सायना ने दिखाया देशभक्ति का जज्बा
हांगकांग। मौजूदा एशियाई चैम्पियन चीन की शिशियान वांग को हराकर रविवार को योनेक्स-सनराइज हांगकांग ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट का महिला एकल खिताब जीतने वाली भारत की सायना नेहवाल ने हांगकांग के क्वीन एलिजाबेथ स्टेडियम में देशभक्ति का शानदार जज्बा पेश किया। सायना ने 2010 विश्व चैम्पियनशिप में खुद को हराने वाली वांग को तीन गेम तक चले मुकाबले के बाद 15-21, 21-16, 21-17 (2-1) से पराजित किया। पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान सायना पोडियम पर तिरंगे के साथ मौजूद थीं लेकिन वांग के पास चीन का राष्ट्रध्वज नहीं था। इस जीत ने सायना को एशियाई खेलों में मिली नाकामी को भुलाने का मौका दे दिया, जहां वह क्वार्टर फाइनल में हार गई थीं।
राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली सायना ने कहा, "मुझे तो अपनी जीत पर यकीन नहीं हो रहा है। मेरी यह जीत खास है। वांग इस सत्र में शानदार फार्म में हैं और मुझे खुशी है कि मैं उन्हें हराने में सफल रही। पहला गेम हारने के बाद मैं थोड़ा घबरा गई थी लेकिन दूसरे गेम की सफलता ने मुझे आत्मबल दिया। तीसरे गेम में मैं अपनी बढ़त बनाए रखना चाहती थी और मैं ऐसा करने में सफल भी रही।"
सायना ने इस वर्ष अपना तीसरा सुपर सीरीज खिताब जीता। उन्होंने अपने करियर में कुल पांच खिताब, जिनमें चार सुपर सीरीज खिताब शामिल हैं। सायना ने इस वर्ष हांगकांग ओपन के अलावा इंडियन ओपन, सिंगापुर ओपन और इंडोनेशियन ओपन (दो बार) और राष्ट्रमंडल खेल के एकल मुकाबले में स्वर्ण पदक जीते हैं।
किसी भारतीय खिलाड़ी ने 28 वर्ष के बाद इस खिताब पर कब्जा किया है। इससे पहले 1982 में प्रकाश पादुकोण ने यह खिताब जीता था। इस लिहाज से सायना की यह जीत काफी मायने रखती है। साथ ही पोडियम पर उनका राष्ट्रध्वज के साथ मौजूद रहना यह भी साबित करता है कि दुनिया जीतने के इरादे से निकली इस खिलाड़ी में देशभक्ति का जज्बा भी कूट-कूट कर भरा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली सायना ने कहा, "मुझे तो अपनी जीत पर यकीन नहीं हो रहा है। मेरी यह जीत खास है। वांग इस सत्र में शानदार फार्म में हैं और मुझे खुशी है कि मैं उन्हें हराने में सफल रही। पहला गेम हारने के बाद मैं थोड़ा घबरा गई थी लेकिन दूसरे गेम की सफलता ने मुझे आत्मबल दिया। तीसरे गेम में मैं अपनी बढ़त बनाए रखना चाहती थी और मैं ऐसा करने में सफल भी रही।"
सायना ने इस वर्ष अपना तीसरा सुपर सीरीज खिताब जीता। उन्होंने अपने करियर में कुल पांच खिताब, जिनमें चार सुपर सीरीज खिताब शामिल हैं। सायना ने इस वर्ष हांगकांग ओपन के अलावा इंडियन ओपन, सिंगापुर ओपन और इंडोनेशियन ओपन (दो बार) और राष्ट्रमंडल खेल के एकल मुकाबले में स्वर्ण पदक जीते हैं।
किसी भारतीय खिलाड़ी ने 28 वर्ष के बाद इस खिताब पर कब्जा किया है। इससे पहले 1982 में प्रकाश पादुकोण ने यह खिताब जीता था। इस लिहाज से सायना की यह जीत काफी मायने रखती है। साथ ही पोडियम पर उनका राष्ट्रध्वज के साथ मौजूद रहना यह भी साबित करता है कि दुनिया जीतने के इरादे से निकली इस खिलाड़ी में देशभक्ति का जज्बा भी कूट-कूट कर भरा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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Story first published: Tuesday, November 14, 2017, 12:51 [IST]
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