छत्तीसगढ़ में पैसों के अभाव में हॉकी टूर्नामेंट स्थगित
बीबीसी संवाददाता, रायपुर
जिस भारत में ध्यानचंद जैसे हॉकी खिलाड़ी पैदा हुए हों वहां पैसों की कमी की वजह से हॉकी टूर्नामेंट स्थगित करना पड़े, बहुत अफ़सोस की बात है. भारत में एक तरफ़ जहाँ क्रिकेट के खेल में अरबों रुपए ख़र्च होते हैं और जहाँ क्रिकेट के खिलाड़ियों को लगभग भगवान् तुल्य बना दिया गया हो, उसी देश के राष्ट्रीय खेल हॉकी की उपेक्षा की बातें अब किसी को कचोटती भी नहीं. अब किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ता कि हॉकी या उससे जुड़े खिलाड़ियों का क्या हाल है.
ख़ास तौर पर एक तरफ़ विश्व कप क्रिकेट के आयोजन की धूम और ख़िताब जीतने के बाद खिलाड़ियों के ऊपर उपहारों की बौछार वहीँ दूसरी तरफ़ छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में मंगलवार पांच अप्रैल से आयोजित होने वाले ऑल इंडिया नेहरू मेमोरियल हॉकी टूर्नामेंट को इसलिए स्थगित कर दिया गया है क्योंकि इसे आयोजित करने के लिए पैसों का इंतज़ाम नहीं हो पाया.
देश में इस टूर्नामेंट का आयोजन वर्ष 1913 से होता आ रहा है. मगर जैसे जैसे लोगों का रुझान क्रिकेट की तरफ़ होता जा रहा है वैसे वैसे हॉकी का हाल और बुरा होता जा रहा है. इस आयोजन में देश की 32 टीमों को हिस्सा लेना था मगर आयोजन समिति के लोग उतने पैसों का इंतज़ाम नहीं कर पाए जिससे इन टीमों के आने जाने का ख़र्च भी उठाया जा सके.
आयोजन समिति के लोग पैसों के लिए अब निजी संस्थानों के सामने हाथ फैलाने को मजबूर हो गए हैं. बावजूद इसके उतनी रक़म का इंतज़ाम नहीं हो पाया है जिससे इस टूर्नामेंट का आयोजन किया जा सकता था. ऑल इंडिया नेहरू मेमोरियल हॉकी टूर्नामेंट की आयोजनकर्ता एथलेटिक क्लब के सचिव मोईन बारी के अनुसार सरकार की तरफ़ से जो मदद इस आयोजन के लिए मिलती है वह बहुत थोड़ी है.
इस टूर्नामेंट के आयोजन में 15 लाख रूपए का ख़र्च है जबकि राज्य सरकार की तरफ़ से महज़ तीन लाख रूपए और खेल विभाग की तरफ़ से 75 हज़ार रूपए मिले हैं. रायपुर नगर निगम ने भी इसके आयोजन में थोड़ी मदद करने की कोशिश की लेकिन यह सबकुछ नाकाफ़ी साबित हुआ.
कहा जा रहा है कि भारतीय हॉकी फ़ेडरेशन और हॉकी इण्डिया के आपसी विवाद के चलते रेल मंत्रालय ने टूर्नामेंट में भाग लेने आ रही टीमों के खिलाड़ियों को किराए में छूट देने से इनकार कर दिया जिसके कारण आयोजन समिति को प्रतियोगिता में भाग लेने आ रही टीमों के खिलाड़ियों के लिए पूरे किराए का इंतज़ाम करना था जो आयोजक नहीं कर पाए.
वैसे उम्मीद की जा रही है कि भारतीय हॉकी फ़ेडरेशन और हॉकी इण्डिया का विवाद इस महीने तक सुलझ जाएगा. यही वजह है कि इस प्रतियोगिता की अगली तिथि एक महीने बाद की रखी गई है. अगर विवाद नहीं सुलझता है, अगर रेलवे से खिलाड़ियों को छूट नहीं मिलती है और अगर आयोजन समिति के लोग निजी संस्थानों से मदद इकठ्ठा करने में कामयाब नहीं होते हैं तो अगले माह भी इसका आयोजन हो पाएगा या नहीं यह कहना मुश्किल है.
लेकिन आयोजन समिति नें राजधानी रायपुर के सुभाष स्टेडियम में प्रतियोगिता को आयोजित करने के लिए मैदान की तैयारी में 50 हज़ार रूपए पहले ही ख़र्च कर दिए हैं.
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