रियो डि जेनेरियो। भारत को मुक्केबाज विकास कृष्णन से पदक की काफी उम्मीदें थीं लेकिन वह क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में हार गए। इसके साथ ही ओलंपिक में उनके पदक जीतने का सपना भी चकनाचूर हो गया। 75 किलोग्राम वर्ग के मुक्केबाज विकास ने हार के बाद माफी मांगते हुए कहा कि वह इससे बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकते थे। ये हैं स्वतंत्र भारत के पहले ओलंपिक पदक विजेता, इनकी वजह से ही शुरू हुआ था पुलिस नौकरी में खेल कोटा
उन्हें उजबेकिस्तान के बेक्तेमिर मेलिकुजिएव ने 3-0 से हराया। इस तरह से निशानेबाजी के बाद मुक्केबाजी में भारत को मुक्केबाज विकास कृष्णन से पदकी की काफी उम्मीदें थीं लेकिन वह क्वॉर्टर फाइनल मुकाबले में हार गए। भी भारत की इस बार झोली खाली रही।
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उन्होंने कहा कि मेरी दिली ख़्वाहिश थी कि मैं आजादी पर्व पर भारत के लिए पदक जीतूं लेकिन मैं अपने प्रयास में सफल रहा। 75 किग्रा मिडिलेट प्रतियोगिता के पहले राउंड में तो विकास ने अपने प्रतिद्वंदी को चुनौती देने का पूरा प्रयास किया लेकिन दूसरे राउंड में वह एक बार भी कड़ी टक्कर देने में सफल नहीं रहे और सेमीफाइनल में प्रवेश नहीं कर सके।
2010 के एशियाई खेलों में भिवानी के लाल विकास कृष्णन ने स्वर्ण जीता था और उसके बाद से ही वह चर्चा में आए थे।