एशियाड-2010 (हॉकी) : सोना हाथ से निकला, कांसा बचाने की बारी (लीड-1)
निर्धारित समय तक दोनों टीमें 3-3 की बराबरी पर थीं। इसके बाद खेल अतिरिक्त समय तक खिंचा और यहीं मलेशिया ने 76वें मिनट में एक पेनाल्टी कार्नर हासिल किया। इस पेनाल्टी कार्नर को गोल्डन गोल में बदलकर रहीम मोहम्मद अमीन ने मलेशिया को फाइनल में पहुंचा दिया।
फाइनल में उसका सामना पाकिस्तान से होगा। पाकिस्तान ने मंगलवार को ही खेले गए पहले सेमीफाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरिया को पेनाल्टी शूट आउट के जरिए 4-3 से पराजित किया। भारत और दक्षिण कोरिया को अब कांस्य पदक के लिए भिड़ना होगा।
मैच का पहला गोल मलेशिया ने 32वें मिनट में किया। यह गोल अब्दुल जलील अहमद की स्टिक से निकला। इस शानदार फील्ड गोल ने भारत को सकते में डाल दिया। इसके बाद भारत ने हमला तेज कर दिया। इसी का नतीजा था कि 34वें मिनट में उसे पहला पेनाल्टी कार्नर मिला।
संदीप सिंह ने अब तक 10 गोल करते हुए पेनाल्टी कार्नर में शत-प्रतिशत अंक हासिल किए थे लेकिन सेमीफाइनल मुकाबले में मिले इस पहले पेनाल्टी कार्नर पर वह गोल करने से चूक गए।
पहला प्रयास बेकार जाते ही भारत को दूसरा पेनाल्टी कार्नर मिला। भारत के पास बराबरी करने का सुनहरा मौका था। इस बार संदीप ने कोई गलती नहीं की और मलेशियाई गोलकीपर की दाईं ओर से गेंद को गोलपोस्ट में डालकर स्कोर 1-1 कर दिया। इस तरह संदीप ने अपना 11वां गोल किया।
इसी स्कोर के साथ दोनों टीमें मध्यांतर में आराम करने गईं। मध्यांतर के बाद भारतीय खिलाड़ियों का हौसला देखने लायक था। हमले तेज हो गए। 37वें मिनट में अर्जुन ने मध्यमपंक्ति से तुषार को एक शानदार पास दिया, जिसे गोल में डालकर उन्होंने भारत को 2-1 से आगे कर दिया।
48वें मिनट में मलेशिया ने अपना दूसरा पेनाल्टी कार्नर हासिल किया। उसके पास बराबरी करने का शानदार मौका था। इस मौके को अजलान मिरसोम ने खाली नहीं जाने दिया और एक आसान गोल करके अपनी टीम को 2-2 की बराबरी पर ला दिया।
भारत एक बार फिर पिछड़ रहा था। मैच का रोमांच बढ़ता जा रहा था। भारत ने हमला तेज कर दिया। 52वें मिनट में उसे एक पेनाल्टी कार्नर मिला, जिसे गोल में तब्दील करने की जिम्मेदारी धनंजय महादिक के कंधों पर थी। संदीप के चोटिल होने के बाद ड्रैग फ्लिक की जिम्मेदारी उन्हें मिली थी।
महादिक ने सरदार सिंह द्वारा किए गए ड्रैग पर जोरदार फ्लिक किया, जो मलेशियाई गोलकीपर के शरीर पर लगी। वहीं कप्तान राजपाल सिंह खड़े थे। राजपाल ने इस मौके का फायदा उठाया और चुपके से गेंद विपक्षी टीम के खेमे में डाल दी। भारत 3-2 से आगे हो चुका था।
अब भारत को इस अंतर को बनाए रखना था लेकिन मलेशियाई टीम हार मानने वाली नहीं थी। उसने हमला तेज कर दिया। 66वें मिनट में उसे एक पेनाल्टी कार्नर मिला, जिसे गोल में तब्दील कर मलेशियाई टीम 3-3 की बराबरी कर चुकी थी।
अंतिम मिनट में भारत को एक और पेनाल्टी कार्नर मिला लेकिन भारतीय खिलाड़ी इसका फायदा नहीं उठा सके। यहां भारत को संदीप की कमी खली। वह मैदान में होते तो इस मैच का नतीजा कुछ और होता।
3-3 की बराबरी के साथ दोनों टीमों ने अतिरिक्त समय का खेल शुरू किया। शुरुआती छह मिनट तक दोनों टीमें गोल करने के लिए जूझती रहीं लेकिन 76वें मिनट में मलेशिया को एक पेनाल्टी कार्नर मिला, जो उसके लिए वरदान साबित हुआ। इसी पेनाल्टी कार्नर पर गोल करके अमीन ने अपनी टीम को फाइनल में पहुंचा दिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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