आयोजन समिति पर लगे और आरोप
मुकेश शर्मा
खेल संपादक, बीबीसी हिंदी
आरोप है कि राष्ट्रमंडल खेलों के उदघाटन और समापन समारोह में इस्तेमाल हुए उपकरण अभी तक लौटाए नहीं गए हैं
राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में शामिल कई विदेशी कंपनियों ने आयोजन समिति पर लाखों डॉलर का भुगतान रोकने का आरोप लगाया है.
ऐसी ही एक कंपनी स्पेक्टाक प्रोडक्शंस के प्रमुख रिक बर्च ने बीबीसी हिंदी सेवा से बातचीत में ये भी आरोप लगाया कि उदघाटन और समापन समारोह में इस्तेमाल हुए उपकरण अभी तक तटों पर ही हैं और उन्हें भारत से वापस भेजने की काग़ज़ी कार्रवाई पूरी नहीं की जा रही है.
वैसे खेलों की आयोजन समिति में वित्तीय मामलों के प्रमुख केयूके रेड्डी से जब बीबीसी ने इस बारे में संपर्क किया तो उनका कहना था कि कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े कुछ मसले अभी पूरी तरह सुलझे नहीं हैं और उन्हीं की वजह से ये देर हो रही है.
वहीं उपकरणों को रोके जाने के बारे में आयोजन समिति से जुड़े राकेश सिंह ने बताया कि आयोजन समिति की ओर से सारे काग़ज़ात कस्टम विभाग को भेजे जा चुके हैं मगर अभी कस्टम विभाग को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से कुछ दिशानिर्देशों का इंतज़ार है और उसके बाद ही ये उपकरण वापस भेजे जा सकेंगे.
मगर रिक बर्च का कहना है, "आयोजन समिति खेलों से पहले तो सुनियोजित ढंग से काम नहीं ही कर पा रही थी ऐसा लगता है कि खेलों के बाद भी वे सुनियोजित नहीं हैं."
बर्च के अनुसार, "आयोजन समिति को रोशनी, ध्वनि और आतिशबाज़ी पर नियंत्रण रखने वाले उपकरणों को भारत से वापस भेजे जाने पर निगरानी रखनी थी मगर वे ऐसा नहीं कर सके हैं."
जवाब का इंतज़ार
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय नियम-क़ानूनों के मुताबिक़ जो उपकरण भारत ले जाए गए थे वे अभी तक वहीं पड़े हैं और उन्हें लौटाने के बारे में आयोजन समिति या सरकारी एजेंसियाँ काग़ज़ी कार्रवाई पूरी नहीं कर पा रही हैं.
बर्च ने बताया कि लगभग 15 कंपनियों का पैसा अभी बक़ाया है और ये राशि औसतन ढाई से पाँच लाख डॉलर प्रति कंपनी के दायरे में है.
आयोजन समिति के प्रमुख सुरेश कलमाड़ी को लिखी बर्च की ई-मेल की प्रति बीबीसी हिंदी के पास है और वो मेल बर्च ने 11 और लोगों को भी भेजी है.
मगर उनके अनुसार अभी तक कहीं से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है.
बर्च 1984 के लॉस एंजेलेस ओलंपिक में प्रोडक्शंस के निदेशक थे और उन्हीं की निगरानी में 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक और 2000 के सिडनी ओलंपिक में उदघाटन और समापन समारोह आयोजित हुए थे.
वह 2008 में बीजिंग में हुए ओलंपिक में भी समारोहों के सलाहकार थे.
उन्होंने बताया, "उदघाटन और समापन समारोह की महानिदेशक शोभना नारायण से हमने संपर्क करने की कोशिश की मगर अभी तक हमें सफलता नहीं मिली है. ऐसा लगता है कि आयोजन समिति अब अस्तित्त्व में ही नहीं है."
बर्च के अनुसार आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट फ़ोन ही नहीं उठाते हैं और सुरेश कलमाड़ी की भी वही स्थिति है.
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में भारत के सदस्य रणधीर सिंह से लेकर प्रधानमंत्री की ओर से इन खेलों के आयोजन पर नज़र रखने के लिए नियुक्त किए गए कई अधिकारियों तक से उन्होंने संपर्क करने की विफल कोशिशें की हैं.
आयोजन समिति का तर्क
बर्च का कहना है कि राष्ट्रमंडल खेल महासंघ के अधिकारियों की ओर से भी यही जवाब मिल रहा है कि वे भी भारतीय अधिकारियों से संपर्क नहीं साध पा रहे हैं.
इसके बाद जब बीबीसी ने आयोजन समिति में उपकरणों को मँगाने और उन्हें भेजने से जुड़े मामले देख रहे अधिकारी राकेश सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने बताया, "कंपनियों को हमने उदघाटन और समापन समारोह के लिए कॉन्ट्रैक्ट दिए थे. उन कंपनियों ने वहाँ से सामान लाने के लिए एक दूसरी कंपनी का सहारा लिया, जिसने सामान यहाँ पहुँचाया."
सिंह के अनुसार, "हमने तो वो सामान लाने के लिए उनका शुल्क माफ़ कर दिया. फिर हमने सामान वापसी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दे दिया. अब अगर उनकी कंपनी अभी तक कस्टम विभाग के पास बैठी है तो इसमें हमारा क्या दोष है."
उन्होंने बताया कि कस्टम विभाग अभी रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया से कुछ दिशानिर्देश मिलने का इंतज़ार कर रहा है और उसके बाद ही वो उपकरण वापस भेजा जा सकेगा.
क़ानूनी कार्रवाई
मगर बर्च का कहना था, "मुझे पता चला है कि भ्रष्टाचार के कुछ मामलों में भारत में जाँच जो रही है पर अगर ऐसी बात थी तो हमसे भी इस बारे में संपर्क किया जाना चाहिए था और कम से कम किसी को हमें सूचित तो करना चाहिए था, मगर ऐसा नहीं किया गया."
बर्च के अनुसार अधिकतर कंपनियों को अक्तूबर में ही धन अदा कर दिया जाना चाहिए था फ़िलहाल ऐसा नहीं हुआ है और ये कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन है.
उन्होंने ये भी धमकी दी कि इन हालात में उन्हें ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड में क़ानूनी कार्रवाई करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है.
बर्च ने बताया, "हम संयुक्त रूप से क़ानूनी कार्रवाई कर सकते हैं क्योंकि ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड में क़ानूनी कार्रवाई शुरू करने से कम से कम कुछ जवाब तो मिलेगा."
बीबीसी ने इस बारे में आयोजन समिति में वित्तीय मामलों के प्रमुख केयूके रेड्डी से संपर्क किया तो रेड्डी का कहना था कि अभी कुछ कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े कुछ मसले सुलझे नहीं हैं इसलिए अभी पूरी राशि नहीं अदा की जा सकी है.
रेड्डी के मुताबिक़ उन कंपनियों को भी इस बारे में जानकारी है और वे काग़ज़ात मुहैया कराने की प्रक्रिया में लगे हैं.
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