'मेरा काम क्रिकेट खेलना है, सब कुछ अल्लाह की इच्छा के अनुसार है'
नई दिल्ली। सबीना पार्क में हुए वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज के आखिरी मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए फवाद आलम ने अपने करियर का पांचवां टेस्ट शतक बनाया। पहले दिन ऐंठन के कारण रिटायर्ड हर्ट होने के बाद आलम ने 76 रन बनाकर अपनी पारी फिर से शुरू की। उन्होंने कप्तान बाबर आजम के पारी घोषित करने से पहले पाकिस्तान को 302/9 तक पहुंचाने के लिए नाबाद 124 रनों की शानदार पारी खेली।
फवाद आलम पांच टेस्ट शतक बनाने वाले एशिया के सबसे तेज टेस्ट बल्लेबाज भी बने। उन्होंने चेतेश्वर पुजारा के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए, केवल 22 पारियों में पांच शतक जमाए। पुजारा ने 24 पारियों में 5 शतक लगाए थे। आलम के इस प्रदर्शन ने उन्हें पूरी क्रिकेट बिरादरी से प्रशंसा दिलाई। आलम एक दशक से अधिक समय तक राष्ट्रीय टीम से बाहर रहे। हालांकि, उनके फॉर्म ने लोगों को उन्हें टीम से बाहर करने के बोर्ड के फैसले पर सवाल खड़ा कर दिया। यह पूछे जाने पर कि जिनकी वजह से आप बाहर हुए थे वो आज प्रशंसा कर रहे हैं तो आपको कैसा लगा? आलम ने कहा कि उनका काम क्रिकेट खेलना और राष्ट्रीय टीम के लिए प्रदर्शन करना है।

सब कुछ अल्लाह की इच्छा के अनुसार है
उन्होंने कहा, "मेरा काम क्रिकेट खेलना है। अगर मैं उन चीजों का पर ध्यान देना शुरू कर दूं कि काैन क्या कह रहा है तो मेरा क्रिकेट वहीं रुक जाएगा। मैं सिर्फ अल्लाह का शुक्रगुजार हूं और कुछ नहीं। सब कुछ अल्लाह की इच्छा के अनुसार है, और किसी भी चीज पर हमारा कोई अधिकार नहीं है। मैं बस एक सीधे रास्ते पर चलने की कोशिश करता हूं। चीजें हर किसी के करियर में होती हैं। हर किसी के पास उतार-चढ़ाव होता है। अगर आप सही रास्ते पर चलते हैं, तो अच्छी चीजें होती हैं। अगर लोग मेरी तारीफ कर रहे हैं तो यह मेरे लिए सम्मान की बात है।''

अल्लाह ने मुझे इतने सारे रिकॉर्ड दिए
टेस्ट क्रिकेट के मैदान में वापसी के बाद से आलम पाकिस्तान टीम का एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी रहे हैं। जब उन्हें राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह नहीं मिली, तो आलम घरेलू सर्किट में रनों का ढेर लगाने के लिए वापस चला गया। घरेलू क्रिकेट में उनके सराहनीय प्रदर्शन ने राष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी का मार्ग प्रशस्त किया। घरेलू क्रिकेट के जरिए टीम में जगह बनाने पर आलम ने कहा, "मेरे पास घरेलू क्रिकेट में बहुत सारे रिकॉर्ड हैं। मैं ज्यादातर आंकड़ों में हनीफ मोहम्मद के बाद दूसरे नंबर पर हूं। मैं कैसे कह सकता हूं कि मेरी जिंदगी के आखिरी 10 से 11 साल बर्बाद हो गए? अल्लाह ने मुझे इस दौरान इतने सारे रिकॉर्ड दिए हैं और मुझे इसके लिए आभारी होना चाहिए।''

अगर मैं अतीत में राष्ट्रीय टीम में होता...
उन्होंने आगे कहा, ''हो सकता है कि अगर मैं अतीत में राष्ट्रीय टीम में होता, तो मैं वह सब कुछ हासिल नहीं कर पाता जो मैंने आखिरकार किया। अल्लाह किसी के लिए जो कुछ भी करता है वह अच्छा है। हम अल्लाह से भी प्रार्थना करते हैं कि वह हमें वह दे जो हमारे लिए अच्छा हो और मुझे लगता है कि यह वास्तव में मेरे लिए अच्छा था।"
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