भारत के दिल्ली विश्वविद्यालय के एक छात्र ने पैरा एथलेटिक्स में धूम मचा दी है। उन्होंने 2019 में इस खेल को अपनाया। उनके कोच, सत्यपाल सिंह, तब से उनका मार्गदर्शन कर रहे हैं। एथलीट की यात्रा एक साधारण इंटरनेट सर्च से शुरू हुई, जिसमें पैरालंपिक के बारे में जानकारी थी, जिसने उनकी रुचि जगाई।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2020 | High Jump - T64 | S रजत |
वह अपने कौशल को निखारने के लिए दिन में छह घंटे प्रशिक्षण लेते हैं। यह कठोर प्रशिक्षण कार्यक्रम आगामी प्रतियोगिताओं की उनकी तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है। खेल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उनके दैनिक दिनचर्या और प्रयासों में स्पष्ट है।
2021 में, उन्हें भारत में प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार मिला। यह सम्मान उनकी प्रतिभा और पैरा एथलेटिक्स के प्रति समर्पण का प्रमाण है। यह पुरस्कार खेल में उनके उपलब्धियों और योगदान को मान्यता देता है।
आगे देखते हुए, उनका लक्ष्य 2024 के पेरिस पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है। यह लक्ष्य उन्हें अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाने और हर प्रशिक्षण सत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। उनकी महत्वाकांक्षा खेल के प्रति उनके दृढ़ संकल्प और जुनून को दर्शाती है।
एक स्कूल वॉलीबॉल खिलाड़ी से एक मान्यता प्राप्त पैरा एथलीट तक एथलीट की यात्रा प्रेरणादायक है। अपने कोच के निरंतर समर्पण और समर्थन से, वह वैश्विक मंच पर अपने सपनों को पूरा करने के लिए सही रास्ते पर है।