टोक्यो : भारत के योगेश कथुनिया ने जापान में चल रहे टोक्यो पैरालिंपिक के फाइनल में पुरुषों की डिस्कस थ्रो (F56) स्पर्धा में 44.38 मीटर का अपना सर्वश्रेष्ठ थ्रो दर्ज करके सिल्वर मेडल जीता। कथुनिया को केवल ब्राजील के विश्व-रिकॉर्ड धारक बतिस्ता डॉस सैंटोस क्लॉडनी ने टक्कर दी, जिन्होंने गोल्ड मेडल जीतने के लिए 45.59 मीटर का थ्रो दर्ज किया। क्यूबा के डियाज अल्दाना लियोनार्डो (43.36) तीसरे स्थान पर रहे।
कथुनिया ने फाउल के साथ शुरुआत की, लेकिन फिर 42.84 फेंके, जिसके बाद 43.55 का और भी बेहतर थ्रो आया। लेकिन उन्होंने अपने अंतिम थ्रो के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ बचाया, जब उन्होंने 44.38 मीटर का थ्रो दर्ज किया। टोक्यो पैरालिंपिक में यह भारत का अब तक का पांचवां मेडल है। चौबीस वर्षीय कथुनिया विश्व पैरा एथलेटिक्स चैम्पियनशिप, दुबई 2019 में ब्राॅन्ज मेडल जीत चुके हैं।
मेडल हासिल करने के बाद कथुनिया से सबका शुक्रिया किया। उन्होंने कहा, '' "मैं सिल्वर मेडल जीतने पर उत्साहित हूं। मैं साई, पीसीआई (भारत की पैरालंपिक समिति), और विशेष रूप से मेरी मां को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं।" योगेश कथुनिया नई दिल्ली के रहने वाले हैं। जब वह 8 साल के थे तो उनको लकवा का दौरा पड़ा था, जिसके परिणामस्वरूप उनके अंगों में बिगड़ा हुआ समन्वय था, लेकिन कथूनिया ने पैरा-एथलेटिक्स लिया और हाल ही में 2018 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया।
इससे पहले सोमवार को शूटिंग में अवनि लेखरा ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा। रविवार को, जिसे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया गया, तीन एथलीटों ने मेडल जीता। दिन की शुरुआत स्टार पैडलर भावनाबेन पटेल ने महिला एकल टेबल टेनिस वर्ग 4 में सिल्वर मेडल जीतने के साथ की थी।