राजेश्वरी कुमारी, जिनका जन्म 10 दिसंबर 1991 को हुआ था, ट्रैप वूमेन इवेंट में विशेषज्ञता रखने वाली एक सक्रिय भारतीय निशानेबाज हैं। उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और उल्लेखनीय परिणाम प्राप्त किए हैं। निशानेबाजी में उनका सफ़र 20 साल की उम्र में शुरू हुआ, जो उनके पिता रणधीर सिंह से प्रभावित था, जो पाँच बार के ओलंपियन और एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता थे।

राजेश्वरी ने विश्व कप स्पर्धाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। 2021 में, वह महिला ट्रैप टीम का हिस्सा थीं, जिसने 321 के स्कोर के साथ नई दिल्ली में पहला स्थान जीता था। उसी वर्ष, उनकी टीम ने 444 के स्कोर के साथ मिस्र के काहिरा में दूसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा, उन्होंने मिक्स्ड ट्रैप टीम स्पर्धाओं में भाग लिया है, जिसमें कई बार छठा स्थान हासिल किया है।
2024 में, राजेश्वरी मोरक्को के रबात में महिला ट्रैप स्पर्धा में 113 के स्कोर के साथ आठवें स्थान पर रहीं। वह काहिरा में 14वें और बाकू में 23वें स्थान पर रहीं। उनके अन्य हालिया प्रदर्शनों में लोनाटो डेल गार्डा में 45वें और कतर के दोहा में 46वें स्थान पर रहना शामिल है।
राजेश्वरी ने 2022 एशियाई खेलों में टीम ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीता। यह पदक उन्हें उनके पिता रणधीर सिंह ने प्रदान किया। यह उपलब्धि उनके निरंतर प्रदर्शन और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
राजेश्वरी एक ऐसे परिवार से आती हैं जिसकी खेल विरासत बहुत समृद्ध है। उनके पिता रणधीर सिंह एक प्रसिद्ध निशानेबाज और खेल प्रशासक हैं। उनके दादा भलिंद्र सिंह प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलते थे। उनके परदादा यादवेंद्र सिंह भारत के लिए क्रिकेट खेलते थे और भारतीय ओलंपिक संघ के प्रमुख रह चुके हैं।
राजेश्वरी मेहताब सिंह से विवाहित हैं और उन्हें "रिया" उपनाम से जाना जाता है। वह धाराप्रवाह अंग्रेजी और हिंदी बोलती हैं और अपने खेल प्रयासों में पंजाब (IND) का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने 2021 में बचपन के एक दोस्त के साथ मिलकर एक लग्जरी भारतीय कपड़ों और कढ़ाई के ब्रांड सौरभ राजेश्वरी की सह-स्थापना की।
राजेश्वरी कुमारी की निशानेबाजी में यात्रा कई लोगों को प्रेरित करती है। उनकी उपलब्धियाँ खेल के प्रति उनके समर्पण और जुनून को दर्शाती हैं। जैसे-जैसे वह ओलंपिक खेल पेरिस 2024 सहित भविष्य की प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रही हैं, उनके प्रशंसक अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनके अगले प्रदर्शन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।