
जब अंजलि भागवत ने जीता था चैम्पियन्स ऑफ चैम्पियन
अगस्त 2002 में म्यूनिख में आयोजित किये गये आईएसएसफ चैम्पियन्स ट्रॉफी के 10मीटर एयर राइफल प्रतियोगिता में दुनिया की सबसे बेहतरीन महिला निशानेबाज हिस्सा ले रही थी जिसे भारत की अंजलि भागवत ने जीता। अंजलि भागवत जीत के बाद फायरिंग रेंज छोड़कर जा ही रही थी कि उन्हें सूचित किया गया कि एक और प्रतिस्पर्धा खेली जाने वाली है जिसमें 5 बेस्ट महिला और पुरुष निशानेबाज शामिल होंगे और चैम्पियन्स ऑफ चैम्पियन्स का निर्णय इसके आधार पर किया जायेगा। यह प्रतियोगिता आधिकारिक तो नहीं थी लेकिन काफी रोमांचक थी और जीतने वाले को 1000 डॉलर का ईनाम मिलना था। अंजलि भागवत ने इस प्रतिस्पर्धा में जीत हासिल की और आज भी जब उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि के बारे में सवाल किया जाता है तो वो ओलंपिक फाइनल में पहुंचने, विश्वकप जीतने और दुनिया की नंबर 1 निशानेबाज बनने से ऊपर इसे रखती हैं।
इस घटना ने उस तथ्य की और भी ज्यादा पुष्टि कर दी जिसमें यह आशंका जताई जा रही थी कि 10 मीटर एयर राइफल प्रतिस्पर्धा में पुरुषों के मुकाबले महिलायें ज्यादा मजबूत प्रदर्शन करती हैं। इस बात की गवाही आंकड़े भी देते हैं। इसे आप इस तरह से समझिये कि समर ओलंपिक्स में आयोजित किये जाने वाले इतने सारे खेलों में एयर राइफल उन दो प्रतियोगिताओं में से एक हैं जिसमें महिला खिलाड़ी पुरुषों के मुकाबले लगातार बेहतर प्रदर्शन करती हैं, फिर चाहे वो पुरुषों के खिलाफ खेल रही हो या फिर समान पैमाने पर प्रतिस्पर्धा कर रही हों।

जानें क्या कहते हैं आंकड़े
2019 के बाद से अब तक खेले गये 4 आईएसएसएफ विश्व कप के आंकड़ों पर नजर डालें तो महिला निशानेबाजों ने पुरुषों के मुकाबले दोगुने सर्वोच्च स्कोर हासिल किये हैं। फाइनल मुकाबलों में 4 में से 3 बार महिला निशानेबाजों ने सर्वोच्च स्कोर हासिल किया। इतना ही नहीं 2019 के आखिरी विश्व कप में महिला शूटर ने न सिर्फ क्वालिफाइंग मैच में बल्कि फाइनल में भी सर्वोच्च अंक हासिल किये। यही प्रदर्शन हमें 2019 के अमेरिकी खेलों और एशियन चैम्पियनशिप में भी देखने को मिला। कुछ इसी तरह से 2019 और 2020 के यूरोपियन चैम्पियन्शिप और 2021 के विश्व कप में पुरुष कैटेगरी के मुकाबले ज्यादा अंक हासिल किये और क्वालिफिकेशन राउंड से लेकर फाइनल तक सबसे ज्यादा अंक हासिल करने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी महिलाओं के नाम है। गौरतलब है कि हम 2019 के बाद के आंकड़ों पर जोर इस वजह से दे रहे हैं क्योंकि 2018 तक महिलाओं को क्वालिफाई करने के लिये सिर्फ 40 शॉट मिलते थे जबकि पुरुषों के पास 60 शॉटस होते थे लेकिन 2019 में इस नियम में बदलवा हुआ और अब दोनों के पास बराबर मौके होते हैं।

इस कारण पुरुषों को कड़ी टक्कर देती हैं महिला निशानेबाज
मैड्रियड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डैनियल मोन लॉपेज ने इसको लेकर अपना एक पेपर भी पब्लिश किया है जिसमें उन्होंने ओलंपिक की शूटिंग में महिलाओं के प्रदर्शन में बदलाव और प्रभावों के बारे में बात की है। लोपेज स्पैनिश ओलंपिक ट्रैप टीम के लिये कोच के तौर पर भी काम कर चुके हैं और उन्होंने 2016 से 2018 के यूरोपियन चैम्पियनशिप के दौरान महिला और पुरुष निशानेबाजों के अंकों की तुलना की और बताया कि जहां पुरुषों का मीडियन स्कोर 10.38 होता है तो वहीं पर महिलाओं का 10.39 रहा है जिसमें खासा अंतर नहीं है। लेकिन आमतौर पर महिला-पुरुष के खेल में 5-12 प्रतिशत का अंतर होता है लेकिन उसके बावजूद दोनों में कुछ खास अंतर नहीं है। लोपेज का मानना है कि ऐसा महिला और पुरुष की शारीरिक संरचना में मिलने वाले अंतर की वजह से होता है। एयर राइफल में निशाना लगाने के लिये शरीर के ऊपरी भाग का स्थिर होना जरूरी है जो कि महिलाओं की शारीरिक संरचना के चलते इस खेल में मिलता है।


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