डैरेन सैमी ने पूछा- भारत ने फेयर एंड लवली को क्यों अपनाया, ये भेदभाव पैदा करती है
नई दिल्ली। जातिवाद पर पिछले कुछ दिनों से दुनियाभर में चर्चा हुई है। विशेष रूप से अफ्रीकी मूल के व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड के निधन के बाद, जिसे यूएसए की पुलिस ने मार दिया था। इस घटना ने दुनिया भर में एक आक्रोश को जन्म दिया। कुछ समय के लिए एक हैशटैग 'ब्लैकलाइव्समैटर' भी चला। यहां तक कि क्रिकेटरों ने भी इस मामले पर बात की है और लोगों से इसके खिलाफ आवाज उठाने का आग्रह किया है। जोफ्रा आर्चर को न्यूजीलैंड में एक टेस्ट मैच के दौरान नस्लीय टिप्पणी का सामना करना पड़ा था। यहां तक कि वेस्टइंडीज के दिग्गज ऑलराउंडर डैरेन सैमी भी इस मामले पर काफी मुखर रहे हैं। अब उन्होंने भारत में बिकने वाले फेयर एंड लवली प्राॅडक्ट पर सवाल उठाए हैं।
सैमी ने यह कहने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि फेयर एंड लवली रंग के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव करती है। सैमी ने आउटलुक द्वारा भारत से पूछा, ''भारत जैसा देश जहां नस्ल और रंग में इतनी विविधता है उसने फेयर लवली जैसे उत्पाद को आखिर क्यों स्वीकारा जो इतना भेदभाव पैदा करती है। आपका विज्ञापन फेयर एंड लवली कहता है कि केवल गोरे लोग ही प्यारे होते हैं। यह किसके लिए खड़ा है, यह उपनिवेशवाद पर संकेत देता है।"
सैमी ने आगे कहा, ''हमें लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करने की आदत है और उन्हें यह समझाने की जरूरत है कि अलग-अलग संस्कृतियां किस तरह से नस्लवाद को देखते या उनका सम्मान करते हैं। इशांत शर्मा ने आईपीएल में मुझे कालू कहकर पुकारा हालांकि उन्होंने मुझे यह प्यार के साथ कहा था लेकिन किसी भी अपमानित किए जाने वाले शब्द के बारे में आपको पता होना चाहिए। मैंने उनसे इसपर बात भी की, लेकिन अब सब सही है। इशांत अभी भी मेरे भाई हैं और जब भी वह दोबारा मिलेंगे तो उन्हें वह गले लगाना पसंद करेंगे
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