़ा हुआ जब एक यूनानी, आस्ट्रेलियाई लड़की से मशाल अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य की 11 वर्षीय बेटी को सौंपी गई। इटली के तूरिन में 2006 में शीतकालीन ओलंपिक की मशाल रिले के दौरान रूट चार बार बदलना पड़ा।
प्रदर्शनकारी अमेरिकी शीतल पेय कंपनी कोका कोला के ओलंपिक का प्रायोजक बनने और तूरिन से फ्रांस के बीच हाई स्पीड रेलवे लाइन डालने के खिलाफ थे।
बीजिंग ओलंपिक की मशाल के खिलाफ सबसे पहला मोर्चा ताइवान ने खोला। स्वशासित ताइवान ने कहा कि मशाल उसकी धरती पर कदम नहीं रख सकती। मशाल को। 37 000 किलोमीटर के सफर में हांगकांग पहुंचने से पहले ताइवान में रूकना था।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने यूनान में मशाल प्रज्ज्वलन समारोह में भी बाधा डालने की कोशिश की। मशाल के वैश्विक सफर में लगातार व्यवधान आ रहे हैं।
लिहाजा बीजिंग ओलंपिक 2008 को लेकर दुनिया भर में हो रहे तिब्बत समर्थकों के प्रदर्शन कोई अपवाद नहीं है। तिब्बत में चीन के मानवाधिकार रिकार्ड का हवाला देते हुए यूनान लंदन और पेरिस में अब तक मशाल रिले का जबर्दस्त विरोध हो चुका है। 1936 के बर्लिन ओलंपिक के दौरान जर्मनी पर हिटलर की अगुआई में नाजियों का शासन था। कुछ यहूदी खिलाड़ियों ने इस ओलंपिक का बहिष्कार किया।
ओलंपिक इतिहास के पन्ने पलटें तो बहिष्कार की कई घटनायें इसमें दर्ज हैं। ब्रिटेन से आजादी नहीं मिलने के खिलाफ आयरलैंड ने लंदन ओलंपिक का बहिष्कार किया था। वहीं अमेरिकी टीम ने उद्घाटन समारोह में किंग एडवर्ड सप्तम को अपना ध्वज देने से इंकार कर दिया था। शीतयुद्ध के दौरान सोवियत खिलाड़ी 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में सिर्फ स्पर्धाओं के दौरान भागीदारी के लिये आये उन्होंने उदघाटन समारोह में भाग नहीं लिया।
यही नहीं हालैंड स्पेन और स्विटजरलैंड जैसे देशों ने हंगरी में सोवियत दमन के खिलाफ ओलंपिक का बहिष्कार कर दिया। स्वेज नहर विवाद को लेकर मिस इराक और लेबनान जैसे मध्य पूर्व के देशों ने 1956 के मेलबर्न ओलंपिक का बहिष्कार कर दिया। तोक्यो ओलंपिक 1964 में इंडोनेशिया और उत्तर कोरिया ने कुछ विवादों को लेकर खेलों का बहिष्कार किया तो दक्षिण अफ्रीका को नस्लपरक नीतियों के कारण प्रतिबंध झेलना पड़ा।
इसके चार साल बाद मेक्सिको में हुए खेलों के दौरान खूंरेजी का दर्दनाक मंजर देखने को मिला। छात्रों ने ओलंपिक के दस दिन पहले सरकार विरोधी प्रदर्शन किये और मेक्सिको की सेना ने उन पर गोलियां दाग दी। इसमें 200 से ज्यादा छात्र मारे गए। म्युनिख में 1972 ओलंपिक पर भी खून के छींटे पड़े। फलस्तीन समर्थक ब्लैक सेप्टेंबर्रं संगठन के कार्यकर्ता सीमा के भीतर पहुंच गए और 11 इसाइली खिलाड़ियों की हत्या कर दी।
ओलंपिक खेलों के इतिहास में बहिष्कार की सबसे बड़ी घटना 1980 के मास्को ओलंपिक में देखने को मिली जब अमेरिका की अगुआई में 62 देशों ने अफगानिस्तान में सोवियत आक्रमक के खिलाफ खेलों में भाग नहीं लिया। अमेरिका को उसी की तर्ज पर जवाब देते हुए रूस के नेतृत्व में पूर्वी ब्लाक ने 1984 के लास एंजीलिस खेलों का बहिष्कार किया।
ओलंपिक मशाल रिले की बात करें तो आधुनिक ओलंपिक की पहली मशाल रिले 1936 के बर्लिन ओलंपिक में शुरू हुई जिसमें 3300 से ज्यादा धावकों ने 3190 किलोमीटर का फासला तय किया। चार बरस पहले एथेंस ओलंपिक 2004 में पहली वैश्विक मशाल रिले हुई जिसमें मशाल 27 देशों के 34 शहरों में घूमी।
मशाल को लेकर हाल फिलहाल पहला विवाद 2000 के सिडनी ओलंपिक में मशाल प्रज्ज्वलन समारोह के दौरान खड़ा हुआ जब एक यूनानी, आस्ट्रेलियाई लड़की से मशाल अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य की 11 वर्षीय बेटी को सौंपी गई। इटली के तूरिन में 2006 में शीतकालीन ओलंपिक की मशाल रिले के दौरान रूट चार बार बदलना पड़ा।
प्रदर्शनकारी अमेरिकी शीतल पेय कंपनी कोका कोला के ओलंपिक का प्रायोजक बनने और तूरिन से फ्रांस के बीच हाई स्पीड रेलवे लाइन डालने के खिलाफ थे।
बीजिंग ओलंपिक की मशाल के खिलाफ सबसे पहला मोर्चा ताइवान ने खोला। स्वशासित ताइवान ने कहा कि मशाल उसकी धरती पर कदम नहीं रख सकती। मशाल को। 37 000 किलोमीटर के सफर में हांगकांग पहुंचने से पहले ताइवान में रूकना था।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने यूनान में मशाल प्रज्ज्वलन समारोह में भी बाधा डालने की कोशिश की। मशाल के वैश्विक सफर में लगातार व्यवधान आ रहे हैं।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:20 [IST]
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