बैंगलोर। क्रिकेट को जेंटलमैन गेम से खिलाडि़यों की मंडी बनाने वाले आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग होने का मुद्दा भले ही पहली बार आया हो लेकिन कई विवादों के कारण क्रिकेट की यह लीग पहले भी दागदार हो चुकी है। श्रीसंत थप्पड़ विवाद ने तो पहले ही संस्करण में गलत कारणों से इस लीग को चर्चा में ला दिया, पर एक के बाद एक इससे जो विवाद जुड़ते गये। उससे तो यही कहा जा सकता है कि आईपीएल अब खेल को बढ़ावा देने का नहीं बल्कि विवादों का एक अड्डा बन चुका है। जिसकी कड़ी में टीम इंडिया के लिए खेल चुके तेज गेंदबाज एस श्रीसंत का भी नाम आया है।
स्पॉट फिक्सिंग
स्पॉट फिक्सिंग, फिक्सिंग का एक ऐसा तरीका है, जिसमें पूरा मैच फिक्स न होकर, खेल के कुछ हिस्से पहले से ही निश्चित कर दिये जाते हैं। इसे हम ऐसे समझ सकते हैं कि एक गेंदबाज को पहले ही पता होता है कि उसे एक निर्धारित ओवर में कितने रन देने हैं या फिर कितनी नोबाल करनी हैं। कई बार एक गेंदबाज को यह भी बताया जाता है कि आपको अपने एक ओवर में कितने रन देने हैं।
कहां से हुई क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग की शुरूआत
क्रिकेट की किताब में स्पॉट फिक्सिंग का काला अध्याय उस समय जुड़ा जब पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने तीन टेस्ट मैच खेलने के लिए इंग्लैंड का दौरा किया। इस दौरे में पाक के कप्तान सलमान बट थे। इसी सीरीज के एक मैच के दौरान एक विशेष मौके पर पाकिस्तान टीम के तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर ने जानबूझकर नोबाल की। जिसने मैच के रिजल्ट पर असर डाला। स्कॉटलैंड यार्ड पुलिस की जांच में पता चला कि इस फिक्सिंग में पाक कप्तान सलमान बट भी शामिल थे। आरोप साबित होने पर सलमान बट को दस साल के लिए, मोहम्मद आसिफ और मोहम्मद आमिर को पांच पांच साल के लिए क्रिकेट खेलने से प्रतिबंधित कर दिया गया।