हैदराबाद। देश के लिए कई शतरंज खिताब जीतने वाले विश्वनाथन आनंद की नागरिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह सवाल किसी आम आदमी या संगठन ने नहीं बल्कि खुद मानव संसाधन मंत्रालय ने खड़े कर दिए हैं। इसी कारण आनंद ने हैदराबाद विश्वविद्यालय द्वारा दी जाने वाली डॉक्टरेट की मानद उपाधि लेने से इंकार कर दिया।
हुआ यूं कि हैदराबाद विश्वविद्यालय ने आनंद को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित करने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से अनुमति मांगी। मंत्रालय ने आनंद को डिग्री देने के बजाए उनकी नागरिकता पर सवाल खड़े कर दिए। मंत्रालय का कहना है कि आनंद विदेश में रहते हैं, लिहाजा उन्हें मानद उपाधि दिए जाने पर अंतिम फैसला विदेश मंत्रालय ही करेगा।
मंत्रालय की इस बात पर आनंद को खासी निराशा महसूस हुई। बताया जा रहा है कि उन्होंने उपाधि लेने से इंकार कर दिया है। टेलीविजन चैनलों के मुताबिक आनंद की पत्नी अरुणा आनंद ने कहा कि वो पक्के भारतीय हैं। हां प्रशिक्षण लेने के लिए वो स्पेन जाते जरूर हैं, वो भी भारतीय पासपोर्ट पर।
अब आप बताइये सरकार द्वारा आनंद को विदेशी नागरिक कहना कहां तक उचित है। वो आनंद जिसने खेल जगत में भारत का परचम लहराया हो। अपनी राय नीचे लिखे हुए कमेंट बॉक्स में लिखें।