मलेशिया में भारत का परचम लहराया
सिरसा। खेलों के क्षेत्र में सिरसा जिला का नाम अंतर्राष्ट्रीय पटल पर चमकाने वाले शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थान के योगा कोच 77 वर्षीय इलमचंद इन्सां ने एक बार फिर से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इलमचंद ने कुआल्लमपुर (मलेशिया) में 6 से 12 दिसम्बर को आयोजित 16वीं एशियन मास्टर्स एथेलेक्टिक्स चैंपियनशिप में 70 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के विभिन्न मुकाबलों में तीन पदक हासिल किए।
इलमचंद का दो अन्य मुकाबलों में सराहनीय प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता से भाग लेकर सिरसा लौटे इलमचंद ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 22 देशों के सीनियर वर्ग के खिलाडिय़ों ने भाग लिया था। उन्होने बताया कि इस प्रतियोगिता में उन्होने पोल वाल्ट में 1 मीटर 70 सैंटीमीटर उंची छलांग लगाकर तृतीय स्थान पाया। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर ताईपे तथा दूसरे स्थान पर भारत रहा था। बाधा दौड़ में 2 किलोमीटर लंबी दौड़ जिसमें 20 हर्डल लगाए गए थे, को 12 मिनट तथा 24.61 सैंकिड में पूरा किया।
इस मुकाबले में इलमचंद ने तीसरा स्थान हासिल किया। 7 किलोमीटर की मैराथन दौड़ में उन्होने 65 से 74 वर्ग की उम्र के मुकाबले में सातवां स्थान हासिल किया। इलमचंद ने बताया कि इसके अलावा उन्होने प्रतियोगिता में हाईजंप व लांग जंप के मुकाबलों में भी बहुत सराहनीय प्रदर्शन किया, जिसे खुब सराहा गया।
उन्होने बताया कि इस प्रतियोगिता के दौरान ज्यादातर प्रतिभागी मांसाहारी थे, तथा वहां शाकाहारियों के लिए भोजन का समुचित प्रबंध भी नही था, परंतु इसके बावजूद उन्होने प्रतियोगिता के पांच ईवेंटस में भाग लेकर तीन मैडल हासिल किए तथा दो में सराहनीय प्रदर्शन किया। उन्होने बताया कि सभी प्रतिभागी उनके प्रदर्शन को देखकर हैरान हो रहे थे। उन्होने बताया कि पोल वाल्ट ईवेंट मे जहां दूसरे प्रतिभागियों के पास अत्याधुनिक महंगे पोल थे जबकि उनके पास साधारण बांस का पोल था, जिसके द्वारा उन्होने छलांग लगाई। इलमचंद ने अपनी सफलता का श्रेय संत गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां को दिया।
इलमचंद का दो अन्य मुकाबलों में सराहनीय प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता से भाग लेकर सिरसा लौटे इलमचंद ने बताया कि इस प्रतियोगिता में 22 देशों के सीनियर वर्ग के खिलाडिय़ों ने भाग लिया था। उन्होने बताया कि इस प्रतियोगिता में उन्होने पोल वाल्ट में 1 मीटर 70 सैंटीमीटर उंची छलांग लगाकर तृतीय स्थान पाया। इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर ताईपे तथा दूसरे स्थान पर भारत रहा था। बाधा दौड़ में 2 किलोमीटर लंबी दौड़ जिसमें 20 हर्डल लगाए गए थे, को 12 मिनट तथा 24.61 सैंकिड में पूरा किया।
इस मुकाबले में इलमचंद ने तीसरा स्थान हासिल किया। 7 किलोमीटर की मैराथन दौड़ में उन्होने 65 से 74 वर्ग की उम्र के मुकाबले में सातवां स्थान हासिल किया। इलमचंद ने बताया कि इसके अलावा उन्होने प्रतियोगिता में हाईजंप व लांग जंप के मुकाबलों में भी बहुत सराहनीय प्रदर्शन किया, जिसे खुब सराहा गया।
उन्होने बताया कि इस प्रतियोगिता के दौरान ज्यादातर प्रतिभागी मांसाहारी थे, तथा वहां शाकाहारियों के लिए भोजन का समुचित प्रबंध भी नही था, परंतु इसके बावजूद उन्होने प्रतियोगिता के पांच ईवेंटस में भाग लेकर तीन मैडल हासिल किए तथा दो में सराहनीय प्रदर्शन किया। उन्होने बताया कि सभी प्रतिभागी उनके प्रदर्शन को देखकर हैरान हो रहे थे। उन्होने बताया कि पोल वाल्ट ईवेंट मे जहां दूसरे प्रतिभागियों के पास अत्याधुनिक महंगे पोल थे जबकि उनके पास साधारण बांस का पोल था, जिसके द्वारा उन्होने छलांग लगाई। इलमचंद ने अपनी सफलता का श्रेय संत गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां को दिया।
Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:51 [IST]
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