रेसलिंग: फोगाट का अभियान समाप्त, रवि ने किया सिल्वर से संतोष, दीपक पुनिया को बड़ी निराशा
नई दिल्लीः रेसलिंग में 5 अगस्त का दिन भारत के लिए बहुत अच्छा नहीं रहा। भारत को आज हर मोर्चे पर रेसलिंग में मात मिली, केवल रवि कुमार का सिल्वर मेडल अच्छी खबर था लेकिन यह पदक कल यानी 4 अगस्त को ही पक्का हो गया, आज रवि फाइनल मैच में इसको गोल्ड में तब्दील नहीं कर पाए। वे आरओसी के पहलवान से फाइनल में 4-7 से हारे। यहां तक भी अंशु मलिक भी रेपचजे के पहले दौर में ही बाहर हो गईं।
दूसरी ओर ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में दीपक पुनिया से कम से कम कांस्य की उम्मीद थी लेकिन वे अंतिम सेंकेडों में चूक कर गए और 2-4 से यह मैच हार गए। उन्होंने अंतिम 5 सेंकेड होने से पहले लीड बना रखी थी लेकिन मुकाबला हाथ से निकल गया। दीपक को इस हार का मलाल जरूर होगा क्योंकि वे आसानी से अंतिम क्षणों में यह मैच जीत सकते थे पर भारत के हाथ से एक मेडल निकल गया। अगर यह मेडल आता तो भारत ओलंपिक में अपने सबसे ज्यादा मेडल रिकॉर्ड की बराबरी कर लेता।
भारत को फिलहाल टोक्यो ओलंपिक से 5 मेडल मिले हैं जबकि सबसे ज्यादा मेडल का रिकॉर्ड लंदन गेम्स 2012 के नाम है, तब भारत ने 6 मेडल जीते थे। तब भी रेसलिंग में भारत को सिल्वर मिला था जो सुशील कुमार ने दिलाया था।
इससे पहले स्टार पहलवान विनेश फोगट से मेडल की काफी उम्मीदें थी, लेकिन वे बिना पदक के टोक्यो ओलंपिक से वापसी करेंगी। विनेश महिलाओं के 53 किग्रा वर्ग में शीर्ष वरीयता प्राप्त रेसलर थीं लेकिन वे रेपचेज दौर से बाहर हो गईं क्योंकि उनको क्वार्टरफाइनल दौर में हराने वाली बेलारूस की वेनेसा कलादज़िंस्काया सेमीफाइनल मुकाबले में चीन की कियान्यू पैंग से हार गईं।
अगर कलादज़िंस्काया फाइनल में पहुंचती तो विनेश को कांस्य पदक के लिए लड़ने का मौका मिलता। वैसे तो 26 वर्षीय ने इस साल की शुरुआत में यूक्रेन में कलादज़िंस्काया को हराया था। लेकिन मौजूदा यूरोपीय चैंपियन ने अपनी रणनीति को पूरी तरह से बदल दिया और विनेश को बेलारूसी के हेडलॉक से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला।
जब भी वह अपने प्रतिद्वंद्वी से पीछे होती तो विनेश कलादज़िंस्काया को अपने घुटनों से नीचे नहीं धकेल सकती थी, साथ ही बेलारूसी ने अपने पैरों को सीधा रखने के लिए बहुत ताकत दिखाई। 26 वर्षीय भारतीय ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी लेकिन कलादज़िंस्काया का डिफेंस नहीं टूटा। यहां तक कि विनेश का फेमस डबल लेग आक्रमण भी फेल हो गया, जिसका उपयोग विनेश ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पिन करने की स्थिति में करने के लिए किया है।
क्या होता है रेपचेज?
रेपचेज दौर तब आता है जब आपको हराने वाला पहलवान फाइनल में पहुंच जाता है। तब उस पहलवान से पहले दौर में हारने वाले पहलवान को दूसरे दौर में हारने वाले से मैच करना होता है। फिर इस मैच के विजेता का मुकाबला सेमीफाइनल में हारने वाले पहलवान से कांस्य पदक के लिए होता है। भारत के सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त और साक्षी मलिक इसी तरह ब्रॉन्ज मेडल जीत चुके हैं।
इस मुकाबले से पहले, विनेश ने रियो ओलंपिक की कांस्य विजेता और छह बार की विश्व पदक विजेता सोफिया मैटसन को 7-1 से जीत के साथ हराया था। विनेश रियो खेलों में भी पदक जीतने की प्रबल दावेदारों में से एक थीं, लेकिन चीन की सुन यानन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मुकाबले में चोटिल होने के कारण उनका अभियान समाप्त हो गया।
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