कुश्ती की दुनिया में, कुछ नामों का प्रभाव उतना ही मजबूत होता है जितना कि इस अज़रबैजानी एथलीट का, जिसने अपने करियर में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने 1999 में कुश्ती की शुरुआत की और तब से इस खेल में एक प्रमुख व्यक्ति बन गए हैं।

| Season | Event | Rank |
|---|---|---|
| 2016 | Men's 59kg | 5 |
| 2012 | Men 55kg | S रजत |
| 2008 | Men 55kg | S रजत |
वह अज़रबैजान के बाकू में स्थित नेफ्टची क्लब से जुड़े हुए हैं। उनकी कोचिंग यात्रा 2002 से हिजरान शरीफोव के नेतृत्व में शुरू हुई। उन्हें राष्ट्रीय कोच जेमसिद खयराबदी से भी मार्गदर्शन मिला।
उनके करियर में कई यादगार उपलब्धियां हैं। उन्होंने 2008 और 2012 के ओलंपिक खेलों में रजत पदक जीता। 2011 में, वे तुर्की के इस्तांबुल में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में 55 किग्रा वर्ग में विश्व चैंपियन बने। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 2007 और 2008 में यूरोपीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया।
खेलों में उनके योगदान को मान्यता देते हुए, उन्हें 2012 में अज़रबैजान के राष्ट्रपति से मानद डिप्लोमा मिला। इससे पहले, 2008 में, उन्हें अज़रबैजान के राष्ट्रपति द्वारा तरग्गी पदक से सम्मानित किया गया था।
कुश्ती के अलावा, उन्हें पेंटिंग पसंद है। उनका खेल दर्शन सरल लेकिन गहरा है: "हर एथलीट की इच्छा कठिन प्रशिक्षण सत्रों के बाद प्रतियोगिताओं में पदक जीतने की होती है। मेरे लिए भी ऐसा ही है। किसी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के बाद परिणाम हासिल करना, पदक जीतना मुझे खुशी देता है।"
वह अज़रबैजानी ग्रीको-रोमन पहलवान, फरीद मंसुरोव को अपना हीरो और आदर्श मानते हैं।
खेल उपलब्धियों के अलावा, उन्हें अज़रबैजान के बाकू में आयोजित 2015 यूरोपीय खेलों के लिए राजदूत नियुक्त किया गया था।
एथलीट की शुरुआती दिनों से लेकर एक मशहूर पहलवान बनने की यात्रा उनकी समर्पण और कड़ी मेहनत का प्रमाण है। उनकी उपलब्धियां खेल की दुनिया में कई लोगों को प्रेरित करती रहती हैं।