गजब : 58 साल की उम्र में जीता ब्राॅन्ज मेडल, कहा- अगली बार गोल्ड मेडल जीतूंगा
नई दिल्ली। उम्र मायने नहीं रखती, मायने यह रखता है कि आप अपने लक्ष्य के लिए कितने अटल हो। हिम्मत हो कुछ कर गुजरने की तो फिर कुछ भी मुश्किल नहीं है। यह बात साबित कर दी है एक 58 साल के निशानेबाज ने, जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में ब्राॅन्ज मेडल जीता है। यह हैं कुवैत के अब्दुल्ला अल-रशीदी। अब्दुल्ला ने इतनी ज्यादा उम्र में मेडल हासिल कर सबको हैरान कर दिया है। हालांकि अब उनका लक्ष्य अगले ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का है।
अगर वो अगला ओलंपिक खेलते हैं तो उनकी उम्र 60 के पार होगी। इतनी उम्र में दम दिखाना काबिलेतारीफ है। अब्दुल्ला ने ओलिंपिक सूचना सेवा पर बात करते हुए कहा, 'मैं 58 साल का हूं। मैं यहां सबसे उम्रदराज वाला शूटर हूं तो ऐसे में मेरे लिए ब्राॅन्ज मेडल जीतना भी किसी गोल्ड मेडल से कम नहीं है। मैं इस मेडल से खुश हूं, लेकिन भरोसा है कि मैं 2024 में पेरिस में होने वाले ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत पाऊंगा।''
अब्दुल्ला ने आगे कहा, ''अगले ओलंपिक तक मैं उस समय 61 साल का हो जाऊंगा और स्कीट के साथ ट्रैप में भी उतरूंगा।'' बता दें कि इस इवेंट में अमेरिका के विंसेट हेनकॉक ने गोल्ड मेडल जीता और वे तीन गोल्ड जीतने वाले पहले स्कीट शूटर बने। अलरशीदी ने पहली बार 1996 अटलांटा ओलिंपिक में अपना दम दिखाया था। फिक उन्होंने रियो ओलिंपिक 2016 में हिस्सा लिया था, जहां उन्होंने ब्राॅन्ज मेडल जीता, लेकिन उस समय स्वतंत्र खिलाड़ी के तौर पर उतरे थे क्योंकि तब कुवैत पर अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति ने प्रतिबंध लगा रखा था। उस समय अल रशीदी आर्सनल फुटबॉल क्लब की जर्सी पहनी हुई थी। तब अब्दुल्ला काफी निराश थे। उन्हें दुख था कि वो रियो ओलंपिक में अपने देश का झंडा नहीं लहरा सके।
उन्होंने कहा, ''मैं खुश था तब, लेकिन कुवैत का झंडा नहीं फहराने से दुखी। मेरा सिर नीचे था क्योंकि मैं चाहता था कि मेरे देश का झंडा मेरे हाथ में होता, लेकिन मुझे ओलंपिक धव्ज थामना पड़ा था। दिलचस्प बात यह है कि टोक्यो ओलिंपिक में उनके बेटे तलाल भी शूटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। बाप-बेटे की जोड़ी दूसरी बार ओलिंपिक में नजर है। उनका बेटा ट्रेप में हिस्सा लेता है।
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