Tokyo Olympics : काैन है पहलवान रवि दहिया, जिसने खतरे में डाला सुशील का रिकाॅर्ड

स्पोर्ट्स डेस्क(नोएडा) : टोक्यो ओलंपिक में भारत के खाते में चार मेडल आ चुके हैं। चाैथा मेडल सोनीपत के पहलवान रवि दहिया ने पक्का किया जिन्होंने 57 किग्रा भारवर्ग में कजाकिस्तान के नूरीस्लाम सनायेव को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। दहिया का नाम बहुत कम लोगों को पता था, लेकिन टोक्यो ओलंपिक में गजब का खेल दिखाकर उन्होंने अपनी पहचान दुनियाभर में बना ली है। आखिर काैन है रवि दहिया, क्या हैं इसकी उपलब्धियां, आइए जानें-

रवि दहिया हरियाणा से हैं। उन्होंने सोनीपत जिले के नहरी गांव में 12 दिसंबर 1997 को जन्म लिया था। दहिया का खानदान भी पहलवानी करने का शाैकीन था। उनके पिता का नाम राकेश दहिया है जो खुद गावों में जाकर पहलवानी किया करते थे, लेकिन उन्हें ऊंचे स्तर पर हाथ आजमाने का माैका नहीं मिला। कारण था आर्थिक तंगी का आना, लेकिन उनके बेटे ने पिता का सपना पूरा कर दिया है। दहिया के गुरू सतपाल हैं जो खुद फेमस रेसलर रहे हैं। सतपाल वही हैं जो छत्रसाल स्टेडियम में पहलवानों को ट्रेनिंग देते हैं। 5 फीट 7 इंट की लंबाई वाले रवि दहिया अपनी कैटेगरी में सबसे लंबे पहलवानों में से एक हैं।

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खतरे में डाला सुशील का रिकाॅर्ड

खतरे में डाला सुशील का रिकाॅर्ड

फिलहाल तो नामी पहलवान सुशील कुमार जेल में हवा खा रहे हैं, लेकिन रवि दहिया उनके रिकाॅर्ड को तोड़ने से अब एक कदम ही दूर हैं। रिकाॅर्ड है भारत की ओर से पहलवानी में बेस्ट प्रदर्शन देने का। दरअसल, सुशील कुमार ने 2012 लंदन ओलंपिक में 66 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता था। वह ओलंपिक में ऐसा करने वाले इकलाैते पहलवान थे, लेकिन अब रवि ने उनकी बराबरी कर ली है। बराबरी तो की, लेकिन उनसे आगे निकलने वाले भी हैं। अगर रवि फाइनल जीत जाते हैं तो वह कुश्ती में गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के इकलाैते पहलवान बन जाएंगे। हालांकि सुशील कुश्ती में दो ओलंपिक मेडल जीतने वाले इकलाैते पहलवान हैं। उन्होंने 2008 ओलंपिक में ब्राॅन्ज जीता था।

40 किलोमीटर दूर से आता था दूध

40 किलोमीटर दूर से आता था दूध

रवि दहिया ने अपनी ताकत यूं ही नहीं बढ़ाई है, इसके पीछे उनका बेहतर खानपान रहा चाहे उसके लिए कुछ भी करना पड़ जाए। यह इससे मालूम होता है कि जब वो छत्रसाल में ट्रेनिंग करते थे तो उनके पिता रोज 40 किलोमीटर दूरी तय कर उनके लिए दूध और फल लाते थे। इससे साबित होता है कि उनके पिता ने भी रवि को हीरा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। घर में आर्थिक तंगी भी रही, लेकिन फिर भी रवि के इरादे कभी फीके नहीं पड़े।

क्या हैं रवि की उपलब्धियां

क्या हैं रवि की उपलब्धियां

रवि ने 2015 में अपना लोहा मनवाया था, जब जूनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के 55 किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर मेडल पर कब्जा किया। तब वो चोटिल थे, लेकिन फिर भी पीछे नहीं हटे। हालांकि उस चोट ने उन्हें 2017 में परेशान करना शुरू किया जिस कारण वह खेल से कुछ समय के लिए दूर भी रहे थे। फिर रवि ने 2018 में वापसी की जब वर्ल्ड अंडर 23 रेसलिंग चैंपियनशिप में 57 किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर अपने नाम किया था। फिर 2019 में रवि दहिया ने वर्ल्ड चैंपियनशिप के सिलेक्शन में सीनियर रेसलर उत्कर्ष काले और ओलंपियन संदीप तोमर को हराया था। जब भारत में कोरोना ने पैर पसारे थे तो उससे ठीक पहले रवि ने मार्च में दिल्ली में हुई एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर उम्मीद जगा दी थी कि वो टोक्यो ओलंपिक में धाक जमाएंगे।

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Story first published: Wednesday, August 4, 2021, 18:39 [IST]
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