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सायना ने जीता चौथा सुपर सीरीज खिताब (राउंडअप)

सायना ने क्वीन एलिजाबेथ स्टेडियम में खेले गए खिताबी मुकाबले में वांग को 15-21, 21-16, 21-17 से पराजित किया। जीत के बाद सायना ने कहा, "मुझे तो अपनी जीत पर यकीन नहीं हो रहा है। मेरी यह जीत खास है। वांग इस सत्र में शानदार फार्म में हैं और मुझे खुशी है कि मैं उन्हें हराने में सफल रही। पहला गेम हारने के बाद मैं थोड़ा घबरा गई थी लेकिन दूसरे गेम की सफलता ने मुझे आत्मबल दिया। तीसरे गेम में मैं अपनी बढ़त बनाए रखना चाहती थी और मैं ऐसा करने में सफल भी रही।"

सायना ने इस वर्ष अपना तीसरा सुपर सीरीज खिताब जीता। उन्होंने अपने करियर में कुल पांच खिताब जीते हैं। सायना ने अपने करियर में कुल चार सुपर सीरीज खिताब जीते हैं। सायना ने इस वर्ष इंडियन ओपन, सिंगापुर ओपन और इंडोनेशियन ओपन (दो बार) और राष्ट्रमंडल खेल के एकल मुकाबले में स्वर्ण पदक जीते हैं।

हांगकांग में सायना की खिताबी जीत पक्की मानी जा रही थी क्योंकि उनके खेल का स्तर विश्वस्तरीय था। एशियाई खेलों में सायना हांगकांग की खिलाड़ी प्यूई यिन यिप के हाथों क्वार्टर फाइनल में हार गई थीं लेकिन सायना ने यिप को उन्हीं के घर में क्वार्टर फाइनल में हराकर उस हार का हिसाब बराबर किया।

एशियाई खेलों के निराशाजनक प्रदर्शन से उबरने वाली सायना ने शनिवार को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में जर्मनी की खिलाड़ी जूनियन शेंक को कड़े संघर्ष के बाद 21-19, 17-21, 21-12 से हराया था। किसी भारतीय खिलाड़ी ने 28 वर्ष के बाद इस खिताब पर कब्जा किया है। इससे पहले 1982 में प्रकाश पादुकोण ने यह खिताब जीता था।

सायना ने खिताबी जीत के बाद देशभक्ति का शानदार जज्बा पेश किया। पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान सायना पोडियम पर तिरंगे के साथ मौजूद थीं लेकिन वांग के पास चीन का राष्ट्रध्वज नहीं था। सायना ने मैच के बाद एक प्रशंसक से राष्ट्रध्वज लिया और फिर उसे लेकर हंसते-हंसते पोडियम पर चढ़ गईं। पुरस्कार वितरण के बाद सायना ने उस प्रशंसक को खासतौर पर हाथ हिलाकर धन्यवाद दिया।

रविवार शाम को सायना ने समाचार चैनल 'टाइम्स नाउ' से बातचीत के दौरान कहा कि एशियाई खेलों की नाकामी के बाद उन्होंने खुद को साबित कर दिखाया है। सायना ने कहा, "मैं खुश हूं कि मेरे लिए वर्ष का शानदार समापन हुआ है। मैं एशियाई खेलों में देश के लिए पदक जीतना चाहती थी लेकिन किस्मत मेरे साथ नहीं थी। उसके बाद मुझ पर खुद को साबित करने का दबाव था, जिसे मैंने पार कर लिया है।"

सायना ने यह भी कहा कि हांगकांग में मिली खिताबी जीत 2012 में लंदन में होने वाले ओलम्पिक खेलों के लिए प्रोत्साहित करेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए उन्हें अपनी फिटनेस भी बनाए रखनी होगी।

सायना कई बार सार्वजनिक तौर पर कह चुकी हैं कि उनका सपना ओलम्पिक में स्वर्ण पदक जीतना है। वह कहती हैं कि लंदन ओलम्पिक से पहले मिली इस जीत से उनका आत्मविश्वास अवश्य बढ़ा होगा।

सायना ने कहा, "अगला वर्ष बहुत कठिन है। मेरा पहला लक्ष्य ओलम्पिक क्वालीफायर में अच्छा खेलना है और उसके बाद फिटनेस के इसी स्तर को ओलम्पिक में बनाए रखना है।"

हांगकांग खिताब जीतने के बाद सायना विश्व की सर्वोच्च वरीयता प्राप्त एकल खिलाड़ी बनने की दहलीज पर पहुंच गई हैं। उन्होंने कहा, "मैंने यह नहीं सोचा था कि वर्ष की समाप्ति तक मैं सर्वोच्च वरीयता के नजदीक पहुंच जाऊंगी।" सायना ने खिताबी जीत का श्रेय अपने कोच और माता-पिता को दिया।

भारत को 28 वर्ष बाद हांगकांग खिताब दिलाने वाली सायना ने कहा, "मुझे उम्मीद नहीं थी कि मैं सर्वोच्च वरीयता के नजदीक पहुंच जाऊंगी और अब मैंने लगभग उस स्थान को हासिल कर लिया है। मैंने इस वर्ष की समाप्ति तक शीर्ष पांच में बने रहने का लक्ष्य निर्धारित किया था। लोग मुझसे पूछते थे कि आप कब सर्वोच्च की कुर्सी पर विराजमान होंगी? यह खुशी का समय है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

Story first published: Sunday, December 12, 2010, 21:00 [IST]
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