एबा ने प्रतियोगिता ज्यूरी द्वारा इस बाउट की समीक्षा करने के बाद बयान में कहा कि भारतीय मुक्केबाज ने केवल तीसरे दौर में ही नौ फाउल किये थे। हालांकि रेफरी ने केवल एक चेतावनी दी। इसमें कहा गया कि दूसरे दौर में 02 मिनट 38 सेकंड के समय भारत के मुक्केबाज ने जानबूझकर अपना गमशील्ड (मुक्केबाजों द्वारा मुंह की सुरक्षा के लिए प्रयुक्त उपकरण) थूका। हालांकि रेफरी ने कोई चेतावनी नहीं दी। इन निष्कर्षों के आधार पर ज्यूरी सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्पेंस को चार अंक देने का फैसला किया जिससे वह विजेता हो जाते हैं।
एबा ने कहा कि एबा तकनीकी एवं प्रतिस्पर्धा नियम 12.1.9 के आधार पर रेफरी को भारतीय मुक्केबाज को कम से कम दो चेतावनी देनी चाहिए थीं। इसमें कहा गया कि अमेरिकी मुक्केबाज को कम से कम चार अंक और मिलने चाहिए थे। इसलिए अंतिम स्कोर अमेरिकी मुक्केबाज के पक्ष में 15-13 होना चाहिए। विरोध को स्वीकार किया जाता है और अमेरिकी मुक्केबाज स्पेंस को विजेता घोषित किया जाता है।
विश्व चैंपियनशिप में विजेंदर के बाद एकमात्र कांस्य पदक विजेता विकास को देश की ओर से पदक की बड़ी आस माना जा रहा था। गौरतलब है कि लंदन ओलंपिक में मुक्केबाजी स्पर्धाएं कई बार विवादों में रहीं हैं और एबा की स्कोरिंग प्रणाली की कड़ी आलोचना हुई है। भारत भी सुमित सांगवान (81 किग्रा) को मिली हार के फैसले पर विरोध जता चुका है लेकिन भारत की अपील खारिज कर दी गई थी।