Tokyo 2020: कोच की नजरअंदाजी पर जताई आपत्ति तो सामान बांध भेजा वापस, एथलीट ने वापस लौटने से किया इंकार
नई दिल्ली। जापान की राजधानी टोक्यो में जारी ओलंपिक खेलों में दुनिया भर के खिलाड़ी अपने टैलेंट का प्रदर्शन करने आये हैं। इस बीच ओलंपिक से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने दुनिया भर की सरकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। ओलंपिक गेम्स में अपने कोच की नजरअंदाजी की शिकायत करने पर बेलारुस की धावक जबरदस्ती उसकी टीम की ओर से एयरपोर्ट ले जाया गया, जहां से उन्हें वापस अपने देश भेजने की तैयारी की जा रही थी। हालांकि 24 वर्षीय स्प्रिंटर क्रिस्टिना सिमानुसकाया ने वापस अपने देश जाने से इंकार कर दिया है।
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रविवार को पुलिस की सुरक्षा में थी, इस बीच सोमवार को जब जापानी कानून निर्माता ताइगा इशिकावा ने एयरपोर्ट के सब प्रीसिंक्ट में उनसे मुलाकात करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें बताया कि अब वो यहां नहीं हैं। रॉयटर्स के साथ बात करते हुए इशिकावा ने बताया कि पुलिस अधिकारी ने यह बताने से इंकार कर दिया है कि वो एथलीट इस वक्त कहां है और न ही पत्रकारों को कोई जवाब दे रही है।

कोच की गलती पर भेजा जा रहा था घर
अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने इससे पहले कहा था कि सिमानुसकाया के साथ उन्होंने बात की है और वो टोक्यो 2020 के एक स्टाफ मेंबर के साथ एयरपोर्ट पर हैं। आईओसी ने कहा कि टोक्यो 2020 में उनकी भागीदारी बनी रहेगी और जल्द ही प्रशासन इस बात का फैसला ले लेगा कि आगे क्या करना है।
उल्लेखनीय है कि रविवार को हुई इस घटना को सबसे पहले रॉयटर्स में प्रकाशित किया गया जिसमें बेलारूस में चल रही अशांति का जिक्र था। 1994 से सत्ता में बने हुए प्रेजिडेंट एलेक्जेंडर लुकाशेंको को पिछले साथ काफी विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा है जिसमें कई एथलीट भी शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार सिमानुसकाया जब रविवार को अपने कमरे में पहुंची तो कोचिंग स्टाफ ने उन्हें सामान पैक करने को कहा जहां से उन्हें अधिकारियों के साथ हनेडा एयरपोर्ट ले जाया गया। हालांकि एयरपोर्ट पहुंचने के बाद इस एथलीट ने फ्लाइट में चढ़ने से इंकार कर दिया और कहा कि वो बेलारुस नहीं लौटेंगी।

आईओसी की देख रेख में है महिला एथलीट
वहीं पर बेलारुसियन ओलंपिक समिति ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा कि कोच ने सिमानुसकाया को ओलंपिक से वापस भेजने का फैसला डॉक्टर्स के कहने पर लिया है, जिनका मानना है कि उनकी इमोशनल, साईकोलॉजिकल स्थिति को देखते हुए वापस भेजना सही रहेगा। वहीं पर जब समिति से आगे बात करने की कोशिश की गई तो उसने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।
गौरतलब है कि बेलारूस की इस महिला धावक ने एक वीडियो पोस्ट कर अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति से उनके केस में शामिल होने की अपील की थी। वहीं पर रॉयटर्स के एक पत्रकार ने इस एथलीट को एयरपोर्ट के पास पुलिस के साथ खड़े देखा था जहां पर बात करते हुए उन्होंने कहा था कि मुझे लगता है कि मैं सुरक्षित हूं क्योंकि मैं पुलिस के साथ हूं। इस बीच कई देशों से मदद की मांग की गई है, तो वहीं पर पोलैंड की सरकार ने मानवीय आधार पर सिमानुसकाया को अपने देश में शरण देने का ऑफर दिया है।

जानें क्या था पूरा मामला
ओलंपिक में बेलारुस की इस एथलीट ने 30 जुलाई को महिलाओं की 100 मीटर रेस में भाग लिया और सोमवार को वो 200 मीटर हीट और गुरुवार को 4x400 मीटर रिले रेस का हिस्सा बनने वाली थी। हालांकि इस खिलाड़ी ने टीम से बाहर होने के कारण पर बात करते हुए कहा कि उनके साथ ऐसा इसलिये किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर कोच की ओर से की जा रही नजरअंदाजी को लेकर बात की थी। सिमानुसकाया ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शिकायत की थी कि उनकी टीम के कुछ खिलाड़ी डोप टेस्ट में फेल हो गये हैं और 4X400 मीटर रेस का हिस्सा नहीं बन सकेंगे, ऐसे में उन खिलाड़ियों की जगह उन्हें मौका दिया जायेगा।
उन्होंने कहा,'ओलंपिक में हमारे कई खिलाड़ी डोपिंग टेस्ट पास नहीं कर पाने की वजह से यहां पर नहीं आ सके हैं, वहीं पर कोच ने बिना मेरी जानकारी के मुझे रिले रेस का हिस्सा बना दिया। मैंने इसको लेकर सार्वजनिक रूप से बयान दिया तो हेड कोच मेरे कमरे में आते हैं और बताते हैं कि ऊपर से आदेश आया है और मुझे ओलंपिक की टीम से बाहर कर वापस घर भेजा जा रहा है।'
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