युवा चुनौती के बीच टीम में कैसे बने रहें शिखर धवन ने बताया, सीनियर्स के लिए जबरदस्त उदाहरण
नई दिल्ली। भारतीय टीम में किसी भी खिलाड़ी के लिए अपनी जगह को पक्की करना बहुत ही मुश्किल का काम होता है। इसके लिए आपको लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होता है और दबाव में खुद को साबित करना होता है। जिस तरह से भारतीय टीम में एक के बाद एक युवा खिलाड़ी अपने जबरदस्त प्रदर्शन करके टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती दे रहे हैं उसने टीम के सीनियर खिलाड़ियों के लिए रास्ता काफी कठिन कर दिया है। आलम यह है कि अगर कोई सीनियर खिलाड़ी चोटिल होने की वजह से या फिर किसी व्यक्तिगत वजह से टीम से बाहर होता है तो उसकी जगह जो युवा खिलाड़ी मौका पा रहे हैं वो कुछ इस तरह का प्रदर्शन कर रहे हैं जोकि सीनियर खिलाड़ियों के लिए टीम में वापसी की राह को मुश्किल कर रहे हैं। लेकिन बतौर सीनियर खिलाड़ी किस तरह से आप टीम में वापसी करते हैं इसका जबरदस्त उदाहरण टीम के सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने पेश किया है।

जब शिखर के टी-20 भविष्य पर खड़ा हुआ सवाल
शिखर धवन ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीमित ओवर के मैच में और फिर इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में जबरदस्त प्रदर्शन किया था। बावजूद इसके उन्हें इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज में सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला। पहले मैच में शिखर धवन सिर्फ 4 रन बना सके लेकिन इसके बाद उन्हें बाकी के चार मैचों में प्लेइंग 11 में जगह नहीं मिली। ऐसे में सवाल उठने लगे थे कि टेस्ट मैच में पहले ही शिखर धवन को पिछले तीन साल से जगह नहीं मिल रही है और अब टी-20 वर्ल्ड कप से ठीक पहले धवन का टीम से बाहर होना किस बात का संकेत है।

इंग्लैंड के खिलाफ चार टी-20 में नहीं मिली टीम में जगह
इंग्लैंड के खिलाफ दूसरे टी-20 में शिखर धवन और रोहित शर्मा की जगह टीम के लिए सलामी बल्लेबाजी करने के लिए केएल राहुल और इशान किशन आए। केल मैच में जहां केएल शून्य पर आउट हो गए तो इशान ने 56 रनों की पारी खेली। वहीं तीसरे टी-20 में रोहित शर्मा के साथ केएल राहुल ने बल्लेबाजी की शुरुआत की और एक बार फिर से केएल शून्य के स्कोर पर उट हो गए जबकि इशान किशन 4 रन ही बना सके। चौथे टी-20 में केएल 14 और रोहित शर्मा ने 12 रन बनाए। जबकि इस मैच में इशान किशन की जगह सूर्यकुमार यादव को मिला और सूर्या ने मैच में 31 गेंदों पर 57 रनों की तूफानी पारी खेली। पांचवे मैच में सूर्यकुमार यादव 21 रन बनाए।

युवा खिलाड़ियों ने धवन को दी चुनौती
जिस तरह से इंग्लैंड के खिलाफ चार टी-20 मैचों में शिखर को प्लेइंग 11 में जगह नहीं मिली और नए खिलाड़ियों जैसे सूर्यकुमार यादव, इशान किशन ने जबरदस्त बल्लेबाजी की उसके बाद टी-20 विश्वकप में शिखर की जगह को लेकर सवाल खड़ा होने लगा था। शिखर धवन के लिए निसंदेह यह मुश्किल समय था। लेकिन इस मुश्किल समय में निराश होने की बजाए शिखर धवन ने इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में जबरदस्त पारी खेली। इंग्लैंड के खिलाफ पहले ही वनडे में शिखर ने 98 रनों की पारी खेली और भारतीय टीम की 66 रनों की जीत के हीरो बने और उन्हें मैन ऑफ द मैच का खिताब दिया गया। इसके बाद दूसरे वनडे में शिखर सिर्फ 4 रन बना सके लेकिन तीसरे वनडे में एक बार फिर से 67 रनों की अर्धशतकीय पारी खेली। लेकिन शिखर का बल्ला यहीं नहीं रुका। आईपीएल में उन्होंने बल्ले से जमकर रन बरसाए।

आईपीएल में जमकर बोला शिखर का बल्ला
इंग्लैंड के खिलाफ सिर्फ एक टी-20 खेलने के बाद शिखर धवन पर आईपीएल में भारी दबाव था। अगर आईपीएल में शिखर का बल्ला खामोश रहता या फिर उनका स्ट्राइक रेट कम रहता तो टी-20 विश्वकप की टीम में शिखर का भविष्य जरूर खतरे में था। लेकिन ऐसी मुश्किल चुनौती का सामना शिखर ने मूंछों पर ताव देकर किया। शिखर धवन ने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ पहले ही मैच में शिखर ने 54 गेंदों पर 85 रनों की आतिशी पारी खेली। धवन ने 8 मैचों में 85, 9, 92, 45, 28, 6, 46, 69, रनों की पारी खेली। 8 मैचों में शिखर धवन ने 380 रन बनाए और आईपीएल के इस सीजन में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी के तौर पर सामने आए। शिखर धवन टी-20 क्रिकेट में हमेशा अपने स्ट्राइक रेट को लेकर सवालों के घेरे में रहते हैं। लेकिन आईपीएल में शिखर धवन ने इस शिकायत को भी दूर किया और 8 मैचों में 380 रन 134.27 के स्ट्राइक रेट से बनाए। 8 मैचों में शिखर ने 43 चौके 8 छक्के लगाए और तीन अर्धशतक लगाया।

युवा और वरिष्ठ खिलाड़ियों के जबरदस्त उदाहरण
शिखर धवन ने अपने ऊपर उठ रहे तमाम सवालों का जवाब धवन ने मुंह से देने की बजाए बल्ले से दिया। फिर चाहे वह फॉर्म हो, धीमा स्ट्राइक रेट हो या फिर बड़ा स्कोर हो। एक समय पर जब शिखर धवन की टी-20 विश्वकप के लिए टीम में जगह पर सवाल खड़ा हो रहा था तो उसके बाद लगातार एक के बाद एक बेहतरीन पारी खेलकर शिखर धवन ने अब टीम में अपनी जगह को पक्का कर लिया है। शिखर धवन का यह धैर्य, कड़ी मेहनत और बावजूद इसके की वह टीम के वरिष्ठ खिलाड़ी हैं और युवा खिलाड़ी उन्हें चुनौती दे रहे हैं एक बेहतरीन उदाहरण हैं कि कैसे आपको हर चुनौती का सामना करना चाहिए।
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