टीम इंडिया के पूर्व कोच का बड़ा खुलासा, बताया- टी20 विश्व कप में क्यों नहीं खेले थे गांगुली-तेंदुलकर
नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास के लिये साल 2007 कई मायनों में यादगार रहा। यह वही साल था जब भारतीय टीम को वनडे विश्व कप के लीग स्टेज से बांग्लादेश के हाथों शर्मनाक हार का सामना करके बाहर होना पड़ा। हालांकि भारतीय क्रिकेट टीम ने इस हार को जल्द ही दिमाग से बाहर निकाल दिया था और दक्षिण अफ्रीका में खेले गये पहले टी20 विश्व कप में एक नये जोश के साथ उतरी। यह टीम वनडे विश्व कप की टीम से काफी अलग थी। इस टीम की कप्तानी पहली बार युवा विकेटकीपर बल्लेबाज एमएस धोनी को सौंपी गई थी जबकि वनडे विश्व कप में टीम की कमान राहुल द्रविड़ के हाथों में थी।
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दक्षिण अफ्रीका में खेले गये इस टी20 विश्व कप में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे कई दिग्गज खिलाड़ियों ने भाग नहीं लिया था। सीनियर खिलाड़ियों के नाम पर टीम में सिर्फ वीरेंद्र सहवाग ही जुड़े थे। हालांकि इसके बावजूद भारतीय टीम खिताब जीतने में कामयाब रही और इस प्रारुप की पहली विश्व चैम्पियन बनी। इस टूर्नामेंट के करीब 13 साल बाद टीम इंडिया के पूर्व कोच लालचंद राजपूत ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि आखिर ऐसा क्या हुआ था जिसके चलते टीम के दिग्गज खिलाड़ियों सौरव गांगुली, सचिन तेंदुलकर ने टूर्नामेंट में भाग नहीं लिया।
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राहुल द्रविड़ ने गांगुली-तेंदुलकर को खेलने से था रोका
एक वेबसाइट के साथ फेसबुक लाइव पर बात करते हुए भारतीय टीम के पूर्व कोच ने खुलासा किया कि तत्कालीन कप्तान राहुल द्रविड़ के चलते ही सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली ने दक्षिण अफ्रीका में हुए पहले टी20 विश्व कप में भाग नहीं लिया था। उन्होंने दावा किया कि राहुल द्रविड़ ने ही इन खिलाड़ियों को टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से रोका था।
2007 विश्व कप के दौरान भारतीय टीम के मैनेजर रहे लालचंद राजपूत ने खुलासा किया कि राहुल द्रविड़ ने भारतीय टीम के सीनियर खिलाड़ियों से बात की और सब एक बात पर सहमत हुए थे कि क्रिकेट के नये प्रारूप में युवा खिलाड़ियों को मौका मिलना चाहिये ताकि टीम नये कप्तान की अगुवाई में निडर होकर क्रिकेट खेले।

सचिन तेंदुलकर को था पछतावा
लालचंद राजपूत ने आगे कहा कि शायद यह राहुल द्रविड़ की सोच ही थी कि धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और खिताब पर कब्जा किया।
उन्होंने कहा, 'जी, यह बात सच है कि राहुल द्रविड़ ने ही सचिन और सौरभ को 2007 का टी20 वर्ल्ड कप खेलने से रोका था। राहुल इंग्लैंड में कप्तान थे और कुछ खिलाड़ी इंग्लैंड से टी20 वर्ल्ड कप के लिए सीधा जोहानिसबर्ग आए थे। तब सीनियर खिलाड़ियों ने कहा था कि इस टूर्नामेंट के लिए युवाओं को मौका दिया जाना चाहिए। हालांकि वर्ल्ड कप जीतने के बाद शायद उन्हें इस बात का पछतावा जरूर हुआ होगा। चूंकि सचिन मुझे हमेशा यह कहते थे कि मैं इतने साल से खेल रहा हूं और मैंने अभी तक वर्ल्ड कप नहीं जीता है।'

द्रविड़-गांगुली का कम्बाइनड वर्जन थे धोनी
टी20 विश्व कप के दौरान पहली बार क्रिकेट फैन्स को धोनी की कप्तानी देखने को मिली थी। इस बार में बात करते हुए पूर्व कोच ने कहा कि उन्हें पहले से यकीन था कि धोनी भारत के सबसे सफल कप्तान में से एक बनने वाले हैं। वह अहम मौकों पर काफी शांत रहते थे और मुश्किल मौकों पर सही फैसले लेते थे।
उन्होंने कहा,' सच कहूं तो धोनी बहुत बहुत शांत रहते थे। वह विपक्षी टीम से दो कदम आगे की सोचते थे। वह सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ की कप्तानी का कम्बाइंड वर्जन थे। वह गांगुली की तरह खिलाड़ियों को भरोसा देते थे। वह ऐसे कप्तान थे जिन्होंने भारतीय क्रिकेट की मानसिकता को बदला। मुझे लगता है कि यह परंपरा को धोनी ने आगे बढ़ाया। उन्होंने भी कई खिलाड़ियों को मौके दिए। धोनी ने मैदान पर कभी कोई गुस्सा नहीं दिखाया और खिलाड़ियों को उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का मौका दिया।'
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